FCRA Amendment Bill 2026 JPC को भेजा गया, विदेशी फंडिंग पर बढ़ेगी निगरानी
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👉 WhatsApp से जुड़ेंलोकसभा ने FCRA Amendment Bill 2026 को आगे की जांच और व्यापक विचार-विमर्श के लिए संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC के पास भेज दिया है। यह विधेयक Foreign Contribution (Regulation) Act, 2010 में संशोधन से जुड़ा है। सरकार का कहना है कि प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य विदेशी योगदान के इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना है।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सदन में विधेयक को JPC के पास भेजने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि समिति दोनों सदनों के सदस्यों को शामिल करते हुए विधेयक के विभिन्न पहलुओं की विस्तार से समीक्षा करेगी।
FCRA Amendment Bill 2026 में क्या है प्रस्ताव?
FCRA Amendment Bill 2026 का मुख्य उद्देश्य भारत में मिलने वाले विदेशी योगदान के उपयोग को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। विदेशी फंड प्राप्त करने और उसका इस्तेमाल करने वाली संस्थाओं की गतिविधियों को लेकर नियमों को मजबूत करने की दिशा में यह विधेयक महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सरकार के अनुसार, विदेशी योगदान से जुड़ी व्यवस्था में स्पष्टता जरूरी है, ताकि उपलब्ध धन का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप हो और उससे संबंधित जवाबदेही तय की जा सके।
विधेयक को सीधे पारित कराने के बजाय JPC को भेजने का फैसला व्यापक चर्चा का अवसर देगा। समिति विधेयक के प्रावधानों की समीक्षा करने के साथ विभिन्न पक्षों से सुझाव भी ले सकती है।
31 सदस्यों वाली होगी संयुक्त संसदीय समिति
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि प्रस्तावित संयुक्त संसदीय समिति में कुल 31 सदस्य होंगे। इनमें लोकसभा से 21 और राज्यसभा से 10 सदस्य शामिल किए जाएंगे।
लोकसभा के 21 सदस्यों का नामांकन लोकसभा अध्यक्ष करेंगे, जबकि राज्यसभा के 10 सदस्यों का चयन सभापति द्वारा किया जाएगा। इस तरह दोनों सदनों की भागीदारी से विधेयक पर विस्तृत विचार किया जाएगा।
JPC को विभिन्न प्रावधानों की जांच करने और व्यापक विचार-विमर्श के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार करनी होगी। इससे विधेयक पर सांसदों के साथ-साथ संबंधित पक्षों के विचारों को भी शामिल करने का रास्ता खुलेगा।
शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह में देनी होगी रिपोर्ट
सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, संयुक्त संसदीय समिति को अपनी रिपोर्ट शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक लोकसभा में पेश करनी होगी।
इस समयसीमा के कारण समिति को विधेयक की समीक्षा के लिए निर्धारित अवधि में अपनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। रिपोर्ट आने के बाद विधेयक पर संसद में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
FCRA यानी विदेशी अंशदान विनियमन कानून विदेशी स्रोतों से मिलने वाले योगदान को नियंत्रित करने वाली महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था है। ऐसे में इसमें प्रस्तावित संशोधन का असर उन संस्थाओं पर पड़ सकता है जो नियमानुसार विदेशी योगदान प्राप्त करती हैं।
JPC में भेजे जाने के बाद अब विधेयक पर विस्तृत संसदीय समीक्षा होगी। समिति की रिपोर्ट और उसमें दिए गए सुझावों के आधार पर आगे की विधायी प्रक्रिया तय की जाएगी। इससे विदेशी योगदान से जुड़े नियमों में प्रस्तावित बदलावों को लेकर संसद में विस्तृत चर्चा का रास्ता भी खुल गया है।
