जंतर-मंतर लाठीचार्ज पर राहुल गांधी का बड़ा हमला, PM पर बरसे

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जंतर-मंतर लाठीचार्ज को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। जंतर-मंतर लाठीचार्ज के मुद्दे पर राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से छात्रों के साथ हुई कार्रवाई पर जवाब मांगा। गुरुवार, 13 अगस्त को नई दिल्ली के मावलंकर हॉल में आयोजित कांग्रेस के एक सम्मेलन में उन्होंने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया।

राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष छात्रों के मुद्दे को संसद में लगातार उठाता रहेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि जब तक इस मामले में जवाब नहीं मिलता, तब तक विपक्ष अपना दबाव बनाए रखेगा।

उनके बयान के बाद छात्र आंदोलन और जंतर-मंतर पर हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।

जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन का पूरा मामला

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, NEET पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में कथित खामियों के खिलाफ छात्रों ने 20 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन शुरू किया था। आंदोलन के दौरान छात्रों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर सरकार से जवाब मांगा।

20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू हुआ। इसी दौरान छात्रों ने संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी। प्रदर्शनकारियों के आगे बढ़ने और बैरिकेड पार करने की कोशिश के बाद पुलिस कार्रवाई हुई।

प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की बात सामने आई। विपक्ष ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए छात्रों के साथ कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया। सरकार और सुरक्षा एजेंसियों का पक्ष इस मामले में राजनीतिक बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।

राहुल गांधी ने पीएम मोदी और अमित शाह पर साधा निशाना

मावलंकर हॉल में राहुल गांधी ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष छात्रों और आम लोगों की आवाज को संसद में उठाता रहेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि विपक्ष उन्हें लगातार जवाब देने के लिए मजबूर करेगा।

राहुल गांधी ने सरकार पर आज के भारत की वास्तविक समस्याओं और युवाओं की आवाज को नहीं समझने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देश की जनता को अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए और लोकतंत्र में असहमति की आवाज को सुना जाना जरूरी है।

उन्होंने संसद के हालिया घटनाक्रम का भी जिक्र किया और कहा कि विपक्ष के दबाव का असर सरकार पर दिखाई दे रहा है। उनके बयान के बाद कांग्रेस और विपक्षी दलों की ओर से छात्र आंदोलन के मुद्दे को आगे भी उठाए जाने के संकेत मिले हैं।

शिक्षा व्यवस्था और छात्र आंदोलन बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा

NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवादों ने पिछले कुछ समय में शिक्षा व्यवस्था को राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बनाया है। पेपर लीक, परीक्षा की पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य से जुड़े सवालों पर विपक्ष लगातार सरकार से जवाब मांगता रहा है।

छात्रों का आंदोलन भी इसी व्यापक बहस का हिस्सा रहा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सरकार के साथ बातचीत के बाद आंदोलन वापस लिया गया था। इसके बावजूद जंतर-मंतर पर हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा अब संसद में दोबारा उठाया जा रहा है।

विपक्ष का कहना है कि छात्रों के प्रदर्शन से जुड़े सवालों का स्पष्ट जवाब सरकार को देना चाहिए। दूसरी ओर, इस पूरे मामले में पुलिस कार्रवाई की परिस्थितियों और जिम्मेदारी को लेकर जांच तथा आधिकारिक पक्ष महत्वपूर्ण रहेगा।

विदेश नीति पर भी राहुल गांधी ने उठाए सवाल

कांग्रेस नेता ने अपने संबोधन में केवल छात्र आंदोलन तक बात सीमित नहीं रखी। उन्होंने मोदी सरकार की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए।

राहुल गांधी ने कहा कि विदेश नीति का मतलब केवल दूसरे देशों के नेताओं के साथ व्यक्तिगत संबंध या मुलाकात नहीं है। उनके अनुसार, भारत की विदेश नीति का प्राथमिक उद्देश्य राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना होना चाहिए।

उन्होंने ईरान में चल रहे संघर्ष का उल्लेख करते हुए दावा किया कि भारत को क्षेत्रीय परिस्थितियों का फायदा उठाकर मध्यस्थता की भूमिका निभाने की कोशिश करनी चाहिए थी। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस अवसर का लाभ पाकिस्तान ने उठाया।

चीन को लेकर सरकार के दावों पर भी हमला

राहुल गांधी ने चीन और सीमा से जुड़े मुद्दे पर भी केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने दावा किया कि अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना की पेट्रोलिंग को लेकर स्थिति चिंताजनक है।

उन्होंने केंद्र सरकार पर वास्तविक स्थिति को लेकर जनता को पूरी जानकारी नहीं देने का आरोप लगाया। राहुल गांधी ने कहा कि सीमा विवाद और चीन से जुड़े मामलों में सरकार को स्पष्टता के साथ देश के सामने तथ्य रखने चाहिए।

हालांकि, चीन से जुड़े राहुल गांधी के आरोपों और दावों पर सरकार का आधिकारिक पक्ष अलग हो सकता है। इसलिए इन राजनीतिक दावों को संबंधित पक्षों के बयान और आधिकारिक तथ्यों के संदर्भ में देखना जरूरी है।

अब संसद में क्या होगा?

जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा मानसून सत्र में विपक्ष के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक विषय बन गया है। राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेता गृह मंत्री से इस मामले पर जवाब की मांग कर रहे हैं।

आने वाले दिनों में संसद में इस मुद्दे पर और हंगामा होने की संभावना बनी हुई है। साथ ही, छात्र आंदोलन, परीक्षा व्यवस्था और युवाओं से जुड़े सवाल सरकार के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील विषय बने रह सकते हैं।

फिलहाल राहुल गांधी के ताजा बयान ने जंतर-मंतर लाठीचार्ज विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि केंद्र सरकार इस मामले में क्या जवाब देती है और संसद में विपक्ष की मांग पर आगे क्या कार्रवाई होती है।

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