बंगाल की पारंपरिक कला को मिलेगा नया हुनर, PM-SETU से बदलेगी तस्वीर
पश्चिम बंगाल की पारंपरिक कला और उद्योगों को आधुनिक कौशल से जोड़ने की तैयारी शुरू हो गई है। केंद्र सरकार के PM-SETU कार्यक्रम के तहत राज्य में हथकरघा और डोकरा शिल्प जैसे पारंपरिक क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए विशेष पहल की जाएगी। इसका उद्देश्य इन क्षेत्रों के लिए प्रशिक्षित और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप कुशल युवाओं की नई पीढ़ी तैयार करना है।
केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी ने कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य के पारंपरिक औद्योगिक केंद्रों को प्राथमिकता देते हुए वहां की जरूरत के अनुसार कुशल कार्यबल तैयार किया जाएगा।
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम बंगाल ने PM-SETU परियोजना में हाल ही में भागीदारी की है। मंत्री ने कहा कि राज्य इस परियोजना से करीब दो महीने पहले जुड़ा है, लेकिन कौशल विकास के मामले में बंगाल पीछे नहीं रहेगा।
हथकरघा और डोकरा कला पर विशेष ध्यान
PM-SETU के तहत पश्चिम बंगाल की पारंपरिक लोक एवं हस्तशिल्प आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की योजना है। इसमें खास तौर पर हथकरघा और डोकरा शिल्प जैसे क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा।
बंगाल में इन पारंपरिक उद्योगों से बड़ी संख्या में कारीगर और परिवार जुड़े हैं। आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप तकनीकी प्रशिक्षण, नई मशीनों की जानकारी और बेहतर कौशल मिलने से इन क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
सरकार का जोर केवल पारंपरिक कला को संरक्षित करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि युवाओं को उद्योग की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप तैयार करने पर भी रहेगा। इससे पारंपरिक क्षेत्रों और आधुनिक रोजगार बाजार के बीच बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश होगी।
ITI में उद्योग जैसी मशीनों पर मिलेगा प्रशिक्षण
जयंत चौधरी ने कोलकाता में आयोजित ‘कौशल मंथन’ क्षेत्रीय सम्मेलन के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ITI संस्थानों को इस तरह विकसित किया जाएगा कि छात्रों को वही उपकरण और मशीनें उपलब्ध हों, जिनका इस्तेमाल वास्तविक उद्योगों में होता है।
इस व्यवस्था का मकसद छात्रों को केवल किताबी या सैद्धांतिक जानकारी देने के बजाय व्यावहारिक प्रशिक्षण देना है। जब विद्यार्थी प्रशिक्षण के दौरान आधुनिक औद्योगिक मशीनों पर काम करेंगे, तो उन्हें नौकरी शुरू करने के बाद नई तकनीक अपनाने में कम परेशानी हो सकती है।
मंत्री के अनुसार, ITI को उद्योगों के साथ बेहतर तरीके से जोड़ने से बड़े औद्योगिक समूहों का भरोसा भी इन संस्थानों पर बढ़ेगा। इससे प्रशिक्षण संस्थानों और कंपनियों के बीच सहयोग के नए अवसर बन सकते हैं।
पारंपरिक औद्योगिक केंद्रों को मिलेगी प्राथमिकता
PM-SETU के तहत पश्चिम बंगाल के पारंपरिक औद्योगिक केंद्रों की स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कौशल विकास की योजनाएं तैयार की जाएंगी। इसका अर्थ है कि अलग-अलग क्षेत्रों में मौजूद उद्योगों के हिसाब से प्रशिक्षण का स्वरूप तय किया जा सकता है।
उदाहरण के तौर पर, जिस क्षेत्र में हथकरघा उद्योग अधिक सक्रिय है, वहां संबंधित तकनीक और उत्पादन कौशल पर ज्यादा ध्यान दिया जा सकता है। इसी तरह डोकरा शिल्प से जुड़े इलाकों में पारंपरिक तकनीक के साथ आधुनिक डिजाइन, उत्पादन और बाजार की जरूरतों से संबंधित प्रशिक्षण को जोड़ा जा सकता है।
सरकार की इस पहल से स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार और कौशल के बेहतर अवसर मिलने की संभावना है। साथ ही पारंपरिक उद्योगों को नई तकनीक और प्रशिक्षित श्रमिकों का लाभ मिल सकता है।
जयंत चौधरी ने यह भी स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल भले ही PM-SETU से हाल में जुड़ा हो, लेकिन परियोजना के क्रियान्वयन में राज्य को पीछे नहीं रहने दिया जाएगा। अब आने वाले समय में इस योजना के तहत ITI के आधुनिकीकरण और पारंपरिक उद्योगों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों की दिशा महत्वपूर्ण होगी।
अगर उद्योग की जरूरत और स्थानीय कौशल को प्रभावी ढंग से जोड़ा जाता है, तो PM-SETU पश्चिम बंगाल में युवाओं के रोजगार के साथ-साथ हथकरघा और डोकरा जैसे पारंपरिक क्षेत्रों को नई आर्थिक ताकत देने में अहम भूमिका निभा सकता है।
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