JPSC परीक्षा गड़बड़ी में बड़ा खुलासा, ‘कट मनी डील’ से मचा हड़कंप
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👉 WhatsApp से जुड़ेंझारखंड में JPSC परीक्षा गड़बड़ी मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई गंभीर दावे सामने आ रहे हैं। JPSC परीक्षा गड़बड़ी मामले में गिरफ्तार मास्टरमाइंड अभय कुमार तिवारी ने पूछताछ के दौरान कथित तौर पर ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को परीक्षा का काम दिलाने के लिए ‘कट मनी डील’ होने की बात कबूल की है। इस दावे के बाद जांच का दायरा आयोग के तत्कालीन शीर्ष अधिकारियों की भूमिका तक पहुंच गया है। सीआईडी पूर्व चेयरमैन एल ख्यांगते से कई चरणों में पूछताछ कर चुकी है।
ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को काम देने का आरोप
सीआईडी की जांच में सामने आए दावों के मुताबिक, 14वीं झारखंड सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा से जुड़े संवेदनशील काम के लिए टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड यानी टीडीपीएल को जिम्मेदारी दी गई थी।
जांच एजेंसी के सामने मास्टरमाइंड अभय कुमार तिवारी ने कथित तौर पर दावा किया कि एजेंसी को काम दिलाने और उसके चयन में नियमों को दरकिनार करने के लिए शीर्ष स्तर पर आर्थिक लेनदेन हुआ था।
हालांकि, ये आरोप जांच का हिस्सा हैं। इन दावों की अंतिम पुष्टि अदालत में साक्ष्यों और आगे की जांच के आधार पर होगी।
परीक्षा नियंत्रक की आपत्ति के बावजूद चयन?
मामले में एक अहम बिंदु तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक की कथित लिखित आपत्ति को बताया जा रहा है।
जांच से जुड़े विवरणों के अनुसार, परीक्षा नियंत्रक ने टीडीपीएल के पूर्व रिकॉर्ड को लेकर आयोग के शीर्ष नेतृत्व को जानकारी दी थी। आपत्ति में एजेंसी के खिलाफ हुई पूर्व कार्रवाई का भी उल्लेख था।
बताया गया है कि झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने 20 मई 2025 को टीडीपीएल को अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन के मामले में ब्लैकलिस्ट और डी-लिस्ट किया था।
इसके अलावा एजेंसी के खिलाफ उत्तर प्रदेश समेत दूसरे राज्यों में भी परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं के आरोपों और कार्रवाई का उल्लेख सामने आया है।
बिना खुली निविदा के काम देने का दावा
सीआईडी की जांच में यह भी देखा जा रहा है कि टीडीपीएल को परीक्षा का काम किस प्रक्रिया के तहत दिया गया।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एजेंसी का चयन खुली निविदा के बजाय सीधे नॉमिनेशन के आधार पर किए जाने का आरोप है।
परीक्षा जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में एजेंसी के चयन को लेकर अब जांच एजेंसी संबंधित दस्तावेजों और अधिकारियों की भूमिका खंगाल रही है।
खास तौर पर यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि एजेंसी की पिछली कार्रवाई की जानकारी संबंधित अधिकारियों को कब और किस माध्यम से मिली थी।
पूर्व चेयरमैन एल ख्यांगते से 30 घंटे से ज्यादा पूछताछ
मामले में JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष और पूर्व मुख्य सचिव एल ख्यांगते से सीआईडी की पूछताछ महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
जांच एजेंसी की ओर से उन्हें अलग-अलग चरणों में आमने-सामने बैठाकर पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है। अब तक चार चरणों में उनसे 30 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ किए जाने की बात कही गई है।
पूछताछ के दौरान एजेंसी ने कथित तौर पर एजेंसी के चयन, प्रक्रिया, दस्तावेजों और तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका से जुड़े सवाल किए।
हालांकि, किसी व्यक्ति की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
पूर्व चेयरमैन ने क्या दिया जवाब?
पूछताछ के दौरान एल ख्यांगते ने अपने ऊपर लगे आरोपों का बचाव किया है।
उनका दावा है कि जब टीडीपीएल का चयन किया गया, उस समय आयोग को एजेंसी के ब्लैकलिस्टेड होने की आधिकारिक जानकारी नहीं थी।
उन्होंने इस स्थिति को एक ‘प्रशासनिक चूक’ बताया है। यानी उनका पक्ष यह है कि एजेंसी की स्थिति को लेकर संबंधित स्तर पर आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं थी।
अब सीआईडी यह जांच रही है कि एजेंसी के पुराने रिकॉर्ड और उस पर हुई कार्रवाई की जानकारी आयोग तक पहुंची थी या नहीं।
रांची और लखनऊ के कार्यालय सील
जांच को आगे बढ़ाते हुए सीआईडी ने टीडीपीएल के रांची और लखनऊ स्थित कार्यालयों को सील किया है।
इन कार्यालयों से परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य संभावित साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा से जुड़े कथित नेटवर्क का संचालन किस तरह किया जाता था और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।
डिजिटल डाटा और दस्तावेजों की जांच से कथित लेनदेन तथा परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े संपर्कों की कड़ियां सामने आने की उम्मीद है।
अब तक 19 आरोपी गिरफ्तार
मामले में सीआईडी की कार्रवाई लगातार जारी है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक अब तक 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
गिरफ्तार लोगों में उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह, कथित मास्टरमाइंड अभय तिवारी और पूर्व अध्यक्ष के कंप्यूटर ऑपरेटर समेत अन्य लोग शामिल हैं।
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर जांच एजेंसी कथित नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
वर्तमान JPSC सदस्यों से भी पूछताछ
सीआईडी ने जांच का दायरा केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं रखा है। आयोग के वर्तमान सदस्यों से भी पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है।
जांच एजेंसी यह समझने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी के दौरान कौन-कौन से अधिकारी और कर्मचारी फैसलों से जुड़े थे।
साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि परीक्षा से संबंधित संवेदनशील सूचनाओं और प्रक्रियाओं तक किन लोगों की पहुंच थी।
आगे क्या होगा?
JPSC परीक्षा गड़बड़ी मामले में अब जांच कई स्तरों पर आगे बढ़ रही है। एक तरफ कथित ‘कट मनी डील’ के दावे की जांच हो रही है, वहीं दूसरी ओर ब्लैकलिस्टेड एजेंसी के चयन की प्रक्रिया और अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल जारी है।
सीआईडी के सामने सबसे अहम सवाल यह है कि एजेंसी की पिछली कार्रवाई की जानकारी किस स्तर तक थी और इसके बावजूद उसे परीक्षा का काम कैसे मिला।
फिलहाल जांच में सामने आए आरोपों को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। सीआईडी की आगे की कार्रवाई, दस्तावेजी साक्ष्य और अदालत में होने वाली कानूनी प्रक्रिया से ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट होगी।
