SC-ST सब-कोटा पर बिहार NDA में बढ़ी तकरार, मांझी-चिराग आमने-सामने

📌 पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ताज़ा ख़बरें सीधे अपने मोबाइल पर पाएं!

👉 WhatsApp से जुड़ें


 

बिहार की राजनीति में SC-ST सब-कोटा का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। SC-ST सब-कोटा को लेकर बिहार NDA के दो प्रमुख सहयोगी दलों के बीच खुला मतभेद सामने आया है। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के अध्यक्ष और बिहार सरकार में मंत्री संतोष कुमार सुमन ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण का समर्थन किया है। वहीं केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने इसका विरोध जताते हुए इसे आरक्षण व्यवस्था के लिए खतरा बताया है।

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब बिहार में सामाजिक न्याय, प्रतिनिधित्व और आरक्षण के लाभ के वास्तविक वितरण पर नई बहस शुरू हो गई है। राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे को आगामी चुनावी समीकरणों से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

संतोष सुमन ने क्यों किया सब-कोटा का समर्थन?

संतोष कुमार सुमन का कहना है कि आरक्षण की समीक्षा का अर्थ इसे समाप्त करना नहीं है। उनके अनुसार, इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आरक्षण का लाभ उन समुदायों तक भी पहुंचे जो दशकों बाद भी सामाजिक और आर्थिक रूप से पीछे हैं।

उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के भीतर कई ऐसे समुदाय हैं जिन्हें शिक्षा, सरकारी नौकरियों और प्रशासनिक प्रतिनिधित्व में अपेक्षित लाभ नहीं मिला है। ऐसे में यह देखना जरूरी है कि आरक्षण का लाभ किन समूहों तक अधिक पहुंचा और कौन अब भी पीछे रह गया।

सुमन ने यह भी कहा कि सामाजिक न्याय की भावना तभी पूरी होगी जब सबसे कमजोर वर्गों तक अवसर पहुंचेंगे। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का भी उल्लेख किया जिसमें राज्यों को SC-ST वर्गों के भीतर उप-वर्गीकरण करने की अनुमति दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बढ़ी चर्चा

1 अगस्त 2024 को सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। इस फैसले में राज्यों को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्गों के भीतर उप-वर्गीकरण करने की अनुमति दी गई थी।

इसका उद्देश्य यह था कि आरक्षण का लाभ उन समुदायों तक पहुंचे जो इन वर्गों के भीतर भी अपेक्षाकृत अधिक पिछड़े हैं। आम भाषा में इसे “कोटे के भीतर कोटा” कहा जाता है।

इसी फैसले के बाद कई राज्यों में इस विषय पर चर्चा तेज हुई है और बिहार भी इससे अछूता नहीं है।

मुसहर समुदाय का उदाहरण देकर उठाए सवाल

HAM (S) के नेताओं का तर्क है कि आरक्षण व्यवस्था का लाभ कुछ बड़े समूहों तक अधिक केंद्रित रहा है। पार्टी प्रवक्ता दानिश रिजवान ने सवाल उठाया कि बिहार के मुसहर समुदाय से अब तक कोई IAS अधिकारी क्यों नहीं बन पाया।

उन्होंने कहा कि महादलित वर्ग के गठन के बावजूद कई समुदायों की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। बिहार में वर्ष 2008 में 22 अनुसूचित जाति समूहों में से 18 को महादलित श्रेणी में शामिल किया गया था, लेकिन इसके बाद भी कई समूह शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में पीछे बने हुए हैं।

मांझी परिवार स्वयं मुसहर समुदाय से आता है। यही वजह है कि HAM (S) लगातार सबसे वंचित वर्गों को आरक्षण का अधिक लाभ दिलाने की मांग करती रही है।

चिराग पासवान ने जताया कड़ा विरोध

दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने आरक्षण में किसी भी तरह की समीक्षा या उप-वर्गीकरण के विचार का विरोध किया है।

पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि जो लोग आरक्षण की समीक्षा की बात करते हैं, वे अप्रत्यक्ष रूप से आरक्षण व्यवस्था को कमजोर करना चाहते हैं। उनके अनुसार, समीक्षा की मांग भविष्य में आरक्षण के दायरे को सीमित करने की दिशा में पहला कदम साबित हो सकती है।

चिराग ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी आरक्षण के मौजूदा स्वरूप को बनाए रखने के पक्ष में है और किसी भी ऐसे प्रयास का विरोध करेगी जिससे आरक्षण की मूल भावना प्रभावित हो।

NDA के भीतर मतभेद का क्या असर पड़ सकता है?

SC-ST सब-कोटा का मुद्दा अब केवल सामाजिक न्याय की बहस तक सीमित नहीं रह गया है। बिहार NDA के दो सहयोगी दलों के अलग-अलग रुख ने इसे राजनीतिक महत्व भी दे दिया है।

एक ओर HAM (S) आरक्षण के लाभ को सबसे वंचित समुदायों तक पहुंचाने की बात कर रही है, वहीं LJP (RV) इसे आरक्षण व्यवस्था के लिए संभावित खतरे के रूप में देख रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा बिहार की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है, क्योंकि यह सीधे सामाजिक प्रतिनिधित्व और आरक्षण के वितरण से जुड़ा हुआ है।

आगे क्या?

फिलहाल SC-ST सब-कोटा पर बिहार NDA के भीतर एकमत स्थिति नहीं दिख रही है। हालांकि दोनों दल सामाजिक न्याय और आरक्षण के समर्थन की बात करते हैं, लेकिन इसके स्वरूप और क्रियान्वयन को लेकर उनकी राय अलग-अलग है।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों का रुख किस दिशा में जाता है और क्या बिहार में आरक्षण व्यवस्था को लेकर नई बहस आकार लेती है।


#BiharPolitics #Reservation #SCSTSubQuota #ChiragPaswan #SantoshSuman

🛍️ ऑनलाइन शॉपिंग करें
Amazon, Flipkart, Myntra और AJIO पर खरीदारी करें
यहाँ से खरीदारी करने पे एक्स्ट्रा डिस्काउंट मिल सकता है।
Next Post Previous Post
"ताज़ा ख़बरें पाएं"
1