कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 का सफल समापन, 477 श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

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कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 का उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से होकर जाने वाले लिपुलेख दर्रा मार्ग पर सफलतापूर्वक समापन हो गया है। इस साल 4 जुलाई से शुरू हुई यात्रा में कुल 477 श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। श्रद्धालुओं ने 10 जत्थों में पवित्र कैलाश पर्वत और मानसरोवर के दर्शन किए।

यात्रा के अंतिम और दसवें जत्थे के भारत लौटने के साथ ही इस वर्ष की तीर्थयात्रा पूरी हो गई। यात्रा अधिकारी धन सिंह बिष्ट ने बताया कि अंतिम जत्था सुरक्षित भारत पहुंच गया है। उन्होंने यात्रा के सफल संचालन में सहयोग देने वाले सभी संबंधित विभागों और सेना के जवानों के प्रति आभार जताया।

10 जत्थों में पूरी हुई कैलाश मानसरोवर यात्रा

कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 की शुरुआत 4 जुलाई को हुई थी। इस दौरान अलग-अलग जत्थों में श्रद्धालुओं ने निर्धारित मार्ग से यात्रा की और कैलाश पर्वत तथा मानसरोवर के दर्शन किए।

पिथौरागढ़ जिले में स्थित लिपुलेख दर्रा इस यात्रा के महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और ऊंचाई वाले क्षेत्र से गुजरने के बावजूद श्रद्धालुओं ने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अपनी यात्रा पूरी की।

इस साल कुल 477 श्रद्धालु 10 जत्थों में यात्रा पर गए। अंतिम जत्थे की सुरक्षित वापसी के साथ यात्रा का पूरा कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

कैलाश मानसरोवर हिंदू, बौद्ध, जैन और बोन परंपराओं में विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। इसी वजह से हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस पवित्र क्षेत्र की यात्रा करना चाहते हैं।

अंतिम जत्थे की सुरक्षित वापसी

यात्रा अधिकारी धन सिंह बिष्ट के अनुसार, कैलाश मानसरोवर यात्रा का दसवां और अंतिम जत्था सुरक्षित भारत लौट आया है। इसके साथ ही 2026 की यात्रा औपचारिक रूप से पूरी हो गई।

उन्होंने यात्रा के संचालन में योगदान देने वाले विभिन्न सरकारी विभागों और सुरक्षा व्यवस्था में तैनात सेना के जवानों का आभार व्यक्त किया। दुर्गम हिमालयी क्षेत्र में यात्रा को सुचारु बनाए रखने में कई एजेंसियों की भूमिका रहती है।

श्रद्धालुओं की आवाजाही, मार्ग प्रबंधन और सुरक्षा जैसी व्यवस्थाओं के बीच यात्रा का सफल संचालन संबंधित विभागों के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

सेना और विभागों के सहयोग से सफल हुआ आयोजन

कैलाश मानसरोवर यात्रा का मार्ग कठिन भौगोलिक परिस्थितियों से होकर गुजरता है। ऐसे इलाकों में तीर्थयात्रियों की सुरक्षित आवाजाही के लिए प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय जरूरी होता है।

यात्रा अधिकारी ने सभी संबंधित विभागों के साथ सेना के जवानों के सहयोग की सराहना की। उनके अनुसार, सामूहिक प्रयासों के कारण यात्रा को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सफलतापूर्वक पूरा किया जा सका।

477 श्रद्धालुओं का 10 जत्थों में यात्रा पूरी करना इस आयोजन के व्यापक स्तर को दर्शाता है। अंतिम जत्थे की वापसी के बाद अब इस वर्ष की यात्रा से जुड़े कार्यक्रम समाप्त हो गए हैं।

कैलाश मानसरोवर यात्रा भारत की महत्वपूर्ण धार्मिक यात्राओं में से एक है। इस यात्रा के दौरान श्रद्धालु कैलाश पर्वत और मानसरोवर के दर्शन कर आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त करते हैं। 2026 की यात्रा के सफल समापन के साथ श्रद्धालुओं का यह धार्मिक सफर भी पूरा हो गया।


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