JPSC परीक्षा घोटाले में बिहार कनेक्शन! आरा से गिरफ्तार हुआ आरोपी
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👉 WhatsApp से जुड़ेंझारखंड लोक सेवा आयोग यानी JPSC परीक्षा घोटाला मामले की जांच अब बिहार तक पहुंच गई है। JPSC परीक्षा घोटाला मामले में सीआईडी ने भोजपुर जिले के चरपोखरी क्षेत्र निवासी मिथिलेश सिंह को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपी की कथित भूमिका परीक्षा में सेटिंग और अभ्यर्थियों से रकम वसूलने से जुड़ी हो सकती है। गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है।
मिथिलेश सिंह भोजपुर के चरपोखरी थाना क्षेत्र के पसौर गांव का रहने वाला बताया जा रहा है। जांच में उसका नाम पहले गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ के दौरान सामने आने की बात कही गई है।
सीआईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा प्रक्रिया में उसकी कथित पहुंच कितनी थी और इस नेटवर्क में उसके साथ कौन-कौन लोग जुड़े हुए थे।
आयोग से उत्तरपुस्तिका निकलवाने का आरोप
जांच से जुड़े दावों के अनुसार, मिथिलेश सिंह की कथित पकड़ JPSC से जुड़ी व्यवस्था में थी। आरोप है कि वह आयोग कार्यालय से उत्तरपुस्तिकाएं या परीक्षा से संबंधित सामग्री निकलवाने में सक्षम था।
इसके बाद अभ्यर्थियों के साथ कथित तौर पर सेटिंग की जाती थी। आरोप है कि परीक्षा में लाभ पहुंचाने के बदले अभ्यर्थियों से लाखों रुपये लिए जाते थे।
हालांकि, इन आरोपों की पूरी पुष्टि जांच पूरी होने और अदालत में साक्ष्यों की समीक्षा के बाद ही होगी। फिलहाल सीआईडी गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ कर मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि परीक्षा प्रक्रिया के भीतर तक कथित नेटवर्क की पहुंच कैसे बनी और किन लोगों ने इसमें मदद की।
पूछताछ में सामने आया मिथिलेश सिंह का नाम
JPSC मामले में पहले गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ के दौरान मिथिलेश सिंह का नाम सामने आने की बात कही गई है। इसके बाद सीआईडी ने उसकी तलाश शुरू की और उसे दिल्ली से गिरफ्तार किया।
बताया जा रहा है कि जांच एजेंसी को उसके बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली थीं। इन्हीं जानकारियों के आधार पर उसकी भूमिका की जांच की गई।
स्थानीय स्तर पर मिथिलेश को सामान्य जीवन जीने वाले व्यक्ति के तौर पर जानने की बात सामने आई है। ग्रामीणों के मुताबिक, वह कभी-कभार गांव आता था और फिर वापस चला जाता था।
गिरफ्तारी की खबर सामने आने के बाद गांव में भी चर्चा तेज हो गई। जांच टीम के गांव पहुंचने की जानकारी भी सामने आई है।
परीक्षा कराने वाली कंपनी से भी जुड़ा नाम
जांच में मिथिलेश सिंह का नाम परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था आईसीएन इंडिया से भी जोड़े जाने की बात सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कंपनी के निदेशक मंडल में उसका नाम नहीं था, लेकिन उसके कथित संबंधों और भूमिका की जांच की जा रही है।
जांच एजेंसी यह भी खंगाल रही है कि परीक्षा संचालन से जुड़ी संस्थाओं और कथित बिचौलियों के बीच किस तरह संपर्क बना हुआ था।
मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि जांच में कथित तौर पर अलग-अलग राज्यों में परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों से जुड़े नेटवर्क की जानकारी सामने आई है। हालांकि, इन सभी दावों की पुष्टि जांच के अंतिम निष्कर्ष के बाद ही हो सकेगी।
24 अभ्यर्थियों से कथित सेटिंग की जांच
JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा को लेकर जांच में एक कथित नेटवर्क का भी पता चलने की बात कही गई है। जांच के अनुसार, गिरोह ने करीब 24 अभ्यर्थियों के साथ परीक्षा में मदद दिलाने की कथित डील की थी।
इनमें से 11 अभ्यर्थियों से कथित तौर पर करीब 1.10 करोड़ रुपये लिए जाने का दावा किया गया है। सीआईडी अब पैसों के लेनदेन, अभ्यर्थियों से संपर्क और परीक्षा प्रक्रिया में कथित हस्तक्षेप से जुड़े सबूतों की जांच कर रही है।
मिथिलेश सिंह की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी को इस कथित नेटवर्क की आर्थिक और संगठनात्मक कड़ियों के बारे में और जानकारी मिलने की उम्मीद है।
पहले भी जेल जा चुका है आरोपी
जांच से सामने आई जानकारी के अनुसार, मिथिलेश सिंह उर्फ आरके इससे पहले भी चार बार जेल जा चुका है। इसके अलावा बिहार के साथ राजस्थान, पंजाब और तेलंगाना में परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों के मामलों में उसकी कथित भूमिका की भी जांच किए जाने की बात सामने आई है।
यदि जांच में इन मामलों के बीच कोई सीधा संबंध साबित होता है, तो JPSC मामले का दायरा और बड़ा हो सकता है। सीआईडी अब आरोपी के पुराने मामलों, संपर्कों और कथित नेटवर्क की गतिविधियों को भी खंगाल सकती है।
गिरफ्तारी के बाद आगे क्या होगा?
मिथिलेश सिंह की गिरफ्तारी को JPSC मामले की जांच में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब सीआईडी उससे पूछताछ कर यह जानने की कोशिश करेगी कि कथित नेटवर्क में उसकी भूमिका क्या थी और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े किन लोगों से उसके संपर्क थे।
साथ ही, कथित तौर पर अभ्यर्थियों से लिए गए पैसों, उत्तरपुस्तिकाओं तक पहुंच और परीक्षा संचालन से जुड़े संपर्कों की भी जांच हो सकती है।
फिलहाल इस मामले में सबसे अहम बात यह है कि जांच अभी जारी है। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। लेकिन भोजपुर के एक व्यक्ति की गिरफ्तारी ने JPSC परीक्षा विवाद में बिहार कनेक्शन को जरूर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
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