ऐ मेरे वतन के लोगों: वो देशभक्ति गीत जिसने नेहरू की आंखें नम कर दीं

 


ऐ मेरे वतन के लोगों: लता की आवाज से रो पड़े थे नेहरू, जानें कहानी

ऐ मेरे वतन के लोगों सिर्फ एक देशभक्ति गीत नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की भावनाओं से जुड़ा हुआ एक अमर गीत है। ऐ मेरे वतन के लोगों को जब भी स्वतंत्रता दिवस या राष्ट्रीय कार्यक्रमों में सुना जाता है, लोगों के दिल में देशप्रेम और शहीदों के प्रति सम्मान की भावना जाग उठती है। इस गीत ने अपनी पहली प्रस्तुति के समय ही ऐसा प्रभाव छोड़ा था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की आंखें भी नम हो गई थीं।

15 अगस्त के मौके पर देशभर में इस गीत की गूंज सुनाई देती है। स्कूलों, सरकारी कार्यक्रमों और सांस्कृतिक आयोजनों में आज भी यह गीत देशभक्ति की भावना को मजबूत करता है।

1963 में पहली बार गूंजा था अमर देशभक्ति गीत

‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ गीत को स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने पहली बार 27 जनवरी 1963 को दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रस्तुत किया था।

यह गीत 1962 के भारत-चीन युद्ध में शहीद हुए भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि के रूप में तैयार किया गया था। इसके बोल प्रसिद्ध कवि प्रदीप ने लिखे थे, जबकि संगीतकार सी. रामचंद्र ने इसकी धुन तैयार की थी।

जब लता मंगेशकर ने इस गीत को अपनी भावपूर्ण आवाज में गाया, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति भावुक हो गया। गीत के शब्दों और लता जी की आवाज ने शहीदों की कुर्बानी को लोगों के सामने जीवंत कर दिया।

कहा जाता है कि प्रस्तुति खत्म होने के बाद पंडित जवाहर लाल नेहरू ने लता मंगेशकर को अपने पास बुलाया और उनकी जमकर तारीफ की।

नेहरू ने कहा था- आंखों में आ गए थे आंसू

इस गीत की प्रस्तुति के बाद लता मंगेशकर को मंच के पीछे आराम करने के लिए भेज दिया गया था। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि उनकी आवाज ने वहां मौजूद लोगों को कितना प्रभावित किया है।

कुछ देर बाद फिल्म निर्माता महबूब खान उनके पास पहुंचे और कहा कि पंडित जवाहर लाल नेहरू उनसे मिलना चाहते हैं।

लता जी ने बताया था कि जब वह नेहरू जी से मिलने पहुंचीं तो वहां मौजूद सभी लोगों ने उनका स्वागत किया। महबूब खान ने नेहरू जी से पूछा कि उन्हें गाना कैसा लगा।

इसके जवाब में नेहरू जी ने कहा था कि गाना बहुत अच्छा था और उनकी आंखों में आंसू आ गए थे।

यह प्रतिक्रिया लता मंगेशकर के लिए भी बेहद खास पल था, जिसे उन्होंने अपने जीवन की यादगार घटनाओं में शामिल किया।

लता मंगेशकर पहले नहीं गाना चाहती थीं यह गीत

बहुत कम लोग जानते हैं कि लता मंगेशकर शुरुआत में इस गीत को गाने के लिए तैयार नहीं थीं।

उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि कार्यक्रम के लिए समय बहुत कम था और उन्हें लग रहा था कि इतने बड़े मंच पर प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के सामने गाना आसान नहीं होगा।

लता जी ने यह भी बताया था कि उन्होंने पहले इस गीत को अपनी बहन आशा भोसले के साथ युगल गीत के रूप में पेश करने का सुझाव दिया था।

लेकिन कवि प्रदीप चाहते थे कि यह गीत केवल लता मंगेशकर की आवाज में ही रिकॉर्ड और प्रस्तुत किया जाए। उन्हें विश्वास था कि लता जी ही इस गीत की भावना को सही तरीके से लोगों तक पहुंचा सकती हैं।

बाद में आशा भोसले के दिल्ली कार्यक्रम में शामिल नहीं होने के बाद लता जी ने अकेले ही इस गीत को अपनी आवाज दी।

गीत की लोकप्रियता आज भी बरकरार है

‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ को रिलीज हुए कई दशक बीत चुके हैं, लेकिन इसकी लोकप्रियता आज भी पहले जैसी ही है।

इस गीत की सबसे बड़ी खासियत इसके भावपूर्ण बोल और देश के जवानों को समर्पित संदेश हैं। यह गीत हर पीढ़ी को देश के सैनिकों के बलिदान की याद दिलाता है।

स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और अन्य राष्ट्रीय अवसरों पर जब यह गीत बजता है, तो लोगों के मन में गर्व और सम्मान की भावना पैदा होती है।

लता मंगेशकर की आवाज ने इस गीत को सिर्फ एक संगीत रचना नहीं रहने दिया, बल्कि इसे भारतीय इतिहास और भावनाओं का हिस्सा बना दिया।

क्यों खास है ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’?

इस गीत की खासियतें:

  • यह भारतीय सैनिकों के बलिदान को समर्पित है।
  • इसके बोल कवि प्रदीप ने लिखे थे।
  • संगीत सी. रामचंद्र ने दिया था।
  • लता मंगेशकर की आवाज ने इसे अमर बना दिया।
  • पहली प्रस्तुति पर ही यह गीत लोगों के दिलों तक पहुंच गया।

आज भी जब यह गीत सुनाई देता है, तो देशवासियों के मन में वही भावना जागती है, जो 1963 में पहली बार सुनने वालों के मन में पैदा हुई थी।

‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ भारतीय संगीत इतिहास का ऐसा अध्याय है, जिसे आने वाली पीढ़ियां भी हमेशा याद रखेंगी।

🛍️ ऑनलाइन शॉपिंग करें
Amazon, Flipkart, Myntra और AJIO पर खरीदारी करें
यहाँ से खरीदारी करने पे एक्स्ट्रा डिस्काउंट मिल सकता है।
Next Post Previous Post
हमसे जुड़ें
1