पूर्व SDO की 49 लाख की संपत्ति होगी जब्त, पटना कोर्ट का बड़ा आदेश


 

पटना कोर्ट आदेश में एक महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है। पटना कोर्ट आदेश के तहत विशेष अदालत ने मधुबनी जिले के जयनगर के पूर्व अनुमंडलाधिकारी (SDO) गुलाम मुस्तफा अंसारी की कथित आय से अधिक अर्जित 49.03 लाख रुपये की संपत्ति राजसात (सरकार के पक्ष में जब्त) करने का आदेश दिया है। अदालत ने निर्देश दिया है कि संबंधित संपत्ति एक महीने के भीतर सरकार को सौंपी जाए। ऐसा नहीं होने पर जिला प्रशासन नियमानुसार जब्ती की कार्रवाई कर सकता है।

विशेष अदालत ने सुनाया अहम फैसला

पटना स्थित निगरानी मामलों की विशेष अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश जारी किया।

अदालत ने कहा कि पूर्व अनुमंडलाधिकारी गुलाम मुस्तफा अंसारी की 49 लाख 3 हजार 963 रुपये की आय से अधिक संपत्ति चिन्हित की गई है, जिसे बिहार विशेष न्यायालय अधिनियम के तहत राजसात किया जाएगा।

अदालत ने संपत्ति सरकार को सौंपने के लिए एक महीने की समय-सीमा भी निर्धारित की है।

समय पर संपत्ति नहीं सौंपी तो होगी जब्ती

अदालत के आदेश के अनुसार यदि निर्धारित अवधि के भीतर संबंधित संपत्ति सरकार को नहीं सौंपी जाती है, तो संबंधित जिलाधिकारी (DM) कानूनी प्रक्रिया के तहत जब्ती की कार्रवाई कर सकते हैं।

यह आदेश बिहार विशेष न्यायालय अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप पारित किया गया है।

किन-किन संपत्तियों को किया गया राजसात?

अदालत के आदेश में जिन संपत्तियों को राजसात करने की बात कही गई है, उनमें विभिन्न जिलों में स्थित भूखंड और बैंक जमा राशि शामिल हैं।

इनमें शामिल हैं—

  • किशनगंज में 4 भूखंड
  • अररिया में 5 भूखंड
  • पटना में 3 भूखंड
  • सारण जिले में 3 भूखंड
  • विभिन्न बैंकों में जमा राशि

इन सभी संपत्तियों को जांच के दौरान आय से अधिक अर्जित संपत्ति के दायरे में चिन्हित किया गया।

2016 में रिश्वत लेते हुए हुई थी गिरफ्तारी

मामले के विशेष लोक अभियोजक के अनुसार, वर्ष 2016 में निगरानी ब्यूरो ने पूर्व अनुमंडलाधिकारी गुलाम मुस्तफा अंसारी को एक लाख रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था।

गिरफ्तारी के बाद उनके आवास पर तलाशी ली गई थी। जांच के दौरान नकदी, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और निवेश संबंधी कागजात बरामद हुए थे।

इन्हीं तथ्यों के आधार पर बाद में आय से अधिक संपत्ति का अलग मामला दर्ज किया गया।

1997 से 2016 के बीच संपत्ति अर्जित करने का आरोप

निगरानी जांच के अनुसार गुलाम मुस्तफा अंसारी पर 26 अगस्त 1997 से 27 अक्टूबर 2016 के बीच अपनी वैध आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है।

जांच एजेंसी का आरोप है कि इस अवधि में उन्होंने अपने और अपने परिजनों के नाम पर ज्ञात आय स्रोतों से अधिक संपत्ति बनाई।

इसके बाद निगरानी विभाग ने बिहार विशेष न्यायालय अधिनियम की धारा 13 के तहत संपत्ति राजसात करने का आवेदन अदालत में दाखिल किया था।

अदालत ने क्यों दिया यह आदेश?

विशेष अदालत ने उपलब्ध दस्तावेजों, जांच रिपोर्ट और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद आदेश पारित किया।

अदालत का यह फैसला केवल संपत्ति राजसात करने से संबंधित है। अन्य कानूनी पहलुओं की सुनवाई संबंधित प्रावधानों के अनुसार अलग प्रक्रिया के तहत होती है।

भ्रष्टाचार के मामलों में क्या है राजसात की प्रक्रिया?

भ्रष्टाचार या आय से अधिक संपत्ति के मामलों में यदि अदालत को पर्याप्त आधार मिलता है, तो संबंधित संपत्ति को सरकार के पक्ष में राजसात करने का आदेश दिया जा सकता है।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य अवैध तरीके से अर्जित संपत्ति को सार्वजनिक हित में सरकार के अधीन लाना होता है।

हालांकि प्रत्येक मामले में अंतिम निर्णय अदालत द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही लिया जाता है।

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