MSME Bill 2026 संसद से पास, छोटे कारोबारियों के भुगतान विवाद पर बड़ा बदलाव
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👉 WhatsApp से जुड़ेंसंसद ने MSME Bill 2026 को मंजूरी दे दी है। लोकसभा ने रविवार को माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज डेवलपमेंट (अमेंडमेंट) बिल 2026 पारित किया, जबकि राज्यसभा इसे पहले ही मंजूरी दे चुकी थी। केंद्रीय MSME मंत्री जीतन राम मांझी ने लोकसभा में विधेयक को आगे बढ़ाया।
नए संशोधन का मुख्य उद्देश्य MSME यानी सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को भुगतान में होने वाली देरी से राहत देना और कारोबारी विवादों के समाधान की प्रक्रिया को सरल बनाना है। विधेयक में सरकारी संस्थानों से भुगतान और विवाद निपटारे को लेकर कई अहम प्रावधान किए गए हैं।
सरकारी कंपनियों के भुगतान को लेकर नया प्रावधान
MSME Bill 2026 में केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के प्रत्येक उपक्रम के लिए MSME से खरीदी गई वस्तुओं और सेवाओं के बिलों का निपटारा Trade Receivables Discounting System (TReDS) के माध्यम से करने का प्रावधान किया गया है।
इसका उद्देश्य MSME कारोबारियों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करना है। छोटे व्यवसायों के लिए भुगतान में देरी अक्सर नकदी प्रवाह की समस्या पैदा करती है। नए प्रावधान से इस परेशानी को कम करने की कोशिश की गई है।
विधेयक में विवाद समाधान की प्रक्रिया के लिए भी समयसीमा तय की गई है। अगर मध्यस्थता यानी मेडिएशन से विवाद नहीं सुलझता है, तो मध्यस्थता समाप्त होने की तारीख से 30 दिनों के भीतर मामले को आर्बिट्रेशन के लिए भेजना होगा।
विवादों के निपटारे की समयसीमा भी तय
नए प्रावधानों के अनुसार, आर्बिट्रेशन में पक्षकारों की दलीलें पूरी होने के बाद अधिकतम 90 दिनों के भीतर अवॉर्ड दिए जाने का प्रावधान है। इसका मकसद MSME से जुड़े भुगतान विवादों को लंबे समय तक अदालत या संबंधित प्रक्रिया में अटके रहने से रोकना है।
विधेयक में लंबे समय से लंबित मामलों को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है। यदि कोई मामला छह महीने से अधिक समय से लंबित है, तो निर्धारित अवॉर्ड राशि का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा सप्लायर को भुगतान करने का प्रावधान रखा गया है।
इससे उन छोटे कारोबारियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनकी बड़ी रकम विवादों के कारण लंबे समय तक अटकी रहती है।
लोकसभा में हंगामे के बीच पारित हुआ बिल
MSME Bill 2026 पर चर्चा के बाद लोकसभा में विपक्षी सदस्यों का विरोध जारी रहा। कार्यवाही के दौरान प्रदर्शन और नारेबाजी को लेकर पीठासीन अधिकारी दिलीप सैकिया ने नाराजगी जताई।
उन्होंने सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटने और रचनात्मक चर्चा में हिस्सा लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि सभी सांसदों को अपने मुद्दे उठाने का पूरा अवसर दिया जाएगा, लेकिन सदन की गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी विपक्ष के व्यवहार पर चिंता जताई। हंगामा जारी रहने के बाद पीठासीन अधिकारी ने सदन की कार्यवाही सोमवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
क्विट इंडिया आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ पर श्रद्धांजलि
लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने पर स्पीकर ओम बिरला ने भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ का उल्लेख किया। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों और शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
स्पीकर ने महात्मा गांधी के ‘करो या मरो’ के आह्वान को याद करते हुए भारत छोड़ो आंदोलन को राष्ट्रीय एकता, साहस, सत्य और अहिंसा का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन ने स्वतंत्रता हासिल करने के लिए देश में व्यापक जनजागरण को नई ऊर्जा दी।
सदन ने महात्मा गांधी समेत स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों और शहीदों के सम्मान में मौन भी रखा।
छात्र प्रदर्शन के मुद्दे पर विपक्ष का विरोध
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद लोकसभा अध्यक्ष ने प्रश्नकाल शुरू करने की कोशिश की, लेकिन विपक्षी सदस्यों ने छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया।
विपक्षी सांसद इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बयान की मांग कर रहे थे। हंगामे के बीच स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि प्रश्नकाल सदन की महत्वपूर्ण प्रक्रिया है और प्रत्येक सांसद को सवाल पूछने का अधिकार देता है।
उन्होंने संसद को चर्चा, सवाल और विचारों के सार्थक आदान-प्रदान का मंच बताया। हालांकि विरोध और हंगामा जारी रहने के कारण सदन की कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे तक और बाद में पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई।
MSME Bill 2026 के पारित होने के साथ छोटे कारोबारियों के भुगतान और विवाद समाधान से जुड़े नियमों में बदलाव का रास्ता साफ हो गया है। अब इन प्रावधानों के लागू होने के बाद उनका वास्तविक प्रभाव सामने आएगा।
