मोतिहारी में नकली नोटों का बड़ा खुलासा, 500 की गड्डी संग 2 गिरफ्तार
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👉 WhatsApp से जुड़ेंमोतिहारी में नकली नोट के कथित नेटवर्क का खुलासा हुआ है। नकली नोट की खेप को ठिकाने तक पहुंचने से पहले ही SSB और बिहार पुलिस की संयुक्त टीम ने पकड़ लिया। पूर्वी चंपारण जिले में हुई कार्रवाई के दौरान 500 रुपये के 176 संदिग्ध नोट बरामद किए गए, जिनकी कुल कीमत 88 हजार रुपये बताई गई है। मामले में बाइक सवार दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ये नोट कहां से आए और इन्हें आगे कहां पहुंचाया जाना था।
प्रारंभिक जांच में बरामद नोटों की प्रिंटिंग और क्रम संख्या को लेकर संदेह सामने आया है। हालांकि, करेंसी के नकली होने की अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
SSB को कैसे मिली नकली करेंसी की सूचना?
जानकारी के मुताबिक, SSB की 71वीं वाहिनी की सीमा चौकी महुअवा को संदिग्ध जाली भारतीय मुद्रा की तस्करी से जुड़ी सूचना मिली थी।
इनपुट में बताया गया था कि कुछ लोग मोतिहारी से संदिग्ध नकली नोट लेकर आगे जाने की कोशिश कर सकते हैं। सूचना मिलने के बाद SSB ने लखौरा थाना पुलिस के साथ मिलकर संयुक्त अभियान शुरू किया।
मोतिहारी-लखौरा मार्ग पर निगरानी बढ़ाई गई और संदिग्ध वाहनों की जांच शुरू की गई। टीम काफी देर तक संभावित तस्करों के आने का इंतजार करती रही।
इसी दौरान एक मोटरसाइकिल पर दो लोग आते दिखाई दिए। पुलिस और SSB की टीम ने उन्हें रोककर पूछताछ शुरू की।
बाइक सवार दो लोगों को पुलिस ने पकड़ा
संयुक्त टीम ने दोनों संदिग्धों की पहचान की। पुलिस के अनुसार, पकड़े गए लोगों में चिरैया थाना क्षेत्र के बसवरिया निवासी 38 वर्षीय शेख नूर आलम और महुआवा निवासी 35 वर्षीय मो. इस्तकार शामिल हैं।
दोनों से पूछताछ के बाद उनकी तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान शेख नूर आलम के पास से 500 रुपये के 176 नोट बरामद किए गए।
इन नोटों की कुल अंकित कीमत 88 हजार रुपये बताई गई है। पुलिस को संदेह है कि बरामद मुद्रा नकली हो सकती है।
कार्रवाई के दौरान सदर मोतिहारी के अंचलाधिकारी की मौजूदगी में भी तलाशी प्रक्रिया पूरी की गई। बरामद करेंसी और दोनों आरोपियों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए लखौरा थाना पुलिस को सौंप दिया गया।
500 रुपये के 176 नोटों ने बढ़ाया शक
पुलिस की प्रारंभिक जांच में बरामद नोटों को लेकर कई सवाल सामने आए। अधिकारियों के मुताबिक, नोटों की प्रिंटिंग गुणवत्ता सामान्य भारतीय मुद्रा जैसी नहीं दिख रही थी।
जांच के दौरान कुछ नोटों पर एक जैसी क्रम संख्या होने की बात भी सामने आई। इसके अलावा प्रिंटिंग की गुणवत्ता फीकी नजर आने से पुलिस का संदेह और गहरा गया।
हालांकि, केवल शुरुआती निरीक्षण के आधार पर किसी करेंसी को आधिकारिक रूप से नकली घोषित नहीं किया जा सकता। इसके लिए संबंधित स्तर पर नोटों की तकनीकी जांच जरूरी होगी।
इसी वजह से पुलिस अब बरामद मुद्रा की विस्तृत जांच कराने की प्रक्रिया में जुटी है।
नकली नोटों का नेटवर्क कितना बड़ा?
इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि 88 हजार रुपये की संदिग्ध करेंसी आरोपियों तक कैसे पहुंची।
पुलिस अब कथित सप्लायर, संभावित खरीदार और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटा सकती है। साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि दोनों आरोपी खुद नकली नोट तैयार करते थे या किसी दूसरे व्यक्ति से लेकर उनकी आपूर्ति कर रहे थे।
सीमा से जुड़े इलाकों में नकली भारतीय मुद्रा की तस्करी को सुरक्षा एजेंसियां गंभीरता से लेती हैं। पूर्वी चंपारण का भौगोलिक क्षेत्र भी इस मामले को जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण बनाता है।
हालांकि, अभी तक पुलिस की ओर से किसी बड़े नेटवर्क या मुख्य आरोपी के बारे में आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए मामले में आगे की जांच के नतीजों का इंतजार करना होगा।
पुलिस अब किन बिंदुओं पर करेगी जांच?
मोतिहारी पुलिस के सामने कई अहम सवाल हैं। सबसे पहले बरामद नोटों की वास्तविकता की पुष्टि होगी। इसके बाद आरोपियों से पूछताछ के आधार पर करेंसी के स्रोत और संभावित गंतव्य का पता लगाने की कोशिश की जाएगी।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगा सकती हैं कि क्या आरोपियों के मोबाइल फोन, संपर्कों या लेनदेन से किसी अन्य व्यक्ति तक पहुंचने वाली जानकारी मिलती है।
अगर जांच में किसी संगठित गिरोह की भूमिका सामने आती है, तो कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है।
फिलहाल दो लोगों की गिरफ्तारी और 88 हजार रुपये की संदिग्ध करेंसी बरामद होना इस मामले की मुख्य उपलब्धि है।
मोतिहारी में कार्रवाई से क्या संकेत?
SSB और बिहार पुलिस की संयुक्त कार्रवाई यह संकेत देती है कि सीमावर्ती और संवेदनशील इलाकों में संदिग्ध करेंसी की आवाजाही पर सुरक्षा एजेंसियां नजर रख रही हैं।
नकली मुद्रा का इस्तेमाल आर्थिक व्यवस्था और आम लोगों के लिए भी गंभीर समस्या बन सकता है। ऐसे मामलों में समय रहते कार्रवाई होने से संदिग्ध करेंसी को बाजार में पहुंचने से रोका जा सकता है।
अब इस मामले की जांच से यह स्पष्ट होगा कि बरामद 176 नोट वास्तव में नकली हैं या नहीं और यदि नकली पाए जाते हैं तो इनके पीछे कौन सा नेटवर्क काम कर रहा था।
फिलहाल पुलिस ने दोनों संदिग्धों को हिरासत में लेकर मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे नेटवर्क और करेंसी की असली कहानी सामने आने की उम्मीद है।
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