PM मोदी का बड़ा निर्देश, बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर अब फोकस
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👉 WhatsApp से जुड़ेंप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की योजना और क्रियान्वयन को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जहां तकनीकी और आर्थिक रूप से संभव हो, वहां परिवहन एवं अन्य प्रमुख परियोजनाओं की योजना बनाते समय साझा उपयोगिता गलियारों यानी कॉमन यूटिलिटी कॉरिडोर की संभावनाओं पर विचार किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के साथ उनकी गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने यह बात सेवा तीर्थ में आयोजित PRAGATI की 53वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही। बैठक में रेलवे, सड़क और बिजली क्षेत्र से जुड़ी छह महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समीक्षा की गई। इन परियोजनाओं का विस्तार नौ राज्यों तक है और इनकी कुल अनुमानित लागत 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक बताई गई।
इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में गुणवत्ता पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रालयों, राज्य सरकारों और परियोजनाओं को लागू करने वाली एजेंसियों से आधुनिक तकनीकों को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि निर्माण और क्रियान्वयन के हर चरण में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मजबूत निगरानी और क्वालिटी एश्योरेंस व्यवस्था जरूरी है।
उन्होंने परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान यह भी कहा कि केवल काम की गति बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। तेज क्रियान्वयन के साथ निर्माण की गुणवत्ता और लंबे समय तक टिकाऊपन पर भी समान ध्यान देना होगा। इसके लिए संबंधित विभागों को तकनीकी निगरानी मजबूत करने की आवश्यकता बताई गई।
प्रधानमंत्री ने परियोजनाओं को अलग-अलग हिस्सों या पैकेज के रूप में देखने के बजाय उन्हें एक समग्र व्यवस्था के तौर पर मॉनिटर करने पर जोर दिया। इससे किसी एक हिस्से में होने वाली देरी का असर पूरी परियोजना की शुरुआत या लाभ मिलने की प्रक्रिया पर कम किया जा सकेगा।
देरी से बढ़ती है लागत, जनता को भी देर से मिलता है फायदा
PRAGATI बैठक में प्रधानमंत्री ने इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में होने वाली देरी के प्रभावों पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी परियोजना में देरी का असर केवल निर्माण लागत बढ़ने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा प्रभाव आम लोगों, कारोबार और पूरी अर्थव्यवस्था को मिलने वाले संभावित लाभ पर भी पड़ता है।
उन्होंने मंत्रालयों और राज्यों को परियोजनाओं के लिए एंड-टू-एंड दृष्टिकोण अपनाने को कहा। इसका मतलब है कि योजना बनाने से लेकर निर्माण, निगरानी और अंतिम रूप से परियोजना शुरू होने तक सभी महत्वपूर्ण चरणों को एक साथ ध्यान में रखा जाए।
प्रधानमंत्री ने संबंधित एजेंसियों से उन कमियों और अड़चनों की पहचान करने को कहा, जो किसी परियोजना के अंतिम रूप से शुरू होने में देरी का कारण बन सकती हैं। इसके साथ ही उन्होंने मंत्रालयों और राज्य सरकारों में अधिक जिम्मेदारी और सक्रिय कार्य संस्कृति विकसित करने पर भी बल दिया।
AgriStack में AI के इस्तेमाल पर जोर
बैठक के दौरान डिजिटल कृषि मिशन के तहत AgriStack की भी समीक्षा की गई। प्रधानमंत्री ने कृषि से जुड़े आंकड़ों का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए आधुनिक डिजिटल तकनीकों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में उपलब्ध डेटा का प्रभावी इस्तेमाल किसानों और कृषि व्यवस्था से जुड़े निर्णयों को अधिक उपयोगी बना सकता है। इसके लिए तकनीक आधारित व्यवस्थाओं को मजबूत करना जरूरी है।
इसके अलावा साइबर फ्रॉड के मामलों की भी समीक्षा की गई। प्रधानमंत्री ने साइबर धोखाधड़ी को रोकने के लिए केवल कार्रवाई के बजाय बचाव और जागरूकता पर लगातार ध्यान देने की जरूरत बताई।
उन्होंने प्रशिक्षण, शिक्षा और जन-जागरूकता अभियानों को मजबूत करने की बात कही। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों, युवाओं और अन्य संवेदनशील वर्गों के बीच लगातार लक्षित जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया गया, ताकि लोग ऑनलाइन धोखाधड़ी के तरीकों को समझ सकें और समय रहते सावधानी बरत सकें।
PRAGATI बैठक में लिए गए निर्देशों का व्यापक उद्देश्य इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को समय पर पूरा करना, उनकी गुणवत्ता बनाए रखना और तकनीक के बेहतर इस्तेमाल के जरिए सरकारी योजनाओं का लाभ नागरिकों तक तेजी से पहुंचाना है।
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