रेल यात्रियों के लिए बड़ा अपडेट, 660 रूट किमी में लगेगा कवच 4.0
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👉 WhatsApp से जुड़ेंभारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। रेलवे ने उत्तर पूर्वी रेलवे के इज्जतनगर मंडल में 660 रूट किलोमीटर के रेलखंड पर कवच 4.0 लगाने की मंजूरी दे दी है। इस परियोजना पर करीब 295 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
रेल मंत्रालय के अनुसार, यह काम भारतीय रेलवे के बाकी हिस्सों में कवच और लॉन्ग-टर्म इवोल्यूशन यानी LTE आधारित कम्युनिकेशन बैकबोन उपलब्ध कराने वाली व्यापक परियोजना के तहत किया जाएगा। इससे चिन्हित रेलखंडों पर ट्रेन संचालन की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।
660 रूट किलोमीटर पर लागू होगा कवच 4.0
रेलवे की मंजूरी के बाद इज्जतनगर मंडल के उन रेलखंडों पर कवच 4.0 लगाने का रास्ता साफ हो गया है, जहां अभी यह सुरक्षा प्रणाली उपलब्ध नहीं है। इस काम के लिए करीब 295 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत निर्धारित की गई है।
कवच 4.0 आधुनिक तकनीक पर आधारित स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली का उन्नत संस्करण है। इसका उद्देश्य ट्रेन संचालन के दौरान संभावित मानवीय चूक और टक्कर जैसी गंभीर घटनाओं के जोखिम को कम करना है।
रेलवे लगातार अपने नेटवर्क पर इस तकनीक का विस्तार कर रहा है। खासतौर पर व्यस्त और महत्वपूर्ण रेल मार्गों पर कवच की मौजूदगी से ट्रेन संचालन को अधिक सुरक्षित बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
क्या है कवच और कैसे करता है काम?
कवच भारत में विकसित ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है। यह ट्रेन की गति, सिग्नल और निर्धारित परिचालन परिस्थितियों पर लगातार नजर रखता है।
यदि ट्रेन किसी ऐसे सिग्नल को पार करने की स्थिति में पहुंचती है जिसे पार करने की अनुमति नहीं है, तो सिस्टम आवश्यक स्थिति में अपने आप ब्रेक लगाने की क्षमता रखता है। इसका प्रमुख उद्देश्य Signal Passed at Danger (SPAD) जैसी घटनाओं और ट्रेनों के बीच टक्कर के खतरे को कम करना है।
यह तकनीक ट्रेन को निर्धारित अधिकतम सुरक्षित गति के भीतर चलाने में भी सहायता करती है। इससे लोको पायलट को परिचालन के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा सहायता मिलती है।
घने कोहरे में भी सुरक्षित ट्रेन संचालन में मदद
कवच प्रणाली की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियों में भी सुरक्षित ट्रेन संचालन में सहायता करती है। घना कोहरा होने पर रेल पटरियों और सिग्नल को स्पष्ट रूप से देखना लोको पायलट के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
ऐसे समय में स्वचालित सुरक्षा प्रणाली ट्रेन की निगरानी और आवश्यक सुरक्षा कार्रवाई में मदद करती है। इससे परिचालन की विश्वसनीयता बढ़ाने और दुर्घटना के जोखिम को कम करने में सहायता मिल सकती है।
रेल मंत्रालय का कहना है कि इज्जतनगर मंडल के 660 रूट किलोमीटर पर कवच 4.0 की मंजूरी रेलवे के सुरक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
आने वाले समय में रेलवे के अन्य शेष रेलखंडों पर भी इस स्वदेशी सुरक्षा प्रणाली का विस्तार किया जाना है। इसका व्यापक उद्देश्य देश के रेल नेटवर्क में आधुनिक तकनीक के जरिए ट्रेन संचालन को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना है।
