पुरानी ज़मीन का केवाला ऑनलाइन कैसे निकालें? 2026 गाइड

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भाइयों, हम सब जानते हैं कि बिहार में ज़मीन को लेकर कितनी परेशानियां होती हैं। ज़मीन हमारे लिए सिर्फ मिट्टी नहीं, बल्कि हमारी इज्ज़त और पुरखों की निशानी होती है। अक्सर ऐसा होता है कि हमारे दादा या परदादा ने सालों पहले कोई खेत या प्लॉट खरीदा था, लेकिन अब उसका ऑरिजिनल कागज़ यानी केवाला (Sale Deed) घर में कहीं मिल नहीं रहा है।

अब ऐसे में कोई पाटीदार या पड़ोसी ज़मीन पर कब्ज़ा करने की कोशिश करता है, तो हमारे पास साबित करने के लिए कोई कागज़ नहीं होता। पहले के समय में अगर केवाला खो जाए, तो रजिस्ट्री ऑफिस (Registry Office) में मुंशी और दलालों के चक्कर काटने पड़ते थे। पुरानी फाइलों में नाम खोजने के नाम पर हज़ारों रुपये की डिमांड होती थी और महीनों लग जाते थे।

लेकिन भाइयों, अब हालात बदल रहे हैं। बिहार सरकार के निबंधन विभाग (Registration Department) ने पुराने से पुराने केवाला का रिकॉर्ड ऑनलाइन कर दिया है। अब आप अपने स्मार्टफोन या लैपटॉप से घर बैठे अपनी ज़मीन का पुराना केवाला (Deed) खोज सकते हैं और उसकी कॉपी डाउनलोड कर सकते हैं।

आज के इस आर्टिकल में, मैं आपको एक दम ज़मीनी और सच्चा तरीका बताऊंगा कि पुरानी ज़मीन का केवाला ऑनलाइन कैसे निकालें। बिना किसी दलाल को एक रुपया दिए, अपना काम खुद कैसे करें, आइए विस्तार से समझते हैं।

केवाला (Deed) क्या होता है और यह क्यों सबसे ज्यादा ज़रूरी है?

केवाला असल में वह कानूनी दस्तावेज़ (Legal Document) है जो यह साबित करता है कि आपने ज़मीन खरीदी है और अब आप उसके मालिक हैं। जब भी ज़मीन की रजिस्ट्री होती है, तो निबंधन कार्यालय द्वारा यह दस्तावेज़ तैयार किया जाता है।

केवाला की ज़रूरत हमें कब और क्यों पड़ती है?

  • मालिकाना हक़ साबित करने के लिए: अगर ज़मीन को लेकर कोई विवाद हो जाए, तो कोर्ट या अंचल अधिकारी (CO) सबसे पहले ऑरिजिनल केवाला मांगते हैं।

  • दाखिल-खारिज (Mutation) के लिए: अगर आपने ज़मीन खरीदी है और उसका दाखिल-खारिज करवाना है, तो बिना केवाला की कॉपी के यह काम नहीं हो सकता।

  • ज़मीन बेचने के लिए: अगर आप अपनी ज़मीन का कोई हिस्सा बेचना चाहते हैं, तो खरीदार सबसे पहले आपका केवाला देखेगा।

  • बंटवारा (Partition) के समय: घर में जब भाइयों के बीच ज़मीन का बंटवारा होता है, तो पुरानी डीड से ही पता चलता है कि असली रकबा (Area) कितना है और चौहद्दी (Boundary) क्या है।

  • बैंक से लोन लेने के लिए: प्रॉपर्टी पर लोन पास कराने के लिए बैंक केवाला की सर्टिफाइड कॉपी मांगता है।

ऑनलाइन केवाला निकालने से पहले किन चीज़ों की ज़रूरत पड़ेगी?

जब आप इंटरनेट पर अपनी ज़मीन का कागज़ खोजने बैठेंगे, तो पोर्टल आपसे कुछ जानकारी मांगेगा। इसलिए पोर्टल खोलने से पहले एक डायरी में ये चीज़ें नोट कर लें (इनमें से 2-3 जानकारी भी हो, तो काम चल जाएगा):

  1. पार्टी का नाम (Party Name): जिसने ज़मीन खरीदी (Buyer) या जिसने ज़मीन बेची (Seller) उसका पूरा नाम।

  2. रजिस्ट्री का साल (Registration Year): ज़मीन किस साल में खरीदी गई थी (जैसे- 1990, 2005, या 2012)।

  3. निबंधन कार्यालय (Registry Office): ज़मीन की रजिस्ट्री किस ऑफिस में हुई थी (आमतौर पर आपका ज़िला या अनुमंडल)।

  4. मौजा और थाना नंबर (Mauza & Thana No): ज़मीन किस गांव या इलाके में है।

  5. खाता और खेसरा नंबर (Khata & Khesra/Plot No): अगर यह पता है, तो केवाला खोजना सबसे आसान हो जाता है।

  6. डीड नंबर (Deed Number): अगर आपके पास पुराने केवाला की कोई फोटोकॉपी है जिस पर डीड नंबर (दस्तावेज़ संख्या) लिखा है, तब तो आप 1 मिनट में केवाला निकाल लेंगे।

एक नज़र में ज़रूरी जानकारी (Quick Info Table)

विवरण (Details)जानकारी (Information)
विभाग का नाममद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग, बिहार
वेबसाइट का नामBhumijankari (भूमि जानकारी) / IGRS Bihar
ऑफिसियल लिंकbhumijankari.bihar.gov.in
सुविधा का नामAdvance Search (एडवांस सर्च)
क्या यह सर्विस फ्री है?हाँ, वेब कॉपी देखने के लिए कोई फीस नहीं है
ज़रूरी डिटेल्सपार्टी का नाम, साल, रजिस्ट्री ऑफिस, डीड नंबर (कोई एक)

बिहार में ऑनलाइन केवाला निकालने का स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस

बिहार सरकार के भूमि जानकारी (Bhumijankari) पोर्टल पर पुराने केवाला को साल के हिसाब से तीन अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया है। मैं आपको तीनों का तरीका समझाता हूँ। बस ध्यान से पढ़ते जाइए और अपने मोबाइल में यही स्टेप्स फॉलो करते जाइए।

स्टेप 1: ऑफिसियल पोर्टल पर जाएं

सबसे पहले अपने मोबाइल या कंप्यूटर के ब्राउज़र (जैसे Google Chrome) में टाइप करें bhumijankari.bihar.gov.in और एंटर दबाएं। यह बिहार सरकार की निबंधन विभाग की ऑफिसियल साइट है।

स्टेप 2: 'Advance Search' का विकल्प चुनें

होमपेज खुलने के बाद, आपको दाईं तरफ (Right side) कई सारे नीले रंग के बॉक्स दिखेंगे। उनमें से आपको "Advance Search" वाले ऑप्शन पर क्लिक करना है।

स्टेप 3: रजिस्ट्री का समय (Registration Period) चुनें

अब आपके सामने एक नया पेज खुलेगा। यहीं पर सबसे ज्यादा लोग गलती करते हैं। यहाँ आपको तीन ऑप्शन मिलेंगे:

  1. Online Registration (2016 to Till Date): अगर आपकी ज़मीन की रजिस्ट्री साल 2016 से लेकर आज तक के बीच हुई है, तो इसे चुनें।

  2. Post Computerisation (2006 to 2015): अगर ज़मीन 2006 से लेकर 2015 के बीच खरीदी या बेची गई है, तो इस बॉक्स पर टिक करें।

  3. Pre Computerisation (Before 2005): अगर आपकी ज़मीन का केवाला बहुत पुराना है, यानी 2005 से भी पहले का (जैसे 1980, 1990 या 2000), तो आपको इस ऑप्शन पर टिक करना है।

(नोट: ज्यादातर भाइयों को पुराने केवाला की ही ज़रूरत होती है, तो मान लेते हैं कि आपने 'Before 2005' चुना है।)

स्टेप 4: ज़मीन और रजिस्ट्री की डिटेल्स भरें

अब नीचे एक फॉर्म खुल जाएगा। इस फॉर्म में आपको सारी चीज़ें नहीं भरनी हैं। सिर्फ वही जानकारी भरें जो आपको पता है:

  • Registration Office (रजिस्ट्री ऑफिस): ड्रॉपडाउन लिस्ट से वह ऑफिस चुनें जहाँ रजिस्ट्री हुई थी (जैसे- Patna, Muzaffarpur, Gaya, Darbhanga आदि)।

  • Property Location (प्रॉपर्टी की लोकेशन): ज़मीन का अंचल/सर्कल चुनें।

  • Circle / Mauza (सर्कल / मौजा): अपने गांव या इलाके का नाम चुनें।

  • Date (तारीख): अगर आपको साल पता है, तो From Date (जैसे 01/01/1990) से To Date (31/12/1990) तक भर दें।

  • Party Name (पार्टी का नाम): यह सबसे ज़रूरी है। जिस दादा या परदादा के नाम से ज़मीन खरीदी गई थी, उनका नाम अंग्रेजी में टाइप करें। (जैसे: Ramashray Singh)।

स्टेप 5: 'Search' बटन पर क्लिक करें

सारी डिटेल्स भरने के बाद नीचे दिए गए "Search" बटन पर क्लिक करें। अगर आपके द्वारा दी गई जानकारी सही है और पोर्टल पर वह नाम मौजूद है, तो पोर्टल थोड़ा समय लेगा और नीचे रिजल्ट दिखा देगा।

स्टेप 6: केवाला की डिटेल्स और 'Web Copy' देखें

सर्च पूरा होने के बाद, नीचे "Click here to view details" का ऑप्शन आएगा। उस पर क्लिक करते ही एक लिस्ट खुलेगी जिसमें उस नाम से हुई रजिस्ट्री की पूरी जानकारी होगी:

  • डीड नंबर (Deed No.)

  • रजिस्ट्री की तारीख

  • खरीदने वाले और बेचने वाले का नाम

  • ज़मीन का खाता, खेसरा और रकबा (Area)

इसी लाइन में एकदम दाहिनी तरफ आपको "Web Copy" या "PDF" का निशान मिलेगा। जैसे ही आप उस पर क्लिक करेंगे, आपकी ज़मीन का पुराना केवाला (Deed) PDF फॉर्मेट में आपके मोबाइल या कंप्यूटर में डाउनलोड हो जाएगा।

नाम से खोजने में परेशानी हो, तो क्या करें? (Pro Tips)

कई बार पोर्टल पर नाम डालने पर "No Record Found" बता देता है। इसका मतलब यह नहीं है कि आपकी ज़मीन का रिकॉर्ड नहीं है। दरअसल, पुराने ज़माने में मुंशी लोग नाम की स्पेलिंग में बहुत गलती करते थे।

  • स्पेलिंग बदलकर ट्राई करें: अगर नाम 'Sanjay' है, तो उसे 'Sanjai', 'Sunjay', या 'Sanjoy' लिखकर भी सर्च करें।

  • सिर्फ डीड नंबर से खोजें: अगर आपको केवाला नहीं मिल रहा है, लेकिन आपको डीड नंबर और साल पता है, तो पोर्टल पर नाम, खाता, खेसरा कुछ मत डालें। सिर्फ Registry Office, Year, और Deed Number डालकर सर्च करें। आपका केवाला 100% सामने आ जाएगा।

वेब कॉपी (Web Copy) और सर्टिफाइड कॉपी (Certified Copy) में क्या अंतर है?

ऑनलाइन जो केवाला आप डाउनलोड करते हैं, उसके ऊपर वॉटरमार्क में "Web Copy" लिखा होता है। भाइयों, यह जानना बहुत ज़रूरी है कि वेब कॉपी सिर्फ आपकी जानकारी के लिए होती है

अगर आपको कोर्ट में केस लड़ना है, दाखिल-खारिज करवाना है, या बैंक से लोन लेना है, तो यह ऑनलाइन वाला प्रिंटआउट मान्य नहीं होगा। इसके लिए आपको सर्टिफाइड कॉपी (Certified Copy) निकालनी होगी।

सर्टिफाइड कॉपी कैसे मिलेगी?

जब आप ऑनलाइन सर्च करके अपनी ज़मीन का 'डीड नंबर' (Deed No.) और 'साल' पता कर लेंगे, तो यह जानकारी लेकर अपने ज़िले के निबंधन कार्यालय (Registry Office) जाएं। वहां एक फॉर्म भरकर 'सर्टिफाइड कॉपी' के लिए अप्लाई करें। सरकारी फीस जमा करने के बाद (जो पेजों की संख्या पर निर्भर करती है), 3 से 7 दिनों के अंदर आपको मुहर लगी हुई ऑरिजिनल केवाला की सर्टिफाइड कॉपी मिल जाएगी। ऑनलाइन जानकारी होने के कारण, कोई भी दलाल आपको बेवकूफ नहीं बना पाएगा।

अगर ऑनलाइन पोर्टल पर आपका पुराना केवाला न मिले तो? (Ground Reality)

बिहार में आज भी बहुत सारे रिकॉर्ड, खासकर 1990 से पहले के, पूरी तरह से ऑनलाइन नहीं चढ़ पाए हैं। सर्वर डाउन होना या डाटा अधूरा होना एक आम बात है। अगर 10 बार अलग-अलग तरीके से सर्च करने के बाद भी आपका केवाला ऑनलाइन नहीं मिल रहा है, तो घबराएं नहीं।

ऐसे में आपको ऑफलाइन प्रक्रिया का सहारा लेना होगा:

  1. रजिस्ट्री ऑफिस जाएं और एक सर्च टिकट (Search Ticket) कटवाएं।

  2. वहां रिकॉर्ड रूम में बैठे मुंशी को साल और नाम बताएं।

  3. वे अपने पुराने भारी-भरकम रजिस्टरों (Index Register) में हाथ से आपका नाम खोजेंगे।

  4. मिल जाने पर आपको डीड नंबर दे देंगे, जिससे आप सर्टिफाइड कॉपी निकाल सकते हैं।

ज़मीन का केवाला ऑनलाइन निकालने से जुड़े 5 अहम सवाल (FAQs)

1. मैं किस साल तक का पुराना केवाला ऑनलाइन निकाल सकता हूँ?

बिहार सरकार के Bhumijankari पोर्टल पर 1995-1996 के बाद के लगभग सभी रिकॉर्ड डिजिटलाइज कर दिए गए हैं। हालाँकि, कई ज़िलों में 1980 के दशक के रिकॉर्ड भी ऑनलाइन उपलब्ध हैं। लेकिन अगर केवाला 1950 या 1960 का है, तो ज़्यादातर चांस है कि आपको वह ऑफलाइन रजिस्ट्री ऑफिस से ही खोजना पड़ेगा।

2. ऑनलाइन वेब कॉपी डाउनलोड करने की क्या फीस है?

ऑनलाइन वेब कॉपी (Web Copy) देखने और डाउनलोड करने के लिए सरकार कोई भी पैसा या फीस नहीं लेती है। यह पूरी तरह से मुफ्त (Free) सेवा है।

3. क्या डीड नंबर (Deed No) और टोकन नंबर (Token No) एक ही चीज़ है?

बिल्कुल नहीं। टोकन नंबर वह नंबर होता है जो रजिस्ट्री के समय अपॉइंटमेंट के लिए मिलता है। जबकि डीड नंबर (दस्तावेज़ संख्या) वह परमानेंट नंबर है जो रजिस्ट्री पूरी होने के बाद फाइनल कागज़ पर दर्ज़ होता है। केवाला खोजने के लिए हमेशा डीड नंबर की ज़रूरत पड़ती है।

4. अगर पोर्टल पर 'No Record Found' बार-बार आ रहा है तो मैं क्या करूँ?

सबसे पहले पार्टी के नाम की स्पेलिंग बदल कर देखें। अगर फिर भी न मिले, तो खाता या खेसरा नंबर डालकर सर्च करें। अगर फिर भी न मिले, तो इसका मतलब है कि आपका रिकॉर्ड अभी पोर्टल पर अपलोड नहीं हुआ है, आपको सीधा रजिस्ट्री ऑफिस जाकर सर्च करवाना होगा।

5. क्या ऑनलाइन निकाले गए केवाला (Web copy) से मैं अपनी ज़मीन बेच सकता हूँ?

नहीं। ज़मीन बेचने के लिए जब आप सब-रजिस्ट्रार के सामने जाते हैं, तो आपको ऑरिजिनल केवाला या निबंधन कार्यालय से निकाली गई मुहर लगी 'सर्टिफाइड कॉपी' (Certified copy) दिखानी पड़ती है। वेब कॉपी सिर्फ आपको डीड नंबर और आपकी ज़मीन की डिटेल्स जानने में मदद करती है।

आखिरी बात

भाइयों, अपनी ज़मीन के कागज़ात को सही सलामत रखना हमारी ही ज़िम्मेदारी है। बिहार सरकार के इस IGRS (Bhumijankari) पोर्टल ने आम आदमी को एक बहुत बड़ी ताकत दी है। अब आपको अपने ही कागज़ के बारे में जानकारी लेने के लिए किसी बाबू या मुंशी के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ेगा।

अगर आपके परिवार में किसी भी पुरानी ज़मीन का कागज़ खो गया है, तो आज ही थोड़ा समय निकालें। ऊपर बताए गए स्टेप्स को फॉलो करें, डीड नंबर खोजें और उसका वेब कॉपी डाउनलोड करके अपने मोबाइल में सेव कर लें। और अगर ज़रूरी हो, तो रजिस्ट्री ऑफिस जाकर उसकी सर्टिफाइड कॉपी भी निकलवा कर अपने घर की फाइल में सुरक्षित रख लें। जानकारी ही बचाव है, खुद जागरूक बनें और अपने हक़ की रक्षा करें।

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