बिहार की पंचायतों में बड़ा बदलाव, 15 अगस्त तक चलेगा पंच सम्मेलन
पटना: बिहार में ग्रामीण विकास को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। सरकार ने VB-GIRAMJI योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और पंचायत स्तर पर पारदर्शिता बढ़ाने के लिए विशेष अभियान शुरू करने का फैसला किया है। VB-GIRAMJI योजना के तहत जिलेवार पंच सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे, जिनमें मुखिया, वार्ड सदस्य, पंच और प्रशासनिक अधिकारी शामिल होंगे। यह प्रदेशव्यापी जागरूकता अभियान 15 अगस्त तक बिहार की सभी ग्राम पंचायतों में चलाया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य पंचायत प्रतिनिधियों को नई व्यवस्था की जानकारी देना और उन्हें स्थानीय जरूरतों के आधार पर बेहतर विकास योजनाएं तैयार करने में सक्षम बनाना है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन पर जोर दिया जाएगा।
15 अगस्त तक सभी पंचायतों में होंगे सम्मेलन
ग्रामीण विकास विभाग और सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री श्रवण कुमार के अनुसार, पंच सम्मेलन का आयोजन पंचायत स्तर पर जागरूकता बढ़ाने के लिए किया जा रहा है।
इन कार्यक्रमों में त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ संबंधित अधिकारी भी हिस्सा लेंगे। खास तौर पर मुखिया, वार्ड सदस्य और पंचों को नई योजना की कार्यप्रणाली समझाई जाएगी।
सरकार चाहती है कि पंचायतों में विकास योजनाएं केवल सामान्य अनुमान के आधार पर तैयार न हों। इसके बजाय स्थानीय जरूरतों और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर योजनाओं का चयन किया जाए।
पुरानी मनरेगा और नई योजना में क्या अंतर?
पंच सम्मेलनों का एक प्रमुख उद्देश्य पुरानी मनरेगा व्यवस्था और 1 जुलाई 2026 से लागू विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण (VB-GIRAMJI) के बीच अंतर को स्पष्ट करना है।
पंचायत प्रतिनिधियों और अधिकारियों को बताया जाएगा कि नई व्यवस्था में विकास कार्यों को अधिक परिणाम आधारित बनाने पर जोर दिया गया है।
इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक जरूरतों को पहचानकर ऐसी योजनाएं तैयार करने की बात कही गई है, जिनका सीधा लाभ स्थानीय लोगों को मिल सके।
सरकार के अनुसार, पंचायत स्तर पर योजना निर्माण की प्रक्रिया में स्थानीय जरूरतों, उपलब्ध संसाधनों और प्रमाण आधारित आंकड़ों को महत्व दिया जाएगा।
सिर्फ रोजगार नहीं, ग्रामीण विकास पर भी फोकस
मंत्री श्रवण कुमार ने योजना को केवल रोजगार उपलब्ध कराने वाली व्यवस्था तक सीमित नहीं बताया। उनके अनुसार, यह कार्यक्रम विकसित भारत-2047 के लक्ष्य से जुड़ा व्यापक ग्रामीण विकास अभियान है।
योजना में रोजगार के साथ ऐसी परिसंपत्तियों के निर्माण पर जोर दिया गया है, जो लंबे समय तक ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकें।
नई व्यवस्था में विकास कार्यों को चार प्रमुख श्रेणियों में बांटने की बात कही गई है। इससे पंचायतों को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में योजनाएं तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
चार प्रमुख क्षेत्रों में होंगे विकास कार्य
1. जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन:
पानी बचाने और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल से जुड़े कार्यों पर जोर दिया जाएगा।
2. टिकाऊ ग्रामीण अवसंरचना:
गांवों में मजबूत और लंबे समय तक उपयोगी बुनियादी ढांचे के निर्माण को प्राथमिकता दी जाएगी।
3. आजीविका और उत्पादक परिसंपत्तियां:
ऐसी परिसंपत्तियों के निर्माण पर ध्यान रहेगा, जो ग्रामीणों की आय और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद करें।
4. हरित विकास और जलवायु संरक्षण:
जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने तथा पर्यावरण अनुकूल विकास को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
डिजिटल तकनीक से बढ़ेगी पारदर्शिता
नई व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल को भी महत्वपूर्ण माना गया है। सरकार का लक्ष्य कार्यों की निगरानी से लेकर मजदूरी भुगतान तक की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है।
इसके लिए कार्यस्थलों पर बायोमीट्रिक और चेहरे के सत्यापन जैसी तकनीक का इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है। इससे उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय बनाने का प्रयास होगा।
रियल-टाइम डिजिटल उपस्थिति और निगरानी व्यवस्था के जरिए काम की स्थिति पर नजर रखने में मदद मिलेगी। साथ ही मजदूरी भुगतान को डिजिटल माध्यम से पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया है।
शिकायतों के समाधान पर भी जोर
योजना के तहत ग्रामीणों और लाभार्थियों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए मजबूत शिकायत निवारण व्यवस्था विकसित करने की बात कही गई है।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना से जुड़ी किसी समस्या की स्थिति में संबंधित व्यक्ति अपनी शिकायत दर्ज करा सके और उसके समाधान की प्रक्रिया पर निगरानी रखी जा सके।
सरकार के अनुसार, तकनीक आधारित निगरानी, डिजिटल भुगतान और शिकायत निवारण व्यवस्था से पंचायत स्तर पर जवाबदेही बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
पंचायतों को मजबूत बनाने का लक्ष्य
पंच सम्मेलन के जरिए सरकार पंचायत प्रतिनिधियों को नई योजना की जिम्मेदारियों और प्रक्रियाओं से परिचित कराना चाहती है। इसमें निर्वाचित प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर रहेगा।
‘सशक्त पंचायत से विकसित बिहार’ के संकल्प के साथ इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीण विकास की योजनाओं को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना है।
यदि पंचायतें स्थानीय जरूरतों के अनुसार साक्ष्य आधारित योजनाएं तैयार करती हैं और डिजिटल निगरानी व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं की गुणवत्ता और पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
आने वाले दिनों में पंच सम्मेलनों के जरिए पंचायत प्रतिनिधियों को योजना के अलग-अलग प्रावधानों की जानकारी दी जाएगी। 15 अगस्त तक चलने वाला यह अभियान बिहार की सभी ग्राम पंचायतों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
