तेजस्वी का बड़ा हमला, बोले- बिहार का खजाना खाली, वेतन-पेंशन के पैसे नहीं

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बिहार की राजनीति में एक बार फिर तेजस्वी यादव के बयान से सियासी हलचल तेज हो गई है। तेजस्वी यादव ने 11 अगस्त 2026 को पटना एयरपोर्ट पर बिहार सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि सरकार के पास कर्मचारियों के वेतन और पेंशन तक देने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं हैं। नेता प्रतिपक्ष ने बिहार के वित्तीय प्रबंधन, सरकारी भुगतान और भ्रष्टाचार को लेकर सरकार पर सवाल खड़े किए।

तेजस्वी यादव पटना से दिल्ली रवाना होने से पहले पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों से वेतन नहीं मिलने का मुद्दा उन्होंने सार्वजनिक रूप से उठाया था, जिसके बाद उन्हें वेतन मिलना शुरू हुआ।

वेतन-पेंशन को लेकर तेजस्वी यादव का बड़ा दावा

तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि बिहार में कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा है। उनके मुताबिक, कई विभागों में भुगतान की स्थिति ठीक नहीं है और सरकार के सामने वित्तीय दबाव बढ़ गया है।

उन्होंने दावा किया कि मंत्रियों और विधायकों के वेतन को लेकर भी परेशानी की स्थिति बनी हुई है। हालांकि, ये सभी दावे तेजस्वी यादव ने विपक्षी नेता के तौर पर किए हैं और सरकार की ओर से इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस जानकारी में उपलब्ध नहीं है।

तेजस्वी ने कहा कि अगर सरकार उनका वेतन बंद करना चाहती है तो उन्हें इससे कोई परेशानी नहीं होगी। उनके मुताबिक, असली सवाल यह है कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों बनी कि सरकार को वेतन और पेंशन जैसे मुद्दों पर सार्वजनिक तौर पर चर्चा करनी पड़ रही है।

‘बिहार का खजाना खाली हो चुका है’

तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार की वित्तीय स्थिति पर तीखा हमला करते हुए कहा कि राज्य का खजाना खाली हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास कर्मचारियों को समय पर भुगतान करने में भी मुश्किल आ रही है।

उन्होंने मदरसा शिक्षकों के वेतन का मुद्दा भी उठाया। साथ ही दावा किया कि कई ठेकेदारों का भुगतान लंबित है। तेजस्वी के अनुसार, सरकारी विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों को भी समय पर भुगतान नहीं मिल रहा है।

तेजस्वी यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि लगातार ऐसी स्थिति सामने आना राज्य की वित्तीय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने सरकार से इस मामले में जवाब देने की मांग की।

भ्रष्टाचार को लेकर भी सरकार पर हमला

वेतन और भुगतान के मुद्दे के साथ तेजस्वी यादव ने बिहार में भ्रष्टाचार को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में भ्रष्टाचार लगातार बढ़ रहा है और आम लोगों को सरकारी काम कराने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ता है।

तेजस्वी ने दावा किया कि कई जगहों पर बिना पैसे के काम नहीं होता। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती।

विपक्ष के नेता ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई नहीं हो रही और कर्मचारियों को समय पर भुगतान नहीं मिल रहा, तो फिर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

‘बिहार में सरकार है भी या नहीं?’

पटना एयरपोर्ट पर बातचीत के दौरान तेजस्वी यादव ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसी परिस्थितियों को देखकर ऐसा लगता है कि बिहार में सरकार है भी या नहीं।

उनका यह बयान राज्य की वित्तीय स्थिति और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है। खासकर वेतन, पेंशन और सरकारी भुगतान जैसे मुद्दे सीधे कर्मचारियों और विभिन्न सरकारी विभागों से जुड़े हैं।

हालांकि, तेजस्वी यादव के आरोपों पर सरकार का विस्तृत पक्ष इस खबर के लिए उपलब्ध जानकारी में सामने नहीं आया है। इसलिए वित्तीय संकट और भुगतान में देरी से जुड़े दावों को राजनीतिक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

अशोक चौधरी के बयान पर भी पलटवार

तेजस्वी यादव ने वित्तीय संकट को लेकर मंत्री अशोक चौधरी के कथित बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। अशोक चौधरी ने कहा था कि वित्तीय संकट 15 दिन से लेकर एक महीने के भीतर ठीक हो जाएगा।

इस पर तेजस्वी यादव ने पलटवार करते हुए दावा किया कि मौजूदा वित्तीय संकट इतनी जल्दी खत्म नहीं होने वाला है। उन्होंने यहां तक कहा कि यह समस्या अगले चार साल में भी ठीक नहीं होगी।

तेजस्वी का यह बयान सरकार और विपक्ष के बीच वित्तीय स्थिति को लेकर जारी राजनीतिक मतभेद को दिखाता है। एक तरफ सरकार की ओर से स्थिति में सुधार की बात कही जा रही है, वहीं विपक्ष इसे गंभीर आर्थिक संकट के तौर पर पेश कर रहा है।

अब सरकार के जवाब पर नजर

तेजस्वी यादव के आरोपों के बाद अब सबकी नजर बिहार सरकार के आधिकारिक जवाब पर रहेगी। खास तौर पर कर्मचारियों के वेतन, पेंशन, मदरसा शिक्षकों के भुगतान और ठेकेदारों के बकाये से जुड़े दावों पर सरकार की स्थिति स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा।

वित्तीय प्रबंधन जैसे मुद्दों पर वास्तविक तस्वीर जानने के लिए सरकारी आंकड़े, बजट दस्तावेज और विभागवार भुगतान की स्थिति अहम होगी। फिलहाल तेजस्वी यादव के बयान ने बिहार की वित्तीय स्थिति को लेकर राजनीतिक चर्चा जरूर तेज कर दी है।

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