बेगूसराय में गंगा का रौद्र रूप, सड़कें डूबीं और नाव बनी सहारा
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👉 WhatsApp से जुड़ेंबेगूसराय में गंगा बाढ़ ने दियारा क्षेत्र के लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गंगा बाढ़ के कारण बछवाड़ा और तेघड़ा प्रखंड के कई निचले इलाकों में पानी घुस गया है। कुछ जगहों पर सड़कों पर करीब दो फीट तक पानी बह रहा है, जबकि हजारों बीघा में लगी मक्का और मिर्च की फसलें डूब गई हैं। गांवों का संपर्क प्रभावित होने के बाद कई इलाकों में आवागमन के लिए नाव ही एकमात्र सहारा बची है।
गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी से ग्रामीणों के सामने घर, फसल, पशुओं के चारे और सुरक्षित स्थान पर जाने की चुनौती खड़ी हो गई है।
खतरे के निशान के पार पहुंचा गंगा का जलस्तर
बेगूसराय में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। नदी के तेज बहाव और बढ़ते पानी का सबसे ज्यादा असर तटवर्ती और दियारा क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है।
बछवाड़ा प्रखंड की कई पंचायतों के निचले हिस्सों और रिहायशी इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। पानी बढ़ने के साथ ग्रामीण इलाकों में स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण होती जा रही है।
तेघड़ा प्रखंड के अयोध्या गंगा घाट तक भी पानी पहुंचने की जानकारी है। यहां आसपास की दुकानों में पानी भरने से स्थानीय कारोबार और सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।
दो फीट पानी में चलने को मजबूर ग्रामीण
बछवाड़ा प्रखंड के चमथा दियारा, दादूपुर और बिशनपुर समेत कई इलाकों में बाढ़ का असर साफ दिखाई दे रहा है।
चमथा और बछवाड़ा को जोड़ने वाली मुख्य सड़क पर लोदियाही तथा अजीतपुर बिशनपुर के पास करीब दो फीट तक पानी बह रहा है। इसके चलते लोगों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है।
कुछ स्थानों पर सड़क और रास्ते पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। इससे गांवों के बीच सामान्य आवागमन प्रभावित हुआ है और जरूरी काम के लिए निकलने वाले लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
कई इलाकों में नाव ही एकमात्र सहारा
बाढ़ का पानी बढ़ने के बाद रतलाहपुर दियारा और वसूलिया टोल जैसे इलाकों में आवागमन मुख्य रूप से नावों पर निर्भर हो गया है।
निचले टोलों और दियारा क्षेत्र के बीच आने-जाने के लिए स्थानीय नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है। रोजमर्रा के जरूरी काम, बाजार तक पहुंच और अन्य गतिविधियों के लिए भी ग्रामीणों को पानी के बीच से गुजरना पड़ रहा है।
ऐसे हालात में नावें लोगों के लिए केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि जरूरत के समय सुरक्षित आवाजाही का प्रमुख माध्यम बन गई हैं।
हजारों बीघा फसल पानी में डूबी
गंगा के बढ़ते पानी ने किसानों की चिंता भी बढ़ा दी है। दियारा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर लगी मक्का और मिर्च की फसलें बाढ़ के पानी में डूब गई हैं।
किसानों के अनुसार, तैयार होने के करीब पहुंच चुकी फसलों के बर्बाद होने से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। कई खेतों में पानी भर जाने के कारण फसल को बचाने की कोई गुंजाइश नहीं बची है।
फसल नुकसान का सीधा असर ग्रामीण परिवारों की आय पर पड़ सकता है। बाढ़ का पानी लंबे समय तक खेतों में रहने पर अगली कृषि गतिविधियां भी प्रभावित होने की आशंका रहती है।
पशुपालकों के सामने चारे का संकट
बाढ़ ने सिर्फ खेती को ही प्रभावित नहीं किया है। दियारा क्षेत्र में पशुपालकों के सामने हरे चारे की कमी की समस्या भी खड़ी हो गई है।
जिन इलाकों में खेत और चरागाह पानी में डूब गए हैं, वहां मवेशियों के लिए चारा जुटाना मुश्किल हो रहा है। इसके चलते कई पशुपालक अपने पशुओं को लेकर ऊंचे और अपेक्षाकृत सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे हैं।
ग्रामीणों के लिए पशुधन आजीविका का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए बाढ़ के दौरान पशुओं को सुरक्षित रखना उनके लिए बड़ी प्राथमिकता बन गया है।
बाढ़ आश्रय स्थल की व्यवस्था पर उठे सवाल
बिशनपुर पंचायत के पूर्व मुखिया श्रीराम राय ने दियारा क्षेत्र में बनाए गए बाढ़ आश्रय स्थलों की स्थिति को लेकर सवाल उठाए हैं।
उनके अनुसार, मनरेगा के तहत करोड़ों रुपये खर्च कर बाढ़ आश्रय स्थल बनाए गए थे, लेकिन मौजूदा समय में वे उपयोग के लिहाज से पर्याप्त स्थिति में नहीं हैं।
यदि गंगा का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो अगले दो-तीन दिनों में निचले इलाकों के घरों में पानी प्रवेश करने की आशंका जताई गई है। ऐसे में सुरक्षित आश्रय स्थलों की उपयोगिता और उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
ग्रामीणों में पलायन की बढ़ी चिंता
बाढ़ का पानी लगातार फैलने से दियारा क्षेत्र के कई ग्रामीण सुरक्षित स्थानों की तलाश में जुट गए हैं। कुछ परिवार जरूरी सामान और मवेशियों के साथ ऊंचे स्थानों की ओर जाने लगे हैं।
सबसे बड़ी चिंता उन परिवारों को लेकर है जो निचले इलाकों में रहते हैं। पानी बढ़ने की स्थिति में घरों से बाहर निकलना और जरूरी सामान सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन संवेदनशील इलाकों में राहत और बचाव की तैयारियां मजबूत रखे तथा जरूरत पड़ने पर तत्काल सहायता उपलब्ध कराए।
अगले कुछ दिन बेहद अहम
गंगा के जलस्तर में लगातार वृद्धि के कारण बेगूसराय के दियारा क्षेत्रों में आने वाले दिन महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। जलस्तर बढ़ने पर और नए इलाकों के जलमग्न होने की आशंका बनी हुई है।
प्रशासन के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती लोगों की सुरक्षित आवाजाही, पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और संवेदनशील इलाकों की लगातार निगरानी करना है।
बाढ़ की स्थिति में ग्रामीणों के लिए जरूरी है कि वे तेज बहाव वाले पानी में जाने से बचें और प्रशासन द्वारा बताए गए सुरक्षित रास्तों का इस्तेमाल करें। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पशुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है।
फिलहाल बेगूसराय के बछवाड़ा और तेघड़ा के दियारा क्षेत्रों में गंगा का बढ़ता पानी लोगों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। सड़कें डूबने, फसलें बर्बाद होने और नाव पर निर्भरता बढ़ने से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। अब सबकी नजर गंगा के अगले जलस्तर और प्रशासन की राहत तैयारियों पर है।
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