बांकीपुर जीत के बाद प्रशांत किशोर का बड़ा प्लान, 38 जिलों में होगी जन सुराज की यात्रा
📌 पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ताज़ा ख़बरें सीधे अपने मोबाइल पर पाएं!
👉 WhatsApp से जुड़ें
बिहार की राजनीति में प्रशांत किशोर एक बार फिर बड़े अभियान की तैयारी में हैं। बांकीपुर उपचुनाव में जीत के बाद प्रशांत किशोर अब पूरे बिहार की सियासी जमीन नापने निकल सकते हैं। जन सुराज के सूत्रों के मुताबिक उनकी नई बिहार यात्रा 15 सितंबर से शुरू होने की संभावना है। इस यात्रा में राज्य के सभी 38 जिलों तक पहुंचने की योजना है। प्रशांत किशोर की प्रस्तावित यात्रा सिर्फ राजनीतिक सभाओं तक सीमित नहीं रहेगी। पार्टी का जोर गांवों, कस्बों और स्थानीय लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याएं समझने और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने पर रहेगा।
15 सितंबर से शुरू हो सकती है बिहार यात्रा
जन सुराज के अंदर प्रशांत किशोर की नई यात्रा को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। हालांकि अभी यात्रा का अंतिम कार्यक्रम तय नहीं हुआ है। पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी इसकी पूरी रूपरेखा पर अंतिम फैसला लेगी। प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत यात्रा को कई चरणों में बांटा जाएगा। एक चरण में करीब 3 से 4 जिलों को शामिल करने की तैयारी है। पश्चिमी चंपारण से यात्रा की शुरुआत होने की संभावना जताई जा रही है। सभी 38 जिलों का दौरा पूरा करने के बाद यात्रा का समापन पटना में किया जा सकता है। इससे पहले भी प्रशांत किशोर बिहार के अलग-अलग हिस्सों में लंबा समय बिताकर लोगों से सीधा संवाद कर चुके हैं।
बांकीपुर की जीत के बाद बढ़ा कार्यकर्ताओं का उत्साह
बांकीपुर उपचुनाव में जीत ने जन सुराज को नई राजनीतिक ऊर्जा दी है। पार्टी के मुताबिक भाजपा के मजबूत गढ़ माने जाने वाले बांकीपुर में प्रशांत किशोर ने भाजपा उम्मीदवार को 19,324 वोटों के अंतर से हराया। इस जीत के साथ वह जन सुराज के पहले विधायक बने। अब पार्टी इस सफलता को सिर्फ एक विधानसभा क्षेत्र तक सीमित रखने के बजाय पूरे बिहार में संगठन विस्तार के अवसर के रूप में देख रही है। बांकीपुर में फिलहाल आभार यात्रा भी चल रही है। इसके जरिए प्रशांत किशोर मतदाताओं का धन्यवाद करने के साथ क्षेत्र की स्थानीय समस्याओं और लोगों की अपेक्षाओं को समझने की कोशिश कर रहे हैं।
MLC और पंचायत चुनाव पर भी नजर
प्रशांत किशोर की प्रस्तावित बिहार यात्रा का समय राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नवंबर 2026 में बिहार विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक कोटे की 8 सीटों पर चुनाव प्रस्तावित हैं। इसके बाद परिसीमन के बाद 2027 में पंचायत चुनाव होने हैं। ऐसे में जन सुराज के सामने संगठन को पंचायत और बूथ स्तर तक मजबूत करने की बड़ी चुनौती है। यात्रा के दौरान सदस्यता अभियान को भी गति देने की तैयारी है। पार्टी को उम्मीद है कि प्रशांत किशोर के सीधे जनसंपर्क अभियान से नए लोग संगठन से जुड़ सकते हैं।
'यात्रा सिर्फ चुनावी कार्यक्रम नहीं'
जन सुराज की प्रवक्ता सोनाली आनंद के मुताबिक पार्टी के लिए यात्राएं केवल चुनावी गतिविधि नहीं हैं। उनका कहना है कि जन सुराज के राजनीतिक दल बनने से पहले भी लोगों के बीच जाकर उनकी बात सुनने की परंपरा रही है। पार्टी का मानना है कि केवल मंच से भाषण देने से जनता के साथ मजबूत जुड़ाव नहीं बनाया जा सकता। इसके लिए लोगों के बीच बैठना, उनकी समस्याओं को सुनना और स्थानीय मुद्दों को समझना जरूरी है। यही वजह है कि नई यात्रा में भी जनसंवाद को प्रमुखता देने की तैयारी है। पार्टी का फोकस सिर्फ अपनी बात रखने के बजाय जनता की राय जानने पर भी रहेगा।
2025 की हार के बाद बांकीपुर ने बदली तस्वीर
2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज को अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी। चुनाव के बाद पार्टी के कुछ नेताओं ने भी प्रशांत किशोर से दूरी बना ली थी। ऐसे समय में बांकीपुर की जीत ने संगठन को नई उम्मीद दी है। अब जन सुराज के पास विधानसभा के भीतर अपनी राजनीतिक बात रखने का अवसर भी है। सड़क पर जनसंपर्क और विधानसभा में राजनीतिक मुद्दे उठाने की रणनीति के जरिए पार्टी अपने प्रभाव को बढ़ाने की कोशिश कर सकती है।
सरकार के खिलाफ मुद्दे भी बन सकते हैं अभियान का हिस्सा
बांकीपुर उपचुनाव में जीत के बाद प्रशांत किशोर भाजपा और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर निशाना साधते रहे हैं। वह इस परिणाम को सरकार के प्रति जनता की नाराजगी से जोड़कर देख रहे हैं। ऐसे में सितंबर से प्रस्तावित बिहार यात्रा के दौरान सरकार के कामकाज और स्थानीय समस्याओं को प्रमुख मुद्दा बनाए जाने की संभावना है। गांवों और कस्बों में बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पलायन और स्थानीय विकास जैसे मुद्दों पर जनसंवाद पार्टी की रणनीति का हिस्सा बन सकते हैं। हालांकि अंतिम अभियान की रूपरेखा अभी सामने नहीं आई है।
3,500 किलोमीटर की पदयात्रा कर चुके हैं प्रशांत किशोर
बिहार में लंबी यात्रा करना प्रशांत किशोर की राजनीति का पुराना हिस्सा रहा है। 2 अक्टूबर 2022 को उन्होंने पश्चिमी चंपारण के भितिहरवा गांधी आश्रम से जन सुराज पदयात्रा शुरू की थी। इस अभियान के दौरान उन्होंने बिहार के सभी 38 जिलों के गांवों और कस्बों में करीब 3,500 किलोमीटर की यात्रा की थी। इसी जनसंपर्क अभियान ने आगे चलकर जन सुराज को राजनीतिक दल के रूप में खड़ा करने की जमीन तैयार की। इसके बाद 2025 में बिहार बदलाव यात्रा और दूसरे संगठनात्मक कार्यक्रम हुए। फरवरी 2026 में पश्चिमी चंपारण से बिहार नवनिर्माण यात्रा भी शुरू की गई थी। अब बांकीपुर की जीत के बाद एक बार फिर 38 जिलों का रुख करने की तैयारी है। इस बार चुनौती केवल जनता तक पहुंचने की नहीं, बल्कि उस जनसंपर्क को मजबूत राजनीतिक संगठन में बदलने की भी होगी।
पूरे बिहार में जनाधार बढ़ाने की तैयारी
प्रशांत किशोर की प्रस्तावित यात्रा से साफ है कि जन सुराज बांकीपुर की जीत को व्यापक राजनीतिक विस्तार में बदलना चाहता है। 38 जिलों का दौरा पार्टी के लिए संगठन विस्तार, सदस्यता अभियान और जनसंवाद का बड़ा अवसर बन सकता है। आने वाले MLC और पंचायत चुनावों के मद्देनजर यह यात्रा संगठन की तैयारियों को भी परख सकती है। हालांकि यात्रा का अंतिम कार्यक्रम और विस्तृत एजेंडा आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल इतना तय है कि बांकीपुर के बाद प्रशांत किशोर की राजनीति का अगला फोकस सिर्फ एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि पूरे बिहार में जन सुराज का संगठन और जनाधार बढ़ाना है।