हाजीपुर कोर्ट से लौट रही महिला दरोगा से मारपीट, 3 हिरासत में
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👉 WhatsApp से जुड़ेंवैशाली के हाजीपुर में महिला दरोगा से मारपीट का मामला सामने आने के बाद पुलिस और अधिवक्ता पक्ष के बीच तनाव की स्थिति बन गई है। महिला दरोगा से मारपीट के इस मामले में एक वकील समेत तीन लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। आरोप है कि पासवान चौक सब्जी मंडी के पास जाम हटाने को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद महिला सब-इंस्पेक्टर और उन्हें बचाने पहुंचे एक सिपाही के साथ हाथापाई की गई।
घटना के बाद महिला दरोगा नेहा कुमारी ने अपने थाना में आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ अभद्रता, मारपीट और वर्दी के साथ खींचतान की गई। उनका मोबाइल फोन भी कथित तौर पर छीन लिया गया।
वहीं, दूसरी तरफ आरोपी पक्ष ने भी महिला पुलिसकर्मी पर मारपीट का आरोप लगाया है। अधिवक्ता के समर्थन में कई वकील औद्योगिक थाना पहुंचे और हिरासत की कार्रवाई पर सवाल उठाए।
जाम हटाने को लेकर शुरू हुआ विवाद
मिली जानकारी के अनुसार, औद्योगिक थाना में तैनात सब-इंस्पेक्टर नेहा कुमारी कोर्ट ड्यूटी पूरी करने के बाद थाना लौट रही थीं। इसी दौरान वह पासवान चौक सब्जी बाजार के पास पहुंचीं।
वहां सड़क पर एक कार खड़ी होने के कारण यातायात प्रभावित था और जाम की स्थिति बन गई थी। ड्यूटी पर मौजूद महिला दरोगा ने कार चालक से वाहन आगे बढ़ाने के लिए कहा।
इसी बात को लेकर कार चालक और उसकी पत्नी के साथ महिला दरोगा की कहासुनी शुरू हो गई। आरोप है कि विवाद बढ़ने के बाद महिला पुलिस अधिकारी के साथ अभद्र व्यवहार किया गया और मारपीट की गई।
बताया गया कि घटना के दौरान महिला दरोगा की वर्दी के साथ भी खींचतान की गई। विवाद बढ़ता देखकर आसपास के लोगों की भीड़ जमा होने लगी।
बचाने पहुंचे सिपाही से भी मारपीट का आरोप
महिला दरोगा के साथ विवाद की जानकारी मिलने के बाद नगर थाना क्षेत्र से एक सिपाही मौके पर पहुंचा। उसने बीच-बचाव कर महिला अधिकारी को बचाने की कोशिश की।
आरोप है कि इस दौरान सिपाही के साथ भी हाथापाई की गई। महिला दरोगा का कहना है कि मौके पर मौजूद लोगों ने उनके साथ-साथ सिपाही के साथ भी मारपीट की।
स्थिति बिगड़ने पर महिला दरोगा ने अपने मोबाइल से थाना को सूचना देने की कोशिश की। आरोप है कि इसी दौरान उनका मोबाइल फोन छीन लिया गया।
इसके बाद उन्होंने किसी दूसरे फोन से पुलिस की गश्ती टीम को घटना की सूचना दी। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और मामले में तीन लोगों को हिरासत में लिया।
वकील के हिरासत में आने के बाद बढ़ा तनाव
हिरासत में लिए गए लोगों में एक अधिवक्ता का नाम भी सामने आया है। वकील को हिरासत में लिए जाने की जानकारी मिलने के बाद कई अधिवक्ता औद्योगिक थाना पहुंचे।
अधिवक्ताओं ने पुलिस से सवाल किया कि वकील को किस आधार पर हिरासत में लिया गया है। वकील के समर्थन में पहुंचे लोगों ने पुलिस कार्रवाई पर आपत्ति जताई और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
इस घटनाक्रम के बाद पुलिस और अधिवक्ता पक्ष के बीच तनाव की स्थिति बनने की बात सामने आई है। हालांकि, पुलिस की ओर से मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच की जा रही है।
महिला दरोगा ने दर्ज कराया आवेदन
महिला दरोगा नेहा कुमारी ने अपने साथ हुई घटना का उल्लेख करते हुए थाने में प्राथमिकी दर्ज करने के लिए आवेदन दिया है।
आवेदन में उन्होंने मारपीट, अभद्र व्यवहार, वर्दी के साथ खींचतान और मोबाइल फोन छीनने जैसे आरोप लगाए हैं। पुलिस अब आवेदन में लगाए गए आरोपों और मौके पर मौजूद लोगों से मिली जानकारी की जांच कर रही है।
मामले में CCTV फुटेज या अन्य तकनीकी साक्ष्य मिलने पर जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश करेगी कि विवाद की शुरुआत किस परिस्थिति में हुई और घटनाक्रम में कौन-कौन लोग शामिल थे।
आरोपी पक्ष ने भी लगाए पुलिस पर आरोप
दूसरी ओर, मामले में आरोपी बनाए जा रहे मनीष कुमार ने अलग पक्ष रखा है। उनका कहना है कि उनके सामने उनकी पत्नी और बच्चे के साथ मारपीट की गई।
वहीं, आरोपी अधिवक्ता के समर्थन में पहुंचे अन्य वकीलों का आरोप है कि उन्हें जानबूझकर मामले में फंसाया जा रहा है। अधिवक्ता पक्ष ने भी घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
इस तरह मामले में दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं। इसलिए पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटनाक्रम वास्तव में किस तरह शुरू हुआ और मारपीट की स्थिति कैसे बनी।
पुलिस जांच से साफ होगी पूरी तस्वीर
हाजीपुर की इस घटना ने सड़क पर मामूली विवाद के गंभीर रूप लेने और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
फिलहाल पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में लिया है और महिला दरोगा के आवेदन के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ रही है। दूसरी तरफ अधिवक्ता पक्ष की आपत्तियों को देखते हुए पुलिस के सामने जांच को निष्पक्ष और तथ्य आधारित रखने की चुनौती भी है।
घटना से जुड़े CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और दोनों पक्षों के आरोप जांच में अहम भूमिका निभा सकते हैं। पुलिस की कार्रवाई और जांच के बाद ही मामले की पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।
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