बिहार कांग्रेस में बगावत की आहट! 8 सितंबर को दिल्ली में होगा शक्ति प्रदर्शन

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बिहार कांग्रेस में विधानसभा चुनाव के खराब प्रदर्शन के बाद संगठन के भीतर असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। बिहार कांग्रेस के कुछ असंतुष्ट नेता और कार्यकर्ता अपनी शिकायतें लेकर पटना से दिल्ली तक जाने की तैयारी में हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 8 सितंबर को नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन के बाहर धरना और प्रदर्शन प्रस्तावित है। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग बिहार कांग्रेस के प्रभारी महासचिव कृष्णा अल्लावरू और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश कुमार को पद से हटाने की है।

प्रदर्शन को लेकर पार्टी के भीतर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। हालांकि, इसे अभी पार्टी से अलग होने या औपचारिक बगावत की घोषणा के तौर पर नहीं देखा जा सकता। असंतुष्ट नेता इसे संगठन में सुधार और अपनी शिकायतें शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाने की कोशिश बता रहे हैं।

चुनावी हार के बाद क्यों बढ़ा असंतोष?

बिहार कांग्रेस के भीतर मौजूदा नाराजगी की बड़ी वजह विधानसभा चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन माना जा रहा है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 2025 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सिर्फ 6 सीटों पर जीत हासिल कर सकी। इसके मुकाबले 2020 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 19 सीटें जीती थीं।

पांच साल के अंतराल में सीटों की यह बड़ी गिरावट पार्टी के भीतर नेतृत्व और चुनावी रणनीति को लेकर सवालों का कारण बनी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश कुमार भी चुनाव हार गए।

इसके बाद प्रदेश संगठन की कार्यशैली और नेतृत्व को लेकर पार्टी के कुछ नेताओं की नाराजगी बढ़ती गई। असंतुष्ट खेमे का आरोप है कि चुनावी प्रदर्शन की जिम्मेदारी तय करने और संगठन की कमियों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।

8 सितंबर को दिल्ली में क्या होने वाला है?

न्यूज रिपोर्ट्स के मुताबिक, असंतुष्ट नेताओं ने 8 सितंबर को दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन के बाहर शांतिपूर्ण धरना और प्रदर्शन की तैयारी की है।

इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक बिहार कांग्रेस के नेताओं की शिकायतें पहुंचाना बताया जा रहा है।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग प्रदेश प्रभारी महासचिव कृष्णा अल्लावरू और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश कुमार को उनके पदों से हटाने की है।

नेताओं का कहना है कि उन्होंने पहले भी संगठन से जुड़ी अपनी चिंताओं को पार्टी नेतृत्व के सामने रखने की कोशिश की थी। लेकिन जब उन्हें अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली तो अब दिल्ली में प्रदर्शन का रास्ता चुना गया।

राहुल गांधी से मुलाकात नहीं मिलने का भी मुद्दा

बिहार कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं की नाराजगी केवल प्रदेश नेतृत्व तक सीमित नहीं है। राहुल गांधी से मुलाकात का समय नहीं मिलने को लेकर भी कुछ नेताओं में असंतोष बताया जा रहा है।

AICC सदस्य आनंद माधव के अनुसार, वह नवंबर 2025 से राहुल गांधी से मुलाकात का समय मांग रहे हैं। उनका दावा है कि अब तक उन्हें मुलाकात का अवसर नहीं मिला।

आनंद माधव ने एक पूर्व बैठक का भी जिक्र किया, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, केसी वेणुगोपाल और अशोक गहलोत के साथ बिहार के नेताओं की शिकायतों पर चर्चा हुई थी।

उनके मुताबिक, उस बैठक में समस्याओं पर ध्यान देने का भरोसा दिया गया था। लेकिन असंतुष्ट नेताओं का कहना है कि इसके बाद भी उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

यही वजह है कि अब कुछ नेता सीधे दिल्ली पहुंचकर अपनी बात रखने की तैयारी कर रहे हैं।

कौन-कौन नेता प्रदर्शन में शामिल हो सकते हैं?

प्रस्तावित धरने में बिहार कांग्रेस से जुड़े कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के शामिल होने की संभावना बताई जा रही है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष जमाल अहमद और राजकुमार राजन, AICC सदस्य नागेंद्र पासवान, पूर्व विधायक छत्रपति यादव और बी. अख्तर जैसे नेताओं के शामिल होने की तैयारी है।

इसके अलावा बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व सचिव और पूर्व विधायक अनिल कुमार सिंह के भी प्रदर्शन में शामिल होने की बात सामने आई है।

आनंद माधव के अनुसार, बिहार के अलग-अलग हिस्सों से पार्टी नेता और कार्यकर्ता दिल्ली पहुंच सकते हैं। प्रदर्शन का स्वरूप शांतिपूर्ण रखने की बात कही गई है।

पार्टी के भीतर बातचीत की मांग भी

जहां एक तरफ कुछ नेता धरने के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर करने की तैयारी में हैं, वहीं पार्टी के भीतर से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की आवाज भी सामने आई है।

बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और AICC सदस्य किशोर कुमार झा ने प्रदर्शन की वजहों के प्रति सहानुभूति जताई है। उनका कहना है कि प्रदर्शन करने वाले नेता पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता हैं और उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।

हालांकि, उन्होंने बातचीत को ज्यादा बेहतर रास्ता बताया। उनके मुताबिक, संगठन के भीतर पैदा हुई समस्याओं का समाधान संवाद के जरिए निकाला जाना चाहिए।

क्या हाईकमान के लिए बढ़ेगी चुनौती?

8 सितंबर का प्रस्तावित प्रदर्शन कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के लिए इसलिए महत्वपूर्ण हो सकता है क्योंकि यह पार्टी के भीतर मौजूद असंतोष को सार्वजनिक मंच पर ला सकता है।

बिहार जैसे बड़े राजनीतिक राज्य में विधानसभा चुनाव के कमजोर प्रदर्शन के बाद संगठनात्मक बदलाव की मांग को नजरअंदाज करना पार्टी के लिए आसान नहीं होगा।

हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कांग्रेस हाईकमान प्रदर्शन से पहले असंतुष्ट नेताओं के साथ बातचीत करता है या नहीं। यह भी देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रदर्शन के बाद पार्टी प्रदेश संगठन में किसी बदलाव पर विचार करती है या नहीं।

क्या बिहार कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन होगा?

फिलहाल प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार और प्रभारी महासचिव कृष्णा अल्लावरू को हटाने की मांग असंतुष्ट नेताओं के प्रदर्शन का प्रमुख मुद्दा है।

लेकिन किसी भी संगठनात्मक बदलाव का अंतिम फैसला कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा। इसलिए 8 सितंबर का प्रदर्शन सिर्फ विरोध का कार्यक्रम नहीं, बल्कि पार्टी नेतृत्व पर अपनी मांगों को लेकर दबाव बनाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।

बिहार कांग्रेस के सामने अब दोहरी चुनौती है—एक तरफ चुनावी प्रदर्शन में सुधार करना और दूसरी तरफ संगठन के भीतर बढ़ती नाराजगी को संभालना।

यदि हाईकमान असंतुष्ट नेताओं से बातचीत कर समाधान निकालता है तो विवाद को सीमित किया जा सकता है। वहीं, अगर नाराजगी बनी रहती है तो आने वाले दिनों में बिहार कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और संगठन को लेकर बहस और तेज हो सकती है।


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