‘बंटवारा 1947’ का पहला रिव्यू आया सामने, सनी देओल छाए
📌 पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ताज़ा ख़बरें सीधे अपने मोबाइल पर पाएं!
👉 WhatsApp से जुड़ेंसनी देओल की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘बंटवारा 1947’ रिलीज से पहले ही चर्चा में आ गई है। ‘बंटवारा 1947’ का पहला रिव्यू सामने आ चुका है और फिल्म देखने के बाद प्रोड्यूसर रमेश तौरानी ने इसे बेहद संवेदनशील, भावुक और इंसानियत से जुड़ी कहानी बताया है। खास स्क्रीनिंग में फिल्म देखने पहुंचे तौरानी ने सनी देओल समेत पूरी स्टारकास्ट की परफॉर्मेंस की तारीफ की और दर्शकों से इसे पहले दिन सिनेमाघरों में देखने की अपील की।
फिल्म की रिलीज से एक दिन पहले आयोजित स्क्रीनिंग में आमिर खान, अली फजल और रमेश तौरानी जैसे फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े चेहरे शामिल हुए। स्क्रीनिंग के बाद फिल्म को लेकर सामने आई प्रतिक्रिया ने इसकी कहानी और कलाकारों की परफॉर्मेंस को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है।
रमेश तौरानी ने बताया संवेदनशील और इमोशनल कहानी
फिल्म देखने के बाद रमेश तौरानी ने ‘बंटवारा 1947’ को केवल इतिहास के एक दर्दनाक अध्याय को दिखाने वाली फिल्म मानने से आगे की बात कही। उनके मुताबिक फिल्म मुश्किल दौर में इंसानियत, साहस और मानवीय रिश्तों की कहानी सामने रखती है।
तौरानी ने फिल्म के भावनात्मक पहलू की सराहना करते हुए दर्शकों से इसे पहले दिन देखने की अपील की। उनका मानना है कि फिल्म की कहानी दर्शकों को भावनात्मक रूप से प्रभावित करने की क्षमता रखती है।
फिल्म का विषय 1947 के विभाजन जैसे संवेदनशील दौर से जुड़ा है। ऐसे में कहानी में इतिहास के साथ मानवीय भावनाओं को किस तरह पिरोया गया है, यह फिल्म के लिए सबसे अहम पहलुओं में से एक माना जा रहा है।
सनी देओल की एक्टिंग ने किया प्रभावित
रमेश तौरानी ने सनी देओल की परफॉर्मेंस को शानदार और प्रभावशाली बताया। फिल्म में सनी देओल एक मुस्लिम व्यक्ति की भूमिका निभा रहे हैं, जिसकी जिंदगी विभाजन के बाद पूरी तरह बदल जाती है।
कहानी में उनका किरदार पाकिस्तान पहुंचता है, जहां उसे अपने नए घर में एक हिंदू महिला मिलती है। इस महिला का किरदार शबाना आजमी ने निभाया है। इसके बाद दोनों किरदारों के सामने सुरक्षा, परिवार और इंसानियत के बीच मुश्किल फैसला खड़ा होता है।
तौरानी ने शबाना आजमी के अभिनय की भी तारीफ की। उन्होंने अभिनेत्री की भूमिका को कहानी के भावनात्मक पक्ष से जुड़ा महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। वहीं, लंबे समय बाद बड़े पर्दे पर प्रीति जिंटा की वापसी को भी उन्होंने खास बताया है।
अभिमन्यु सिंह के किरदार ने खींचा सबसे ज्यादा ध्यान
फिल्म के कलाकारों में अभिमन्यु सिंह की परफॉर्मेंस ने रमेश तौरानी को खास तौर पर प्रभावित किया। उन्होंने फिल्म में अभिमन्यु सिंह के खलनायक वाले किरदार को बेहद प्रभावशाली बताया।
तौरानी के मुताबिक यह किरदार ऐसा है, जो दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित भी करता है और साथ ही बेचैनी भी पैदा करता है। किसी नकारात्मक किरदार के लिए यह प्रभाव कहानी में उसके महत्व को दिखाता है।
इसके अलावा उन्होंने अली फजल और करण देओल के काम की भी सराहना की। फिल्म में अलग-अलग किरदारों के जरिए विभाजन के समय की परिस्थितियों और लोगों के सामने खड़ी चुनौतियों को दिखाने की कोशिश की गई है।
विभाजन की पृष्ठभूमि में इंसानियत की परीक्षा
‘बंटवारा 1947’ की कहानी भारत के विभाजन के दौर को केंद्र में रखती है। कहानी में सनी देओल का किरदार पाकिस्तान पहुंचता है और वहां उसे शबाना आजमी द्वारा निभाया गया एक हिंदू महिला का किरदार मिलता है।
इसके बाद कहानी परिवार की सुरक्षा और इंसानियत के फर्ज के बीच खड़े संघर्ष को सामने लाती है। यही भावनात्मक टकराव फिल्म की कहानी को आगे बढ़ाता है और इसे सिर्फ एक ऐतिहासिक घटना की कहानी से अलग बनाने की कोशिश करता है।
विभाजन के दौर में लोगों ने जिन मुश्किल परिस्थितियों का सामना किया, फिल्म उसी पृष्ठभूमि में रिश्तों और इंसानियत के सवाल को सामने रखने का प्रयास करती है। इसलिए फिल्म की कहानी में भावनात्मक जुड़ाव एक महत्वपूर्ण पहलू है।
प्रीति जिंटा की वापसी से बढ़ी उत्सुकता
‘बंटवारा 1947’ में प्रीति जिंटा लंबे अंतराल के बाद बड़े पर्दे पर वापसी कर रही हैं। उनकी वापसी को लेकर भी दर्शकों के बीच उत्सुकता बनी हुई है।
फिल्म की एक और खास बात सनी देओल और उनके बेटे करण देओल का पहली बार एक साथ स्क्रीन पर नजर आना है। इसके अलावा अली फजल और अभिमन्यु सिंह भी अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे।
रिलीज से पहले आए पहले रिव्यू ने फिल्म की भावनात्मक कहानी और कलाकारों की परफॉर्मेंस को लेकर माहौल तैयार कर दिया है। हालांकि दर्शकों की वास्तविक प्रतिक्रिया फिल्म रिलीज होने के बाद ही सामने आएगी।
फिलहाल रमेश तौरानी की सकारात्मक प्रतिक्रिया ने ‘बंटवारा 1947’ को लेकर चर्चा जरूर तेज कर दी है। अब नजर इस बात पर होगी कि सिनेमाघरों में पहुंचने के बाद सनी देओल की यह फिल्म दर्शकों और बॉक्स ऑफिस पर कितना असर छोड़ पाती है।
