शिक्षा विभाग ने यह कदम विभिन्न योजनाओं की समीक्षा के दौरान सामने आई स्थिति के बाद उठाया है। विभाग के मुताबिक कुछ प्रखंडों में अतिरिक्त प्रभार मिलने के बाद काम की गति बेहतर हुई है, लेकिन कई जगहों पर प्रगति संतोषजनक नहीं पाई गई।
ऐसे में विभाग ने जरूरत के अनुसार किसी दूसरे प्रखंड स्तरीय पर्यवेक्षकीय पदाधिकारी को बीईओ का अतिरिक्त प्रभार देने की संभावना पर भी विचार करने को कहा है।
रिक्त BEO पदों पर अतिरिक्त प्रभार की होगी समीक्षा
जिले के जिन प्रखंडों में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के पद रिक्त हैं, वहां नियमित या वैकल्पिक व्यवस्था होने तक पर्यवेक्षकीय स्तर के पदाधिकारियों को बीईओ का अतिरिक्त प्रभार देने की व्यवस्था पहले से लागू है।
इस अतिरिक्त प्रभार में वित्तीय अधिकार भी शामिल किए गए हैं। इसका उद्देश्य बीईओ के पद खाली रहने के बावजूद प्रखंड स्तर पर शिक्षा विभाग से जुड़े प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों को सुचारू बनाए रखना है।
शिक्षा विभाग की समीक्षा में सामने आया कि इस व्यवस्था से कई प्रखंडों में कार्य निष्पादन की गति बढ़ी है। हालांकि, सभी प्रखंडों का प्रदर्शन एक जैसा नहीं रहा।
कुछ प्रखंडों में योजनाओं और विभागीय कार्यों की प्रगति अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंची। इसी कारण विभाग ने मौजूदा व्यवस्था की दोबारा समीक्षा करने का निर्णय लिया है।
DM और DEO मिलकर लेंगे जरूरी फैसला
शिक्षा विभाग ने समस्तीपुर के जिलाधिकारी को निर्देश दिया है कि वे जिला शिक्षा पदाधिकारी यानी DEO के साथ मिलकर जिले में बीईओ के रिक्त पदों पर दिए गए अतिरिक्त प्रभार की समीक्षा करें।
समीक्षा के दौरान यह देखा जाएगा कि किस प्रखंड में अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे पदाधिकारी का काम संतोषजनक है और कहां व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है।
अगर किसी प्रखंड में मौजूदा व्यवस्था से अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे हैं, तो वहां किसी अन्य प्रखंड स्तरीय पर्यवेक्षकीय पदाधिकारी को अतिरिक्त जिम्मेदारी देने पर विचार किया जा सकता है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल पद भरना नहीं, बल्कि प्रखंड स्तर पर शिक्षा विभाग के कामकाज को प्रभावी और तेज बनाना है। इसलिए जिलाधिकारी और DEO को स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई करने की जिम्मेदारी दी गई है।
DPO को BEO का प्रभार देने में आ रही थी परेशानी
शिक्षा विभाग ने जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में तैनात DPO को बीईओ का अतिरिक्त प्रभार देने के मामले पर भी स्थिति स्पष्ट की है।
विभाग के अनुसार, जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में कार्यरत DPO को बीईओ का अतिरिक्त प्रभार देने से जिला स्तर के कार्यालयीन कार्यों के निष्पादन में कठिनाई महसूस हो रही है।
DPO पर पहले से जिला स्तर की विभिन्न जिम्मेदारियां रहती हैं। ऐसे में किसी प्रखंड का अतिरिक्त प्रशासनिक और वित्तीय काम मिलने से उनके मूल दायित्व प्रभावित हो सकते हैं।
इसी कारण विभाग ने निर्देश दिया है कि जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में कार्यरत DPO को बीईओ के अतिरिक्त कार्यभार से मुक्त रखा जाए।
यह बदलाव जिला शिक्षा कार्यालय के नियमित कामकाज को सुचारू बनाए रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब PO को दिया जा सकेगा BEO का अतिरिक्त प्रभार
शिक्षा विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में कार्यरत PO को भी बीईओ का अतिरिक्त प्रभार देने की बात कही है।
इससे रिक्त बीईओ पदों की जिम्मेदारी संभालने के लिए अधिकारियों का विकल्प बढ़ेगा। विभाग का उद्देश्य यह है कि किसी एक अधिकारी पर अतिरिक्त काम का बोझ इतना न बढ़े कि उसके मूल दायित्व प्रभावित होने लगें।
वहीं, प्रखंड स्तर पर भी यह सुनिश्चित करना होगा कि बीईओ के पद रिक्त होने के बावजूद शिक्षा विभाग से जुड़े जरूरी कार्य समय पर पूरे हों।
प्रखंडों में शिक्षा योजनाओं की प्रगति पर रहेगी नजर
बीईओ का पद प्रखंड स्तर पर शिक्षा विभाग के प्रशासनिक कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। स्कूलों की निगरानी, विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन और विभिन्न प्रशासनिक कार्यों में बीईओ स्तर की जिम्मेदारी अहम रहती है।
ऐसे में पद रिक्त होने पर अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था लंबे समय तक प्रभावी बनी रहे, इसके लिए नियमित समीक्षा जरूरी है।
समस्तीपुर में अब जिलाधिकारी और DEO की समीक्षा के बाद यह तय किया जाएगा कि किन प्रखंडों में वर्तमान अतिरिक्त प्रभार व्यवस्था जारी रहेगी और कहां बदलाव की आवश्यकता है।
शिक्षा विभाग के इस निर्देश से उम्मीद है कि रिक्त पदों के कारण प्रभावित हो रहे प्रशासनिक कार्यों को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा। साथ ही, जिला शिक्षा कार्यालय के अधिकारियों पर अतिरिक्त कार्यभार को भी संतुलित करने में मदद मिलेगी।
क्या है विभाग के निर्देश का सार?
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जिले के सभी रिक्त BEO पदों पर दिए गए अतिरिक्त प्रभार की समीक्षा होगी।
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DM, DEO के साथ मिलकर आवश्यक कार्रवाई करेंगे।
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संतोषजनक काम नहीं होने पर दूसरे पर्यवेक्षकीय पदाधिकारी को प्रभार दिया जा सकता है।
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DPO को BEO के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त रखने का निर्देश है।
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DEO कार्यालय में कार्यरत PO को BEO का अतिरिक्त प्रभार दिया जा सकता है।
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प्रखंडों में शिक्षा योजनाओं और विभागीय कार्यों की प्रगति पर विशेष नजर रखी जाएगी।
कुल मिलाकर, शिक्षा विभाग का यह निर्देश समस्तीपुर में BEO के रिक्त पदों और अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है। अब जिलाधिकारी और DEO की समीक्षा के बाद आगे की तस्वीर साफ होगी।
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