संसद में गेरुआ वेश पर घिरे पप्पू यादव, बोले- क्या मुझे सनातनी होने का हक नहीं?


 

Pappu Yadav News एक बार फिर राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गई है। Pappu Yadav News में इस बार मुद्दा संसद परिसर में गेरुए वस्त्र पहनकर किए गए प्रदर्शन का है। इस घटनाक्रम के बाद उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है और कई राजनीतिक दलों ने उनके व्यवहार पर सवाल उठाए हैं। विवाद बढ़ने के बीच पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी सफाई दी और कहा कि उन्हें भी गेरुआ वस्त्र पहनने और सनातन धर्म का पालन करने का पूरा अधिकार है।

उन्होंने अपने बयान में कहा कि उनका उद्देश्य किसी की भावना को आहत करना नहीं, बल्कि सनातन और मंदिरों से जुड़े मुद्दों को उठाना है।

पप्पू यादव ने क्या कहा?

पूर्णिया में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में पप्पू यादव ने कहा कि, "क्या मैं सनातनी नहीं हूं? क्या मुझे गेरुआ पहनने का अधिकार नहीं है?"

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग गेरुआ वस्त्र पहनकर धार्मिक संस्थाओं के नाम पर गलत काम करते हैं, जबकि उनका उद्देश्य सनातन की रक्षा करना है।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर सनातन और देश की आस्था की रक्षा के लिए उन्हें बार-बार संघर्ष करना पड़े, तो वह इसके लिए तैयार हैं।

सांसद ने कहा कि वह किसी धमकी से डरने वाले नहीं हैं और यदि उनके खिलाफ कार्रवाई होती है तो उसका सामना भी करेंगे।

FIR और विरोध पर भी दी प्रतिक्रिया

संसद में प्रदर्शन के बाद विभिन्न स्थानों पर दर्ज शिकायतों और FIR पर प्रतिक्रिया देते हुए पप्पू यादव ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध दर्ज कराना हर नागरिक का अधिकार है।

उन्होंने कहा कि जब विपक्ष के अन्य बड़े नेता कानूनी मामलों से नहीं डरते, तो वह भी कानून का सामना करने के लिए तैयार हैं।

उन्होंने दावा किया कि वह किसी भी जांच से भागने वाले नहीं हैं और अपना पक्ष कानूनी प्रक्रिया के तहत रखेंगे।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उनके खिलाफ दर्ज शिकायतों के पीछे राजनीतिक कारण हो सकते हैं। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर भी उठाए सवाल

प्रेस वार्ता के दौरान पप्पू यादव ने राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कुछ मुद्दों पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने ट्रस्ट के पदाधिकारियों के खिलाफ जांच की मांग करते हुए कहा कि मंदिर निधि के उपयोग को लेकर पारदर्शिता होनी चाहिए।

साथ ही उन्होंने मांग की कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता के आरोप हैं, तो उनकी जांच हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के किसी वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए।

इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से इस खबर के प्रकाशन तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

उपेंद्र कुशवाहा ने साधा निशाना

राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने कहा कि संसद परिसर में सांसद द्वारा इस तरह का वेश धारण कर प्रदर्शन करना उचित नहीं था।

कुशवाहा के अनुसार, संसद देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है और वहां प्रत्येक सांसद से गरिमापूर्ण व्यवहार की अपेक्षा की जाती है।

उन्होंने कहा कि सांसद का आचरण केवल उनकी व्यक्तिगत छवि ही नहीं, बल्कि संसद की प्रतिष्ठा से भी जुड़ा होता है।

राजनीतिक बयानबाजी के बीच बढ़ी बहस

पप्पू यादव के बयान और संसद में उनके प्रदर्शन के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है।

एक पक्ष इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विरोध का माध्यम बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे संसदीय परंपराओं के विपरीत मान रहा है।

इस बीच, विभिन्न राज्यों में दर्ज शिकायतों और FIR को लेकर भी कानूनी प्रक्रिया जारी है। संबंधित एजेंसियां अपने स्तर पर मामलों की जांच कर रही हैं।

आगे क्या हो सकता है?

इस मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।

यदि दर्ज शिकायतों में जांच के दौरान पर्याप्त आधार मिलता है, तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

वहीं, संसद में सदस्यों के आचरण से जुड़े मामलों पर भी संबंधित संसदीय नियमों के तहत निर्णय लिया जा सकता है।

फिलहाल यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में जांच और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाओं के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

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