CBI का बड़ा खुलासा! शुभेंदु अधिकारी के PA हत्याकांड में दो मुख्य साजिशकर्ता गिरफ्तार
शुभेंदु अधिकारी PA हत्याकांड में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को बड़ी सफलता मिली है। शुभेंदु अधिकारी PA हत्याकांड की जांच कर रही एजेंसी ने दो कथित मुख्य साजिशकर्ताओं को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के अनुसार दोनों आरोपी सगे भाई हैं और हत्या की साजिश रचने में उनकी अहम भूमिका सामने आई है। CBI का दावा है कि जांच के दौरान डिजिटल सबूत और कॉल रिकॉर्ड जैसे महत्वपूर्ण साक्ष्य भी मिले हैं। हालांकि, एजेंसी ने अभी इस मामले में किसी राजनीतिक दल के खिलाफ आधिकारिक आरोप तय नहीं किए हैं और जांच जारी है।
यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़ा होने के कारण पहले से ही काफी चर्चा में रहा है। अब नई गिरफ्तारियों के बाद जांच ने एक नया मोड़ ले लिया है।
कौन हैं गिरफ्तार किए गए आरोपी?
CBI के मुताबिक गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी सागर सोनकर और साहिब सोनकर सगे भाई हैं।
एजेंसी का कहना है कि दोनों पर हत्या की साजिश रचने का आरोप है। जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों पहले चंद्रनाथ रथ के साथ काम कर चुके थे।
सूत्रों के अनुसार, हत्या को अंजाम देने वाले आरोपियों की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी थी, जबकि कथित साजिशकर्ता अब तक फरार थे।
जांच में क्या-क्या सामने आया?
CBI सूत्रों के अनुसार, जांच में कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), मोबाइल डेटा और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया।
एजेंसी का दावा है कि आरोपियों के कुछ राजनीतिक पदाधिकारियों के साथ संपर्क होने के संकेत मिले हैं। हालांकि, CBI ने सार्वजनिक रूप से किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति के खिलाफ आधिकारिक आरोप की घोषणा नहीं की है।
सूत्रों के मुताबिक, हत्या की कथित सुपारी कई करोड़ रुपये की बताई जा रही है और इसकी योजना वर्ष 2025 के दिसंबर महीने में बनाई गई थी।
6 मई को कैसे हुई थी चंद्रनाथ रथ की हत्या?
6 मई 2026 की रात चंद्रनाथ रथ अपनी महिंद्रा स्कॉर्पियो से घर लौट रहे थे।
जैसे ही उनकी गाड़ी उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम थाना क्षेत्र स्थित दोहरिया शैलेश नगर पहुंची, एक सिल्वर रंग की कार ने उनका रास्ता रोक दिया।
इसके बाद दो मोटरसाइकिलों पर आए चार हमलावरों ने बेहद करीब से ताबड़तोड़ फायरिंग की और मौके से फरार हो गए।
राज्य पुलिस के अनुसार, रथ को तीन गोलियां लगी थीं, जिनमें सिर पर लगी गोली जानलेवा साबित हुई।
UPI ट्रांजैक्शन बना जांच का अहम सुराग
हत्या के बाद जांच एजेंसियों ने घटनास्थल और आरोपियों की गतिविधियों से जुड़े डिजिटल साक्ष्य जुटाए।
जांच में एक टोल प्लाजा पर कथित तौर पर किए गए UPI भुगतान का रिकॉर्ड मिला, जिसे महत्वपूर्ण सुराग माना गया।
इसी आधार पर पहले बिहार और उत्तर प्रदेश से तीन आरोपियों—राज मिश्रा, विक्की मौर्य और राज सिंह—को गिरफ्तार किया गया था।
राज मिश्रा और विक्की मौर्य को बिहार के बक्सर से, जबकि राज सिंह को उत्तर प्रदेश के बलिया से पकड़ा गया था।
CBI पहले भी कर चुकी है कई गिरफ्तारियां
राज्य सरकार द्वारा मामला CBI को सौंपे जाने के बाद एजेंसी ने जांच तेज कर दी।
अब तक इस हत्याकांड में 11 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके अलावा बलिया के हिस्ट्रीशीटर ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह को भी CBI ने गिरफ्तार किया था, जो उस समय मऊ जेल में बंद था।
एजेंसी ने हत्या, आपराधिक साजिश, संगठित अपराध, गलत तरीके से रास्ता रोकने और आर्म्स एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है।
FIR में क्या कहा गया है?
CBI की FIR के अनुसार, यह मामला चंद्रनाथ रथ के भाई सौमेन रथ की शिकायत पर दर्ज किया गया।
शिकायत में कहा गया कि हथियारबंद हमलावरों ने योजनाबद्ध तरीके से उनकी गाड़ी को रोका और आधुनिक हथियारों से बेहद करीब से फायरिंग की।
घायल अवस्था में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। शिकायत में इस पूरे हमले को सुनियोजित आपराधिक साजिश बताया गया है।
अब जांच किस दिशा में बढ़ेगी?
नई गिरफ्तारियों के बाद CBI अब कथित साजिश के पूरे नेटवर्क और संभावित आर्थिक लेन-देन की जांच कर रही है।
एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हत्या की योजना में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा कथित सुपारी की रकम का स्रोत क्या था।
मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में एजेंसी की ओर से और खुलासे सामने आ सकते हैं।
