बांका में 1.26 लाख की रिश्वत लेते JE और क्लर्क गिरफ्तार, निगरानी की बड़ी कार्रवाई


 

बांका रिश्वत कांड में सोमवार को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जिला परिषद कार्यालय से अवकाश प्राप्त कनीय अभियंता ओमप्रकाश मंडल और क्लर्क जागेश्वर मंडल को 1.26 लाख रुपये की कथित रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया। बांका रिश्वत कांड की इस कार्रवाई के दौरान निगरानी टीम ने पूरे कार्यालय को घेर लिया और मुख्य द्वार बंद कर दिया। कार्रवाई के बाद कार्यालय परिसर में अफरा-तफरी मच गई, जबकि बाहर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। फिलहाल दोनों आरोपितों से पूछताछ की जा रही है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।

यह कार्रवाई जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के रूप में देखी जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, दोनों पर एक कार्य के बदले 1.26 लाख रुपये की रिश्वत लेने का आरोप है।

जिला परिषद कार्यालय में अचानक पहुंची निगरानी टीम

सोमवार को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम दो वाहनों से सीधे बांका जिला परिषद कार्यालय पहुंची।

टीम के पहुंचते ही कार्रवाई शुरू कर दी गई और कार्यालय का मुख्य द्वार बंद करा दिया गया। इस दौरान किसी भी कर्मचारी या आगंतुक को बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी गई। इससे कार्यालय में मौजूद लोगों के बीच अचानक हलचल मच गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, निगरानी अधिकारियों ने पहले पूरे परिसर की निगरानी की और फिर तय योजना के तहत दोनों आरोपितों को हिरासत में लिया।

1.26 लाख रुपये की कथित रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तारी

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि अवकाश प्राप्त कनीय अभियंता ओमप्रकाश मंडल और क्लर्क जागेश्वर मंडल पर एक कार्य के बदले 1.26 लाख रुपये की रिश्वत लेने का आरोप है।

निगरानी टीम ने कथित रिश्वत की राशि के साथ दोनों को मौके से गिरफ्तार किया। इसके बाद आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी की गई और आरोपितों को आगे की पूछताछ के लिए अपने साथ ले जाया गया।

जांच एजेंसी अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित रिश्वत किस कार्य के लिए ली जा रही थी और इस मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं है।

कार्रवाई के दौरान कार्यालय में मची अफरा-तफरी

छापेमारी के समय जिला परिषद अध्यक्ष राजेंद्र यादव सहित कई अधिकारी और कर्मचारी कार्यालय में मौजूद थे।

जैसे ही निगरानी टीम ने कार्रवाई शुरू की, पूरे कार्यालय में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई लोग यह समझने की कोशिश करते रहे कि आखिर अचानक इतनी बड़ी कार्रवाई क्यों की जा रही है।

कुछ ही देर में इस घटना की जानकारी आसपास के लोगों तक भी पहुंच गई, जिसके बाद कार्यालय परिसर के बाहर भीड़ जमा हो गई।

निगरानी ब्यूरो की आगे की जांच जारी

गिरफ्तारी के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो दोनों आरोपितों से पूछताछ कर रहा है।

अधिकारियों का उद्देश्य यह जानना है कि कथित रिश्वत की मांग कैसे की गई, पैसा किस उद्देश्य से लिया जा रहा था और क्या इस मामले में अन्य लोगों की भी भूमिका है।

जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि पूछताछ में नए तथ्य सामने आते हैं तो मामले का दायरा भी बढ़ सकता है।

भ्रष्टाचार के मामलों में क्या होती है प्रक्रिया?

जब किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ रिश्वत लेने की शिकायत मिलती है, तो जांच एजेंसी पहले शिकायत का सत्यापन करती है।

यदि शिकायत प्रथम दृष्टया सही पाई जाती है, तो योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप कार्रवाई की जाती है। आरोपी को कथित रिश्वत की राशि के साथ पकड़े जाने पर कानूनी प्रक्रिया शुरू होती है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की जांच की जाती है।

ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और जांच रिपोर्ट के आधार पर होता है।

जिले में चर्चा का विषय बनी कार्रवाई

बांका जिला परिषद कार्यालय में हुई यह कार्रवाई पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है। सरकारी कार्यालय में दिनदहाड़े हुई गिरफ्तारी ने लोगों का ध्यान खींचा है।

फिलहाल मामले की जांच जारी है और निगरानी अन्वेषण ब्यूरो सभी तथ्यों की पड़ताल कर रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस पूरे प्रकरण में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा कथित रिश्वत का पूरा मामला क्या था।

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