राहुल गांधी का RSS पर बड़ा हमला, बोले- ‘हर भारतीय अपना सत्य खुद जाने’
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👉 WhatsApp से जुड़ेंनई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की विचारधारा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भारत की मौजूदा वैचारिक लड़ाई का मूल सवाल यह है कि क्या कोई छोटा समूह देश के लोगों के लिए सत्य की परिभाषा तय कर सकता है।
‘हरा भरा स्वराज: राजीव गांधी के विजन को श्रद्धांजलि’ कार्यक्रम में राहुल गांधी ने महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति का सत्य और जीवन का रास्ता अलग हो सकता है। उनके मुताबिक किसी दूसरे व्यक्ति के अनुभव और जीवन को पूरी तरह समझे बिना उसके सत्य को परिभाषित नहीं किया जा सकता।
राहुल गांधी ने RSS पर क्या आरोप लगाया?
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में RSS पर आरोप लगाया कि संगठन ने यह मान लिया है कि वह देश के करीब 1.5 अरब लोगों के लिए सत्य को जानता और परिभाषित करता है। उन्होंने कहा कि उनके विरोध का मुख्य कारण यही विचार है।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण, राजनीति या स्वतंत्र मीडिया से जुड़े मुद्दे बड़ी वैचारिक लड़ाई के अलग-अलग रूप हैं। उनके अनुसार असली सवाल व्यक्ति की स्वतंत्र सोच और अपने जीवन का रास्ता चुनने के अधिकार का है।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि कोई व्यक्ति दूसरे के अनुभवों को पूरी तरह अपना नहीं सकता। हर इंसान का परिवार, दोस्त, परिस्थितियां और जीवन अलग होते हैं। इसलिए किसी व्यक्ति के लिए दूसरे व्यक्ति के सत्य को तय करना संभव नहीं है।
महात्मा गांधी के ‘सत्य के प्रयोग’ का दिया उदाहरण
राहुल गांधी ने महात्मा गांधी की आत्मकथा ‘सत्य के प्रयोग’ का उल्लेख करते हुए अपने तर्क को समझाया। उन्होंने कहा कि गांधी ने अपनी किताब का नाम ‘सत्य’ नहीं रखा, बल्कि ‘मेरे सत्य के साथ प्रयोग’ के भाव को सामने रखा।
राहुल के अनुसार इसका अर्थ यह है कि सत्य की खोज एक व्यक्तिगत प्रक्रिया है। हर व्यक्ति अपने अनुभवों के माध्यम से उसे समझता है और उसका रास्ता अलग हो सकता है।
उन्होंने इसी संदर्भ में गांधी के ‘स्वराज’ के विचार को भी सामने रखा। राहुल गांधी ने कहा कि स्वराज को केवल पश्चिमी अर्थ में ‘स्वतंत्रता’ समझना सही नहीं है। उनके मुताबिक स्वराज का अर्थ स्वयं पर शासन करना या आत्मशासन है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को बाहरी तौर पर स्वतंत्र होना और खुद पर नियंत्रण रखना दो अलग बातें हैं। गांधी के विचार में स्वराज व्यक्ति की अपनी जिम्मेदारी और आत्मनियंत्रण से जुड़ा है।
BJP-RSS पर सामाजिक समावेशन को लेकर निशाना
राहुल गांधी ने BJP और RSS पर समाज के विभिन्न वर्गों के बीच अलगाव पैदा करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि देश के हर नागरिक को यह महसूस होना चाहिए कि वह भारत का हिस्सा है और उसे यहां सम्मान तथा सुरक्षा के साथ रहने का अधिकार है।
उन्होंने मुस्लिम, ईसाई और सिख समुदायों के साथ-साथ आदिवासी और दलित समाज का जिक्र किया। राहुल गांधी ने कहा कि किसी भी धर्म, समुदाय या लिंग के व्यक्ति को यह महसूस नहीं होना चाहिए कि उसे देश में अपनी आवाज उठाने के कारण दबाव या भेदभाव का सामना करना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि भारत की विविधता को स्वीकार करना जरूरी है और हर नागरिक की अपने सत्य की खोज को महत्व मिलना चाहिए। उनके मुताबिक राष्ट्र की मजबूती तभी संभव है जब प्रत्येक व्यक्ति खुद को देश से जुड़ा हुआ महसूस करे।
पश्चिमी ‘Freedom’ और भारतीय ‘Swaraj’ में फर्क
राहुल गांधी ने अपने भाषण में पश्चिमी अवधारणा की स्वतंत्रता और भारतीय स्वराज के बीच अंतर समझाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि पश्चिमी संदर्भ में Freedom का अर्थ अक्सर बाहरी बंधनों से मुक्ति के तौर पर देखा जाता है, जबकि स्वराज व्यक्ति के भीतर के आत्मशासन से जुड़ा विचार है।
उन्होंने महात्मा गांधी के जेल में रहने के उदाहरण का उल्लेख करते हुए कहा कि कोई व्यक्ति बाहरी रूप से स्वतंत्र न होते हुए भी अपने विचार और आचरण पर नियंत्रण रख सकता है। यही स्वराज की अवधारणा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
राहुल गांधी ने कहा कि स्वराज किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा किसी को दिया नहीं जा सकता। यह प्रत्येक व्यक्ति की व्यक्तिगत यात्रा और जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के स्वराज की कल्पना में देश के प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन और विचारों पर स्वयं शासन करने की क्षमता विकसित करनी थी। इसी विचार को उन्होंने आज की भारतीय राजनीति और वैचारिक बहस से जोड़ते हुए अपनी बात रखी।
राहुल गांधी का यह बयान ऐसे समय आया है जब BJP, RSS और कांग्रेस के बीच वैचारिक मुद्दों को लेकर राजनीतिक बहस लगातार जारी है। कार्यक्रम में उन्होंने पर्यावरण, सामाजिक समावेशन, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और स्वराज जैसे विषयों को एक व्यापक राजनीतिक विचारधारा के संदर्भ में पेश किया।
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