'शराबबंदी पर समझौता नहीं', मदन सहनी के बयान से बढ़ी सम्राट सरकार की टेंशन?
📌 पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ताज़ा ख़बरें सीधे अपने मोबाइल पर पाएं!
👉 WhatsApp से जुड़ें
पटना: बिहार में शराबबंदी को लेकर सियासी बहस लगातार तेज है। बिहार शराबबंदी पर विपक्ष और जन सुराज पार्टी की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं एनडीए के सहयोगी दल के नेता जीतन राम मांझी भी कानून की समीक्षा की मांग कर चुके हैं। इसी बीच नीतीश कुमार की जेडीयू के वरिष्ठ नेता और बिहार सरकार में मद्य निषेध एवं उत्पाद मंत्री मदन सहनी ने सरकार का रुख स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने कहा कि बिहार शराबबंदी कानून के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा और इसे पूरी सख्ती से लागू किया जाता रहेगा।
शराबबंदी कानून पर मदन सहनी का दो टूक संदेश
जदयू प्रदेश कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम के बाद मदन सहनी ने शराबबंदी को लेकर सरकार की नीति साफ की। उन्होंने कहा कि बिहार में शराबबंदी का फैसला तत्कालीन मुख्यमंत्री और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने सभी राजनीतिक दलों की सहमति और सहयोग से लिया था। मंत्री के मुताबिक, यह फैसला केवल किसी एक दल या सरकार का निर्णय नहीं था। उन्होंने कहा कि शराबबंदी कानून को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और इसके क्रियान्वयन में आगे भी किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। मदन सहनी ने यह भी कहा कि नीतीश कुमार ने सरकार में रहते हुए शराबबंदी को लेकर जो नीति बनाई थी, उसे आगे भी जारी रखा जाएगा। उनके बयान से साफ संकेत मिलता है कि फिलहाल सरकार कानून में नरमी या बड़े बदलाव के पक्ष में नहीं है।
तेजस्वी और प्रशांत किशोर उठा रहे सवाल
बिहार में शराबबंदी को लेकर राजनीतिक बहस भी लगातार चल रही है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और जन सुराज पार्टी के विधायक प्रशांत किशोर शराबबंदी को प्रभावी नहीं मानते हुए सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं। दोनों नेताओं की ओर से यह मुद्दा अलग-अलग मौकों पर उठाया गया है। विपक्ष का तर्क रहा है कि कानून लागू होने के बावजूद राज्य में अवैध शराब की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। वहीं, एनडीए के सहयोगी दल के नेता और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी भी शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग करते रहे हैं। ऐसे राजनीतिक माहौल के बीच मदन सहनी का बयान सरकार की मौजूदा नीति को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
‘गरीब, मजदूर और महिलाओं को मिला लाभ’
मदन सहनी ने शराबबंदी के सामाजिक प्रभाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस कानून का सबसे ज्यादा लाभ गरीबों, मजदूरों और राज्य की महिलाओं को मिला है। सरकार का मानना है कि शराब पर रोक से कई परिवारों की आर्थिक स्थिति और घरेलू माहौल में सुधार हुआ है। इसी आधार पर सरकार शराबबंदी को सामाजिक कल्याण से जोड़कर देखती है। मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बिहार में शराबबंदी कानून के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होगा। इसे भविष्य में भी सख्ती से लागू करने की नीति जारी रहेगी।
शराब मिलने पर कंपनी के खिलाफ भी होगी कार्रवाई
मदन सहनी ने शराब की बरामदगी से जुड़े मामलों में कंपनियों की जिम्मेदारी को लेकर भी बड़ा निर्देश बताया। उन्होंने कहा कि अगर बिहार में किसी कंपनी की शराब जब्त होती है तो संबंधित कंपनी के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में संबंधित कंपनी के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। सरकार का यह रुख शराब की अवैध सप्लाई और तस्करी पर रोक लगाने की दिशा में सख्ती का संकेत देता है। इस बयान के बाद यह भी साफ हो गया है कि सरकार केवल शराब बेचने या पहुंचाने वाले लोगों पर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहती। शराब की सप्लाई चेन से जुड़े अन्य पक्षों पर भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सम्राट सरकार के लिए आगे की राह क्या?
बिहार में शराबबंदी को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों के रुख के बीच अब सबकी नजर सरकार के अगले कदम पर है। एक ओर विपक्ष कानून की प्रभावशीलता पर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी ओर एनडीए के भीतर से भी इसकी समीक्षा की आवाज सामने आई है। हालांकि, मदन सहनी के ताजा बयान से सरकार की मौजूदा दिशा स्पष्ट दिखाई देती है। फिलहाल शराबबंदी कानून में समझौते के बजाय इसके सख्त क्रियान्वयन पर जोर दिया जा रहा है। आने वाले समय में सरकार अवैध शराब की बिक्री, तस्करी और सप्लाई नेटवर्क पर कार्रवाई को किस तरह तेज करती है, यह महत्वपूर्ण होगा। साथ ही राजनीतिक दलों की ओर से शराबबंदी को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर सरकार का जवाब भी चर्चा में रहेगा।
लोक कल्याणकारी योजनाओं पर भी जोर
जनसुनवाई कार्यक्रम में समाज कल्याण मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता ने भी सरकार की प्राथमिकताओं पर बात की। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में एनडीए सरकार का लक्ष्य लोक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि जरूरतमंद लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार की कोशिश है कि योजनाओं का फायदा सही लाभार्थियों तक पहुंचे और इसका असर जमीन पर दिखाई दे। कुल मिलाकर, बिहार में शराबबंदी को लेकर राजनीतिक बहस भले ही जारी हो, लेकिन मदन सहनी ने सरकार की वर्तमान नीति पर कोई अस्पष्टता नहीं छोड़ी है। उनका संदेश साफ है कि शराबबंदी कानून में फिलहाल किसी समझौते की गुंजाइश नहीं है।