श्रावणी मेला शाहपुर में उमड़ा आस्था का सैलाब, शिवालय में गूंजा हर-हर महादेव
📌 पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ताज़ा ख़बरें सीधे अपने मोबाइल पर पाएं!
👉 WhatsApp से जुड़ेंबिहार के भोजपुर जिले में Shravani Mela Shahpur को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिल रहा है। सावन की अंतिम सोमवारी पर शाहपुर नगर पंचायत के वार्ड-10 स्थित प्राचीन शिवाला में सुबह से ही भक्तों की भीड़ जुटी है। Shravani Mela Shahpur के दौरान श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना कर रहे हैं और पूरे परिसर में हर-हर महादेव के जयकारे गूंज रहे हैं।
सावन का महीना हिंदू धर्म में भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। अंतिम सोमवारी को लेकर शाहपुर के इस शिवालय में स्थानीय लोगों के साथ आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
अंतिम सोमवारी पर शिवालय में उमड़ी भीड़
शाहपुर नगर के पूर्वी हिस्से में स्थित यह शिवाला लंबे समय से स्थानीय लोगों की धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। सावन की अंतिम सोमवारी के अवसर पर यहां विशेष मेले का आयोजन किया गया है।
सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों का पहुंचना शुरू हो गया। श्रद्धालु शिवलिंग पर गंगाजल, दूध और बेलपत्र चढ़ाकर भगवान शिव की पूजा कर रहे हैं। कई भक्तों ने धतूरा और अन्य पारंपरिक पूजन सामग्री भी अर्पित की।
एनएच-84 के नजदीक स्थित होने के कारण शिवाला तक पहुंचना आसपास के लोगों के लिए आसान है। इसी वजह से शाहपुर के अलावा आसपास के कई गांवों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचे।
मेले के दौरान मंदिर परिसर और आसपास के इलाके में धार्मिक माहौल बना हुआ है। स्थानीय लोगों के लिए यह आयोजन पूजा के साथ-साथ सामाजिक मेल-जोल का अवसर भी बन गया है।
मेले में सजीं दुकानें, बच्चों और परिवारों में उत्साह
शिवालय के आसपास अंतिम सोमवारी को लेकर विभिन्न प्रकार की दुकानें सजाई गई हैं। पूजा सामग्री, प्रसाद और दैनिक उपयोग की वस्तुओं के साथ बच्चों के मनोरंजन से जुड़ी दुकानों पर भी लोगों की भीड़ दिखाई दे रही है।
मेले में आने वाले परिवार पूजा-अर्चना के बाद खरीदारी और घूमने का आनंद ले रहे हैं। स्थानीय स्तर पर आयोजित यह मेला धार्मिक गतिविधियों के साथ क्षेत्र की पारंपरिक संस्कृति की झलक भी प्रस्तुत करता है।
आयोजन को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और समिति से जुड़े लोगों की ओर से व्यवस्थाएं की गई हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंदिर और मेला क्षेत्र में गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
शाहपुर का यह आयोजन आसपास के दूसरे प्रमुख शिव मंदिरों की यात्रा से भी जुड़ा हुआ है। एनएच-84 के रास्ते से आने-जाने वाले कई श्रद्धालु यहां पूजा करने के बाद कुंडवा शिव मंदिर और ब्रह्मपुर स्थित बाबा ब्रह्मेश्वरनाथ मंदिर की ओर भी जाते हैं।
सावन की अंतिम सोमवारी क्यों मानी जाती है खास?
धार्मिक मान्यताओं में सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस दौरान सोमवार के दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाने और पूजा करने की परंपरा है। सावन की अंतिम सोमवारी को लेकर भक्तों में विशेष उत्साह रहता है।
कई श्रद्धालु इस दिन उपवास रखते हैं और भगवान शिव तथा माता पार्वती की आराधना करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा के साथ की गई पूजा से मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
हालांकि, पूजा से जुड़े अलग-अलग उपाय धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित परिणाम के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
धन और विवाह के लिए क्या हैं धार्मिक मान्यताएं?
सावन की अंतिम सोमवारी पर भगवान शिव को गन्ने का रस अर्पित करने की परंपरा कुछ स्थानों पर प्रचलित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसके बाद शिवलिंग पर जल चढ़ाकर ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करने से आर्थिक समृद्धि की कामना की जाती है।
इसी तरह विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने की कामना से शिवलिंग पर दूध चढ़ाने की परंपरा भी कई भक्त निभाते हैं। अविवाहित महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा करती हैं।
शाहपुर के शिवाला में भी अंतिम सोमवारी पर भक्त अपनी-अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना कर रहे हैं। सुबह से जारी धार्मिक गतिविधियों के बीच मेला क्षेत्र में आस्था और उत्सव का माहौल बना हुआ है।
सावन की अंतिम सोमवारी के साथ इस वर्ष के सावन मास की विशेष पूजा-अर्चना का दौर भी समाप्ति की ओर है। शाहपुर का यह आयोजन स्थानीय धार्मिक परंपरा और सामुदायिक सहभागिता की तस्वीर पेश कर रहा है।
#ShravaniMelaShahpur #ShahpurNews #BhojpurNews #SawanSomwar #HarHarMahadev
