मध्य पूर्व तनाव का असर! अमेरिका में पेट्रोल फिर 4 डॉलर प्रति गैलन के पार, बढ़ी महंगाई की चिंता
अमेरिका में कुछ सप्ताह की राहत के बाद पेट्रोल की कीमतों में फिर तेजी देखने को मिली है। देश में नियमित पेट्रोल (Regular Gasoline) की औसत कीमत बढ़कर 4 डॉलर प्रति गैलन पहुंच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच हालिया घटनाक्रम ने वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित किया है, जिसका सीधा असर ईंधन की कीमतों पर पड़ा है।
अमेरिकी मोटर क्लब संगठन AAA के ताजा आंकड़ों के अनुसार, सोमवार तक देश में पेट्रोल की राष्ट्रीय औसत कीमत 4 डॉलर प्रति गैलन दर्ज की गई। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह औसतन 3.14 डॉलर प्रति गैलन थी। हालांकि अलग-अलग राज्यों में ईंधन की कीमतें स्थानीय टैक्स, आपूर्ति और मांग के आधार पर अलग-अलग बनी हुई हैं।
क्यों बढ़ीं पेट्रोल की कीमतें?
विश्लेषकों के अनुसार, हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को ऊपर धकेला है। इससे पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधनों की लागत भी बढ़ने लगी है।
कुछ समय पहले दोनों देशों के बीच अंतरिम समझौते के बाद कच्चे तेल के दाम नरम पड़े थे, जिससे पेट्रोल की कीमतों में भी कमी आई थी। लेकिन हालिया घटनाओं के बाद बाजार में फिर अनिश्चितता बढ़ गई है और तेल की कीमतें दोबारा चढ़ने लगी हैं।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भू-राजनीतिक तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।
सिर्फ अमेरिका ही नहीं, दुनिया पर भी पड़ेगा असर
कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का असर केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है। तेल आयात करने वाले कई देशों में ईंधन महंगा होने की संभावना बढ़ गई है।
ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ती है, जिसका असर खाद्य पदार्थों, रोजमर्रा के सामान और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। यही कारण है कि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी को महंगाई बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में गिना जाता है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो कई देशों के केंद्रीय बैंकों और सरकारों के लिए महंगाई को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
कच्चे तेल में भी आई तेजी, चुनावी मुद्दा बन सकती है महंगाई
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 3.2% बढ़कर 90.95 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है। वहीं अमेरिकी बेंचमार्क क्रूड भी करीब 2.8% की तेजी के साथ 84.04 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता देखा गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की यह तेजी आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर और दबाव डाल सकती है। अमेरिका में ईंधन की बढ़ती लागत आम लोगों के घरेलू बजट को प्रभावित कर सकती है और यह मुद्दा आगामी मध्यावधि चुनावों में भी अहम भूमिका निभा सकता है।
फिलहाल वैश्विक बाजार की नजर मध्य पूर्व के घटनाक्रम और कच्चे तेल की आगे की चाल पर बनी हुई है। यदि तनाव कम होता है, तो तेल और ईंधन की कीमतों में राहत मिल सकती है। वहीं तनाव बढ़ने की स्थिति में कीमतों में और उछाल आने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
