बिहार में जमीन रजिस्ट्री का नया नियम लागू! अब घर बैठे होगी रजिस्ट्री, जानिए पूरा ऑनलाइन प्रोसेस

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Bihar Land Registry Rules को लेकर बिहार सरकार ने बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है। Bihar Land Registry Rules के तहत 17 अगस्त से जमीन, मकान, फ्लैट और दुकान की रजिस्ट्री की प्रक्रिया पहले से अधिक डिजिटल और पेपरलेस हो जाएगी। नई व्यवस्था का उद्देश्य लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर से राहत देना, पारदर्शिता बढ़ाना और रजिस्ट्री प्रक्रिया को तेज बनाना है। खास बात यह है कि 75 वर्ष या उससे अधिक उम्र के नागरिकों को घर बैठे रजिस्ट्री कराने की सुविधा भी मिलेगी।

सरकार का दावा है कि इस नई प्रणाली से भूमि निबंधन प्रक्रिया अधिक सुरक्षित, समयबद्ध और नागरिक-केंद्रित बनेगी। डिजिटल तकनीक और ऑनलाइन सत्यापन के जरिए जमीन से जुड़ी जानकारी को बेहतर तरीके से उपलब्ध कराया जाएगा।

क्या है बिहार की नई पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था?

बिहार में अब जमीन और मकान की रजिस्ट्री के लिए बड़ी मात्रा में कागजी दस्तावेज जमा कराने की आवश्यकता कम हो जाएगी। नई व्यवस्था के तहत डीड तैयार करने से लेकर स्टांप शुल्क भुगतान तक अधिकांश प्रक्रियाएं ऑनलाइन होंगी।

रजिस्ट्री पूरी होने के बाद संबंधित व्यक्ति को डिजिटल डीड की कॉपी ई-मेल या व्हाट्सएप के माध्यम से भेजी जा सकेगी। इससे दस्तावेज प्राप्त करने के लिए बार-बार कार्यालय जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

सरकार का मानना है कि डिजिटल रिकॉर्ड से दस्तावेजों की सुरक्षा भी बढ़ेगी और भविष्य में रिकॉर्ड खोजने में आसानी होगी।

घर बैठे कैसे होगी जमीन और मकान की रजिस्ट्री?

नई व्यवस्था में वरिष्ठ नागरिकों को विशेष सुविधा दी गई है। 75 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोग अपने घर से ही रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे।

इसके लिए सबसे पहले ई-निबंधन पोर्टल पर आवेदन और अपॉइंटमेंट बुक करना होगा। आवेदन मिलने के बाद संबंधित अधिकारी उम्र और दस्तावेजों का सत्यापन करेंगे।

सभी जानकारी सही पाए जाने पर तय तारीख पर निबंधन विभाग की टीम आवश्यक उपकरणों के साथ आवेदक के घर पहुंचेगी। वहीं पर रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

रजिस्ट्री पूरी होने के बाद प्रॉपर्टी डीड की पीडीएफ कॉपी आवेदक के पंजीकृत मोबाइल नंबर और ई-मेल पर उपलब्ध कराई जाएगी।

डिजिटल वेरिफिकेशन से कैसे काम करेगी नई प्रणाली?

नई व्यवस्था में खरीदार और विक्रेता दोनों को ई-निबंधन पोर्टल पर अपनी जानकारी दर्ज करनी होगी। जमीन से संबंधित विवरण भरने के बाद सिस्टम स्वतः डीड का प्रारूप तैयार करेगा।

पहचान सत्यापन के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन का उपयोग किया जाएगा। इससे फर्जी पहचान और दस्तावेजों के इस्तेमाल की संभावना कम हो सकती है।

स्टांप शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस का भुगतान भी डिजिटल माध्यम से किया जाएगा। इससे नकद लेन-देन कम होगा और भुगतान का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा।

हालांकि कुछ मामलों में अंतिम पहचान सत्यापन के लिए निर्धारित तिथि पर संबंधित कार्यालय जाना पड़ सकता है।

GIS तकनीक से क्या होगा फायदा?

नई प्रणाली में GIS (Geographic Information System) तकनीक का भी उपयोग किया जाएगा। इसके माध्यम से जमीन की लोकेशन और उससे जुड़ी डिजिटल जानकारी को तकनीकी रूप से जोड़ा जाएगा।

इससे खरीदार को संबंधित भूमि की जानकारी अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित रूप में मिल सकेगी। जमीन की स्थिति, रिकॉर्ड और अन्य विवरणों तक पहुंच आसान होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मैपिंग और ऑनलाइन रिकॉर्ड से गलत जानकारी के आधार पर होने वाले लेन-देन में कमी आ सकती है।

इसके साथ ही भूमि विवादों को कम करने में भी यह तकनीक मददगार साबित हो सकती है।

नई व्यवस्था से आम लोगों को क्या लाभ मिलेगा?

नई डिजिटल प्रणाली से रजिस्ट्री प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज और सुविधाजनक हो सकती है। लोगों को दस्तावेज जमा करने और जानकारी प्राप्त करने के लिए कम समय खर्च करना पड़ेगा।

ऑनलाइन भुगतान और डिजिटल रिकॉर्ड के कारण पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है। इससे प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप भी कम हो सकता है।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए घर पर रजिस्ट्री सुविधा एक बड़ी राहत मानी जा रही है। इससे उन्हें लंबी दूरी तय कर सरकारी कार्यालय जाने की आवश्यकता नहीं होगी।

सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य केवल ऑनलाइन सुविधा देना नहीं है, बल्कि पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना भी है।

रजिस्ट्री कराने से पहले किन बातों का रखें ध्यान?

  • ई-निबंधन पोर्टल पर सही जानकारी दर्ज करें।
  • आधार और अन्य आवश्यक दस्तावेज अपडेट रखें।
  • स्टांप शुल्क एवं रजिस्ट्रेशन फीस समय पर जमा करें।
  • मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी सही दर्ज करें ताकि डिजिटल डीड प्राप्त हो सके।
  • जमीन के रिकॉर्ड और स्वामित्व की जानकारी पहले से सत्यापित कर लें।

बिहार में 17 अगस्त से लागू होने वाली यह नई व्यवस्था राज्य की भूमि निबंधन प्रणाली में बड़ा बदलाव मानी जा रही है। यदि यह योजना प्रभावी तरीके से लागू होती है तो लाखों लोगों को रजिस्ट्री प्रक्रिया में समय और संसाधनों की बचत हो सकती है।


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