58 साल बाद भी कायम है इस गाने का जादू, एक खत से निकला था आइडिया

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1968 में रिलीज हुआ ‘फूल तुम्हें भेजा है खत में’ आज भी पुराने दौर के सबसे यादगार रोमांटिक गीतों में गिना जाता है। ‘फूल तुम्हें भेजा है खत में’ की खासियत सिर्फ इसके खूबसूरत बोल नहीं, बल्कि इसके पीछे छिपी वह दिलचस्प कहानी भी है, जो एक खत, फूल और लिपस्टिक के निशान से जुड़ी बताई जाती है। नूतन और मनीष पर फिल्माया गया यह गीत लता मंगेशकर और मुकेश की आवाज में ऐसा रंग घोलता है कि दशकों बाद भी इसकी मिठास कम नहीं हुई।

आज प्रेम का इजहार कुछ सेकेंड में मोबाइल मैसेज के जरिए हो जाता है। लेकिन उस दौर में एक खत लिखना, उसे डाक से भेजना और फिर जवाब का इंतजार करना अपने आप में मोहब्बत का हिस्सा हुआ करता था। यही वजह है कि यह गीत आज भी सुनने वालों को उस पुराने रोमांस की दुनिया में ले जाता है।

एक खत से शुरू हुई थी गाने की कहानी

इस सदाबहार गीत की कहानी से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा अक्सर सुनाया जाता है। बताया जाता है कि एक प्रशंसक ने संगीतकार जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी को एक खत भेजा था।

इस खत के साथ एक फूल भी रखा गया था। खास बात यह थी कि फूल पर लिपस्टिक का निशान भी मौजूद था। खत में छिपा यह रोमांटिक अंदाज संगीतकारों को काफी दिलचस्प लगा।

बताया जाता है कि उन्होंने यह खत गीतकार इंदीवर को दिखाया। खत, फूल और लिपस्टिक के निशान ने इंदीवर की रचनात्मक कल्पना को छू लिया और इसी से एक प्रेम गीत का विचार सामने आया।

यानी जिस गीत में फूल और खत के जरिए प्यार की बात कही गई, उसके पीछे भी एक वास्तविक रोमांटिक इशारे से जुड़ा किस्सा बताया जाता है।

इंदीवर ने शब्दों में उतार दी मोहब्बत

गीतकार इंदीवर ने इस विचार को बेहद सरल लेकिन प्रभावी शब्दों का रूप दिया। गीत की पूरी भावना ही एक ऐसे प्रेमी की है, जो अपने दिल की बात सीधे कहने के बजाय खत और फूल के जरिए सामने वाले तक पहुंचाता है।

यही सादगी इस गीत की सबसे बड़ी ताकत बनी। इसमें प्रेम को किसी बड़े संवाद या जटिल शब्दों के जरिए नहीं, बल्कि एक फूल और कुछ लिखे हुए शब्दों के माध्यम से महसूस कराया गया।

उस समय प्रेम पत्र लिखना आम बात थी। इसलिए गीत की भावना उस दौर के दर्शकों से सीधे जुड़ गई। आज की पीढ़ी के लिए भी यह गीत पुराने जमाने की मोहब्बत की एक खूबसूरत तस्वीर पेश करता है।

लता मंगेशकर और मुकेश की आवाज ने बदला रंग

गीत को लता मंगेशकर और मुकेश ने अपनी आवाज दी। दोनों की गायकी ने गीत के भाव को और गहराई प्रदान की।

लता मंगेशकर की मधुर आवाज और मुकेश की भावपूर्ण गायकी ने इसे ऐसा रोमांटिक एहसास दिया, जो आज भी श्रोताओं को आकर्षित करता है। गीत के शब्दों और धुन के साथ दोनों आवाजों का तालमेल इसकी पहचान बन गया।

पुराने हिंदी फिल्म संगीत के प्रशंसकों के बीच यह गीत आज भी खास स्थान रखता है। इसकी लोकप्रियता इस बात का उदाहरण है कि अच्छी धुन और भावनात्मक बोल समय बीतने के साथ पुराने नहीं होते।

‘सरस्वतीचंद्र’ फिल्म में हुआ था शामिल

‘फूल तुम्हें भेजा है खत में’ साल 1968 की फिल्म ‘सरस्वतीचंद्र’ का हिस्सा था। फिल्म में नूतन और मनीष मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे।

फिल्म के संगीत को दर्शकों ने काफी पसंद किया था। इसके कई गीत लोकप्रिय हुए, लेकिन ‘फूल तुम्हें भेजा है खत में’ ने रोमांटिक गीत के तौर पर अलग पहचान बनाई।

नूतन और मनीष पर फिल्माया गया यह गीत कहानी के भावनात्मक पक्ष को भी मजबूत करता है। पर्दे पर कलाकारों की मौजूदगी और पीछे से आती लता-मुकेश की आवाज ने गीत को यादगार बना दिया।

पांच दशक से ज्यादा बाद भी क्यों लोकप्रिय है यह गीत?

इस गीत की लोकप्रियता की सबसे बड़ी वजह इसकी सादगी और भावनात्मक जुड़ाव है। इसमें प्यार को दिखाने के लिए किसी भव्य दृश्य या आधुनिक तकनीक की जरूरत नहीं थी।

एक फूल, एक खत और उसमें लिखी भावनाएं ही कहानी कहने के लिए पर्याप्त थीं। यही चीज इसे आज के दौर में भी खास बनाती है।

जहां आज सोशल मीडिया पर प्यार का इजहार तुरंत हो जाता है, वहीं यह गीत उस समय की याद दिलाता है जब किसी के नाम लिखा गया एक खत कई दिनों तक संभालकर रखा जाता था।

खत से मोबाइल मैसेज तक बदल गया प्यार

समय के साथ प्रेम के इजहार का तरीका पूरी तरह बदल गया है। पहले लोग भावनाएं खत में लिखते थे, फिर फोन और एसएमएस का दौर आया और अब इंस्टेंट मैसेजिंग ने सब कुछ बेहद तेज कर दिया है।

लेकिन तकनीक बदलने के बावजूद भावनाओं की अहमियत नहीं बदली। शायद यही कारण है कि ‘फूल तुम्हें भेजा है खत में’ जैसे गीत आज भी लोगों को आकर्षित करते हैं।

यह गीत सिर्फ एक पुराना फिल्मी गाना नहीं, बल्कि उस दौर की प्रेम संस्कृति की याद भी है। खत के इंतजार, फूल की खुशबू और लिखे हुए शब्दों में छिपी भावनाओं को इस गीत ने संगीत के जरिए हमेशा के लिए संजो दिया।


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