PM मोदी के बयान पर मांझी का बड़ा समर्थन, बोले- दिमागी नक्सलवाद से बचें
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👉 WhatsApp से जुड़ेंकेंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सलवाद’ वाले बयान का समर्थन किया है। जीतन राम मांझी ने कहा कि हथियारों के जरिए चलने वाला नक्सलवाद काफी हद तक दब चुका है, लेकिन वैचारिक स्तर पर सक्रिय लोगों से देश को सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने खास तौर पर युवाओं और नई पीढ़ी से ऐसे प्रभावों को लेकर सावधान रहने की अपील की।
पटना में दिए बयान में मांझी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने देश के सामने एक महत्वपूर्ण चिंता रखी है। उनके मुताबिक, अब चुनौती केवल हथियारबंद गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि विचारधारा और मानसिक प्रभाव के स्तर पर भी सतर्कता जरूरी है।
हथियारबंद नक्सलवाद कमजोर, वैचारिक चुनौती पर जोर
जीतन राम मांझी ने कहा कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई के कारण हथियार वाले नक्सलवाद को काफी हद तक नियंत्रित किया गया है। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि वैचारिक स्तर पर कुछ ऐसे लोग अब भी सक्रिय हैं, जिनके प्रभाव से समाज और युवाओं को नुकसान पहुंच सकता है।
मांझी ने ऐसे लोगों को ‘दिमागी नक्सलाइट’ के संदर्भ में रखते हुए कहा कि देश को इनसे सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग विदेशी तंत्रों से प्रभावित होकर भारत में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर सकते हैं।
हालांकि, यह केंद्रीय मंत्री का राजनीतिक बयान है और इसमें लगाए गए आरोपों को संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए। मांझी ने अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से उठाई गई चिंता का समर्थन किया।
युवाओं और Gen-Z से सतर्क रहने की अपील
केंद्रीय मंत्री ने विशेष रूप से युवाओं से सावधान रहने की अपील की। उन्होंने Gen-Z और Gen-Z Alpha का उल्लेख करते हुए कहा कि नई पीढ़ी को किसी भी विचार या प्रभाव को स्वीकार करने से पहले उसके उद्देश्य और स्रोत को समझना चाहिए।
मांझी के मुताबिक, युवाओं को ऐसी विचारधाराओं से बचना चाहिए जो देश की स्थिरता और विकास के खिलाफ काम करती हों। उन्होंने कहा कि केवल युवा ही नहीं, बल्कि हर भारतीय को इस तरह की चुनौतियों के प्रति सजग रहना चाहिए।
उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में ‘दिमागी नक्सलियों’ का उल्लेख किया था। प्रधानमंत्री ने हथियारबंद नक्सलवाद के साथ-साथ वैचारिक स्तर पर मौजूद चुनौतियों को पहचानने की बात कही थी।
PM मोदी के बयान से जुड़ा राजनीतिक संदेश
प्रधानमंत्री के बयान के बाद बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के कई नेताओं ने इसे देश की आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता से जोड़कर समर्थन दिया है। जीतन राम मांझी का ताजा बयान भी इसी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा माना जा रहा है।
मांझी ने कहा कि देश को विकास के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए स्थिरता और सकारात्मक सोच की जरूरत है। उनका कहना है कि यदि युवाओं को किसी ऐसी विचारधारा से प्रभावित किया जाता है जो देश के हितों के खिलाफ हो, तो समाज को उसके प्रति सतर्क रहना चाहिए।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बदलते समय में देश के सामने सुरक्षा की चुनौतियां केवल पारंपरिक रूप में नहीं हैं। सोशल मीडिया, सूचना और विचारों के तेजी से प्रसार के दौर में युवाओं को किसी भी दावे की तथ्यात्मक जांच करने की जरूरत है।
नक्सलवाद पर बदलता फोकस
भारत में नक्सलवाद लंबे समय से आंतरिक सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मुद्दा रहा है। पिछले वर्षों में केंद्र और राज्य सरकारों ने सुरक्षा अभियानों, विकास योजनाओं और प्रशासनिक पहुंच के जरिए प्रभावित क्षेत्रों में नक्सली गतिविधियों को कम करने पर जोर दिया है।
जीतन राम मांझी के बयान में भी इसी बदलाव की ओर संकेत किया गया। उन्होंने कहा कि हथियारबंद नक्सली गतिविधियों के कमजोर पड़ने के बाद वैचारिक स्तर की चुनौतियों को लेकर सतर्कता जरूरी है।
इस बहस में ‘दिमागी नक्सलवाद’ जैसे शब्द को लेकर अलग-अलग राजनीतिक और वैचारिक मत सामने आ सकते हैं। इसलिए इस मुद्दे को समझते समय राजनीतिक दावों और प्रमाणित तथ्यों के बीच अंतर करना भी जरूरी है।
हर भारतीय से सजग रहने की अपील
मांझी ने अपने बयान में केवल युवाओं को ही नहीं, बल्कि पूरे देश को सतर्क रहने की बात कही। उन्होंने कहा कि देश की युवा आबादी भारत के भविष्य की सबसे बड़ी ताकत है और उसे किसी भी नकारात्मक प्रभाव से बचाना जरूरी है।
उनका संदेश मुख्य रूप से जागरूकता और सतर्कता पर केंद्रित रहा। केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि देश को ऐसे तत्वों से सावधान रहना चाहिए जो समाज में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर सकते हैं।
फिलहाल ‘दिमागी नक्सलवाद’ को लेकर राजनीतिक बहस तेज होती दिख रही है। आने वाले दिनों में विपक्षी दल इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं, इससे इस मुद्दे पर राजनीतिक चर्चा और आगे बढ़ सकती है।
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