मंगल पांडे को सरकार और संगठन दोनों में जगह नहीं, अब क्या होगा?
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बिहार बीजेपी के दिग्गज नेता मंगल पांडे इन दिनों पार्टी के भीतर अपनी अगली भूमिका को लेकर चर्चा में हैं। मंगल पांडे को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली और अब 17 अगस्त 2026 को घोषित नितिन नवीन की नई टीम में भी उनका नाम नहीं आया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि लंबे समय तक सरकार और संगठन में अहम जिम्मेदारियां संभालने वाले इस वरिष्ठ नेता को बीजेपी अब किस भूमिका में इस्तेमाल करेगी।
सिवान से विधानसभा चुनाव जीतकर विधायक बने मंगल पांडे इससे पहले बिहार सरकार में मंत्री रह चुके हैं। पार्टी संगठन में भी उनका लंबा अनुभव रहा है। कई राज्यों में विधानसभा चुनावों के प्रभारी और सह प्रभारी के तौर पर उन्होंने जिम्मेदारी संभाली है।
सरकार में जगह नहीं मिली तो संगठन की उम्मीद जगी
सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद जब मंत्रिमंडल में मंगल पांडे को जगह नहीं मिली, तब पार्टी के भीतर और राजनीतिक गलियारों में उनकी अगली भूमिका को लेकर अटकलें शुरू हुई थीं।
माना जा रहा था कि बीजेपी उनके संगठनात्मक अनुभव का इस्तेमाल कर सकती है। इसी वजह से चर्चा थी कि उन्हें प्रदेश संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है। यहां तक कि उन्हें महामंत्री बनाए जाने की संभावनाओं की भी चर्चा हुई थी।
मंगल पांडे के पास संगठन में काम करने का लंबा अनुभव है। ऐसे में सरकार से बाहर रहने के बाद उनके लिए संगठन में बड़ी भूमिका को स्वाभाविक विकल्प माना जा रहा था।
लेकिन 17 अगस्त को नितिन नवीन की टीम की घोषणा के बाद तस्वीर कुछ अलग नजर आई। नई टीम में मंगल पांडे का नाम शामिल नहीं होने से उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चा और तेज हो गई है।
नितिन नवीन की टीम में भी नहीं मिला स्थान
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम से काफी उम्मीदें जुड़ी थीं। खासकर उन नेताओं की भूमिका पर नजर थी, जिन्हें सरकार में जगह नहीं मिली थी।
मंगल पांडे का नाम भी इसी वजह से चर्चा में था। उनके संगठनात्मक अनुभव और अलग-अलग राज्यों में चुनावी प्रबंधन की भूमिका को देखते हुए माना जा रहा था कि उन्हें प्रदेश संगठन में जिम्मेदारी मिल सकती है।
हालांकि, घोषित टीम में उनका नाम नहीं आया। इससे फिलहाल वह सरकार और प्रदेश संगठन, दोनों की प्रमुख संरचनाओं से बाहर नजर आ रहे हैं।
इस स्थिति ने बीजेपी के भीतर उनकी अगली भूमिका को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, किसी नेता को संगठन की एक टीम में जगह नहीं मिलने का अर्थ यह जरूरी नहीं कि पार्टी में उसकी भूमिका खत्म हो गई है। बीजेपी चुनावी जिम्मेदारियों, केंद्रीय संगठन या दूसरे राज्यों में भी वरिष्ठ नेताओं को अलग-अलग भूमिकाएं देती रही है।
1987 से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
मंगल पांडे का राजनीतिक सफर विद्यार्थी परिषद से शुरू हुआ था। वर्ष 1987 से संगठनात्मक राजनीति में सक्रिय रहने के बाद उन्होंने बीजेपी में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।
2013 से 2017 के बीच बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर भी उन्होंने काम किया। उनके प्रदेश अध्यक्ष रहते 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने बिहार की 40 में से 31 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
इसके अलावा झारखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में भी उन्हें चुनावी जिम्मेदारियां दी गईं। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने अलग-अलग चुनावों में उनके संगठनात्मक अनुभव का इस्तेमाल किया।
यही वजह है कि मंगल पांडे को सिर्फ बिहार की राजनीति तक सीमित नेता नहीं माना जाता। चुनावी रणनीति और संगठन संचालन में उनके अनुभव को बीजेपी की बड़ी ताकतों में गिना जाता रहा है।
पश्चिम बंगाल की जीत के बाद बढ़ी थीं उम्मीदें
हालिया पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मंगल पांडे को पार्टी ने चुनाव प्रभारी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी थी। वहां उन्होंने संगठन और चुनावी रणनीति को जमीन पर लागू करने में भूमिका निभाई।
पार्टी के लिए पश्चिम बंगाल का प्रदर्शन महत्वपूर्ण माना गया और इसी के बाद यह चर्चा तेज हुई कि मंगल पांडे को उनकी चुनावी भूमिका का बड़ा इनाम मिल सकता है।
राजनीतिक हलकों में कयास लगाए जा रहे थे कि उन्हें संगठन में राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी मिल सकती है या बिहार बीजेपी में कोई महत्वपूर्ण पद दिया जा सकता है। लेकिन फिलहाल न तो मंत्रिमंडल में उनका स्थान बना और न ही नितिन नवीन की घोषित टीम में उनका नाम आया।
अब बीजेपी मंगल पांडे को कहां करेगी इस्तेमाल?
मंगल पांडे के सामने फिलहाल सबसे बड़ा सवाल उनकी अगली राजनीतिक जिम्मेदारी का है। उनके पास संगठन और चुनाव प्रबंधन का लंबा अनुभव है, इसलिए पार्टी के पास उन्हें इस्तेमाल करने के कई विकल्प हो सकते हैं।
उन्हें किसी दूसरे राज्य में संगठनात्मक या चुनावी जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके अलावा केंद्रीय बीजेपी स्तर पर भी उन्हें कोई भूमिका मिलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, फिलहाल ऐसी किसी नई जिम्मेदारी की आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
दूसरी ओर, सिवान से विधायक होने के कारण बिहार की राजनीति में उनकी सक्रियता बनी रहेगी। आने वाले समय में विधानसभा के भीतर उनकी भूमिका और पार्टी के भीतर उनकी सक्रियता पर भी नजर रहेगी।
फिलहाल इतना साफ है कि सरकार और संगठन दोनों में जगह नहीं मिलने के बाद मंगल पांडे की अगली भूमिका बीजेपी की रणनीति का अहम विषय बन गई है। उनके लंबे राजनीतिक अनुभव को देखते हुए यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी उन्हें बिहार में सक्रिय रखती है या फिर किसी बड़े संगठनात्मक अथवा चुनावी मिशन के लिए इस्तेमाल करती है।
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