मुंगेर में आस्था का अद्भुत संगम, हाथों से बाबाधाम निकले मनोज
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👉 WhatsApp से जुड़ेंसावन में मुंगेर कांवरिया पथ पर आस्था और हौसले की दो ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जो हर किसी का ध्यान खींच रही हैं। मुंगेर कांवरिया पथ पर पटना के नौबतपुर निवासी दोनों पैरों से दिव्यांग मनोज कुमार हाथों के सहारे बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़ रहे हैं। दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से आए करीब 40 से 45 शिवभक्त भगवान गणेश की विशाल प्रतिमा को कंधे पर लेकर बाबाधाम जा रहे हैं। दोनों यात्राएं श्रद्धा, विश्वास और समर्पण की अलग-अलग कहानी बयां कर रही हैं।
हाथों के सहारे बाबा धाम की ओर बढ़ रहे मनोज
पटना के नौबतपुर निवासी मनोज कुमार बचपन में पोलियो की वजह से दोनों पैरों से दिव्यांग हो गए थे। महज तीन साल की उम्र में आई इस परेशानी ने उनकी जिंदगी की राह जरूर बदल दी, लेकिन उनका हौसला नहीं तोड़ सकी।
मनोज पिछले दो वर्षों से लगातार बाबा बैद्यनाथ धाम की यात्रा कर रहे हैं। इस बार भी वह कच्ची कांवरिया पथ से हाथों और अपने शरीर के सहारे धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे हैं।
यात्रा के दौरान जब दूसरे कांवरिया उन्हें इस तरह आगे बढ़ते देखते हैं तो कुछ देर रुककर उनका उत्साह बढ़ाते हैं। कई श्रद्धालु उनके जज्बे को देखकर उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।
मनोज के लिए यह सिर्फ धार्मिक यात्रा नहीं
मनोज की बाबाधाम यात्रा केवल दर्शन और पूजा तक सीमित नहीं है। उनके लिए यह आस्था के साथ-साथ आत्मविश्वास और संकल्प की यात्रा भी है।
शारीरिक चुनौती के बावजूद वह हर बार बाबा बैद्यनाथ के दरबार तक पहुंचने का प्रयास करते हैं। उनकी यात्रा रास्ते से गुजरने वाले दूसरे श्रद्धालुओं के लिए भी प्रेरणा का कारण बन रही है।
सावन में कांवरियों की भीड़ के बीच मनोज का इस तरह आगे बढ़ना लोगों को यह संदेश देता है कि मजबूत इच्छाशक्ति के सामने बड़ी से बड़ी चुनौती भी रास्ता नहीं रोक सकती।
गाजीपुर से गणेश जी को लेकर निकले शिवभक्त
इसी कच्ची कांवरिया पथ पर उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से आए शिवभक्तों की टोली भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
करीब 40 से 45 श्रद्धालु अपने साथ भगवान गणेश की विशाल प्रतिमा लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़ रहे हैं। प्रतिमा को एक विशेष पालकी पर स्थापित किया गया है।
एक समय में 13 कांवरिया इस पालकी को अपने कंधों पर उठाकर आगे बढ़ते हैं। कुछ दूरी तय करने के बाद थकान होने पर दूसरे साथी उनकी जगह ले लेते हैं।
इस तरह पूरी टोली आपसी सहयोग और तालमेल के साथ गणेश जी की प्रतिमा को लेकर बाबाधाम की यात्रा कर रही है।
गणेश जी को पिता महादेव से मिलाने की भावना
गाजीपुर से आए श्रद्धालुओं के मुताबिक, भगवान गणेश महादेव के पुत्र हैं। इसी धार्मिक भावना के साथ वह गणेश जी की प्रतिमा को लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम जा रहे हैं।
भक्तों का कहना है कि वह गणेश जी को उनके पिता यानी भगवान शिव से मिलाने के भाव के साथ यह यात्रा कर रहे हैं।
जब यह विशाल प्रतिमा पालकी पर सवार होकर कांवरियों के कंधों पर आगे बढ़ती है, तो रास्ते में मौजूद श्रद्धालु कुछ देर रुककर इस अनोखे दृश्य को देखते हैं।
प्रतिमा की सजावट और उसे लेकर चल रही भक्तों की टोली सावन की यात्रा में अलग ही रंग भर रही है।
कच्ची कांवरिया पथ पर दिखे आस्था के अलग रंग
मुंगेर के कच्ची कांवरिया पथ पर इन दिनों देश के अलग-अलग हिस्सों से आए श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़ रहे हैं।
कोई कांवर लेकर पैदल यात्रा कर रहा है, तो कोई अपनी क्षमता और साधन के अनुसार बाबा के दरबार तक पहुंचने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहा है। इसी बीच मनोज कुमार और गाजीपुर के शिवभक्तों की यात्रा ने खास ध्यान खींचा है।
एक तरफ मनोज अपने हाथों के सहारे मुश्किल रास्ता तय कर रहे हैं। दूसरी ओर कई श्रद्धालु मिलकर भगवान गणेश की विशाल प्रतिमा को कंधों पर उठाकर आगे बढ़ रहे हैं।
एक यात्रा हौसले की, दूसरी समर्पण की
मनोज कुमार की यात्रा व्यक्तिगत संघर्ष और अटूट विश्वास की मिसाल है। वहीं गणेश जी की प्रतिमा लेकर चल रहे भक्त सामूहिक श्रद्धा और धार्मिक भावना का उदाहरण पेश कर रहे हैं।
दोनों यात्राओं का तरीका अलग है, लेकिन मंजिल एक ही है—बाबा बैद्यनाथ के दरबार तक पहुंचना और अपनी आस्था अर्पित करना।
यही वजह है कि सावन के दौरान मुंगेर के कांवरिया पथ की ये तस्वीरें लोगों को आकर्षित कर रही हैं। यहां सिर्फ कांवर यात्रा नहीं, बल्कि विश्वास, सहयोग, साहस और समर्पण की कई कहानियां एक साथ दिखाई दे रही हैं।
श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बनी दोनों यात्राएं
कच्ची कांवरिया पथ पर मनोज को हाथों के सहारे आगे बढ़ते देख दूसरे कांवरियों का रुकना और उनका हौसला बढ़ाना यात्रा के मानवीय पक्ष को सामने लाता है।
वहीं गणेश जी की प्रतिमा को कंधे पर लेकर चल रही टोली सामूहिक भक्ति और आपसी सहयोग की तस्वीर पेश करती है।
सावन की इस यात्रा में दोनों घटनाएं अलग-अलग संदेश देती हैं। मनोज की यात्रा बताती है कि संकल्प के आगे शारीरिक बाधाएं भी छोटी पड़ सकती हैं, जबकि गाजीपुर के भक्तों की यात्रा सामूहिक आस्था और समर्पण की ताकत दिखाती है।
दोनों यात्राओं की खास बातें
- मनोज कुमार: पटना के नौबतपुर निवासी हैं।
- बचपन में पोलियो के कारण दोनों पैरों से दिव्यांग हुए।
- पिछले दो वर्षों से बाबा बैद्यनाथ धाम की यात्रा कर रहे हैं।
- इस बार हाथों और शरीर के सहारे कच्ची कांवरिया पथ पर आगे बढ़ रहे हैं।
- गाजीपुर के भक्त: करीब 40-45 शिवभक्तों की टोली है।
- भगवान गणेश की विशाल प्रतिमा पालकी पर रखी गई है।
- एक समय में 13 कांवरिया प्रतिमा को कंधे पर उठाते हैं।
- भक्त गणेश जी को उनके पिता महादेव से मिलाने की भावना के साथ बाबाधाम जा रहे हैं।
सावन की इस यात्रा में मुंगेर का कच्ची कांवरिया पथ आस्था के साथ-साथ इंसानी हौसले और सामूहिक समर्पण की भी तस्वीर पेश कर रहा है। मनोज कुमार और गाजीपुर के शिवभक्तों की यात्रा इसी भावना को अलग-अलग तरीके से सामने लाती है।
