₹11 लाख पूंजी वाली कंपनी को ₹22,500 करोड़ का करार? तेजस्वी का बड़ा दावा
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👉 WhatsApp से जुड़ेंबिहार की राजनीति में निवेश और उद्योग नीति को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि बिहार में न्यूक्लियर क्षेत्र में 22,500 करोड़ रुपये के निवेश का एमओयू ऐसी कंपनी के साथ किया गया है, जो कथित तौर पर महज पांच महीने पुरानी है। तेजस्वी यादव के मुताबिक कंपनी की कुल पूंजी करीब 11 लाख रुपये बताई गई है।
राष्ट्रीय जनता दल के कार्यकारी अध्यक्ष और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने शुक्रवार को बयान जारी कर उद्योग विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने सरकार से इस एमओयू की वास्तविकता, कंपनी की वित्तीय क्षमता और निवेश की योजना से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।
तेजस्वी का आरोप है कि सरकार बड़े निवेश समझौतों का प्रचार कर रही है, लेकिन पहले हुए एमओयू की प्रगति पर स्पष्ट रिपोर्ट सामने नहीं रख रही।
22,500 करोड़ के न्यूक्लियर निवेश पर क्यों उठे सवाल?
तेजस्वी यादव ने दावा किया कि जिस कंपनी के साथ न्यूक्लियर क्षेत्र में 22,500 करोड़ रुपये के निवेश का समझौता हुआ है, उसकी स्थापना 25 फरवरी 2026 को हुई थी। उन्होंने कंपनी की कथित 11 लाख रुपये की पूंजी को आधार बनाकर सरकार से सवाल किया कि इतनी कम पूंजी वाली कंपनी इतनी बड़ी परियोजना में निवेश कैसे करेगी।
उनका कहना है कि परमाणु ऊर्जा संयंत्र या परमाणु अनुसंधान केंद्र जैसी परियोजनाओं के लिए बड़ी वित्तीय क्षमता, तकनीकी विशेषज्ञता और मजबूत संस्थागत व्यवस्था की जरूरत होती है। ऐसे में कंपनी की क्षमता और प्रस्तावित निवेश के बीच अंतर की जांच होनी चाहिए।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में सरकार या संबंधित कंपनी की ओर से तेजस्वी यादव के इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया शामिल नहीं है। इसलिए कंपनी की वास्तविक वित्तीय क्षमता और एमओयू की शर्तों को लेकर अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के स्पष्टीकरण के बाद ही निकाला जा सकता है।
पहले के निवेश एमओयू पर भी तेजस्वी ने मांगी रिपोर्ट
तेजस्वी यादव ने सिर्फ न्यूक्लियर निवेश प्रस्ताव को लेकर ही सवाल नहीं उठाया। उन्होंने दावा किया कि बिहार सरकार उद्योग विभाग और विभिन्न औद्योगिक समूहों के बीच करीब 51,500 करोड़ रुपये के निवेश समझौतों का प्रचार कर रही है।
आरजेडी नेता ने कहा कि इससे पहले वर्ष 2024, 2025 और उससे भी पहले दो लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से जुड़े समझौते किए जाने की बात कही गई थी। उन्होंने सरकार से पूछा कि इन पुराने एमओयू में से कितने वास्तव में जमीन पर उतरे और कितनी परियोजनाओं में उत्पादन शुरू हुआ।
उनके मुताबिक किसी भी निवेश समझौते की सफलता का आकलन केवल एमओयू की घोषणा से नहीं, बल्कि जमीन पर परियोजना लगने, निवेश आने और रोजगार पैदा होने से होना चाहिए।
तेजस्वी ने सरकार से इन सभी पुराने समझौतों की प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि घोषित निवेश में से कितना वास्तविक परियोजनाओं में बदला है।
जमीन और सब्सिडी को लेकर भी सरकार पर निशाना
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि अगर बिना पर्याप्त वित्तीय क्षमता वाली कंपनियों को सरकारी जमीन, सब्सिडी या दूसरी सुविधाएं दी जाती हैं और बाद में परियोजनाएं आगे नहीं बढ़तीं, तो राज्य के संसाधनों का नुकसान हो सकता है।
उन्होंने आशंका जताई कि निवेश के नाम पर सरकारी सहायता का दुरुपयोग हो सकता है। आरजेडी नेता ने सवाल उठाया कि अगर कोई कंपनी सरकारी सहायता लेने के बाद बिहार से अपना प्रोजेक्ट समेट लेती है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन तय करेगा।
हालांकि, ये आरोप फिलहाल तेजस्वी यादव के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं। किसी कंपनी द्वारा सरकारी सहायता लेकर भागने या किसी अनियमितता की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं हुई है। इसलिए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी होगी।
बड़े निवेश का स्वागत, लेकिन पारदर्शिता जरूरी: तेजस्वी
तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार में बड़ी और सक्षम कंपनियां निवेश करें, उद्योग स्थापित करें और रोजगार के अवसर पैदा करें तो उनका स्वागत किया जाएगा। उन्होंने उद्योगों के विकास में सरकार को सहयोग देने की बात भी कही।
लेकिन उनका तर्क है कि निवेश के नाम पर केवल एमओयू और घोषणाओं से बिहार की अर्थव्यवस्था में बदलाव नहीं आएगा। सरकार को यह बताना चाहिए कि निवेश प्रस्तावों की वित्तीय और तकनीकी जांच किस स्तर पर की जाती है और परियोजनाओं की निगरानी कैसे होती है।
न्यूक्लियर क्षेत्र में प्रस्तावित 22,500 करोड़ रुपये का एमओयू इसी वजह से राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। अब निगाहें सरकार और संबंधित कंपनी की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर हैं। यदि कंपनी की वित्तीय क्षमता, परियोजना की विस्तृत योजना और एमओयू की शर्तें सार्वजनिक होती हैं, तो इस विवाद की वास्तविक तस्वीर और साफ हो सकती है।
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