क्या ट्रंप की मौत के बाद ऑटोमैटिक होगा ईरान पर मिसाइल अटैक? जानिए अमेरिकी कानून

 


ट्रंप-ईरान तनाव एक बार फिर वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ी चिंता बनता दिख रहा है। ट्रंप-ईरान तनाव उस समय और गहरा गया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि यदि उनकी हत्या की साजिश को अंजाम दिया गया तो ईरान को अभूतपूर्व सैन्य जवाब दिया जाएगा। दूसरी ओर, विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी संविधान और सैन्य व्यवस्था के तहत किसी भी तरह की स्वचालित सैन्य कार्रवाई का प्रावधान नहीं है। इसी बीच ईरान की ओर से आए बयानों और बढ़ती सुरक्षा चिंताओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ा दिया है।

ट्रंप का दावा, हत्या की साजिश पर होगा कड़ा जवाब

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि उन्हें ईरान की ओर से लगातार जान से मारने और हत्या के प्रयास की धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने दावा किया कि यदि उनके खिलाफ कोई हमला होता है तो अमेरिका की ओर से बेहद कठोर जवाब दिया जाएगा।

ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिकी सैन्य तैयारी पूरी तरह सक्रिय है। हालांकि उन्होंने किसी आधिकारिक सैन्य अभियान की घोषणा नहीं की। उनके बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा और कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई।

विशेषज्ञों ने बताया क्या कहता है अमेरिकी कानून

ट्रंप के बयान के बाद संवैधानिक और कानूनी विशेषज्ञों ने अमेरिकी व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट की। उनके अनुसार अमेरिका में ऐसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है, जिसके तहत राष्ट्रपति की मृत्यु या हत्या की स्थिति में पहले से जारी आदेश स्वतः सैन्य कार्रवाई में बदल जाए।

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी संविधान और सैन्य कमान की प्रक्रिया स्पष्ट रूप से तय है। किसी भी बड़े सैन्य निर्णय के लिए संवैधानिक प्रक्रिया का पालन किया जाता है और स्वचालित युद्ध शुरू करने जैसी व्यवस्था मौजूद नहीं है।

राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में कैसे चलता है अमेरिका का शासन?

जानकारों के अनुसार यदि किसी कारण से राष्ट्रपति अपने पद पर नहीं रहते, तो अमेरिकी संविधान के तहत राष्ट्रपति की शक्तियां उपराष्ट्रपति को हस्तांतरित हो जाती हैं।

ऐसी स्थिति में नए राष्ट्रपति या कार्यवाहक कमांडर-इन-चीफ ही आगे की सैन्य और प्रशासनिक रणनीति तय करते हैं। वे पूर्व में दिए गए निर्देशों को जारी रख सकते हैं, उनमें बदलाव कर सकते हैं या उन्हें पूरी तरह निरस्त भी कर सकते हैं।

विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि अमेरिका के पास आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की विस्तृत योजनाएं हैं, लेकिन इनमें भी किसी स्वचालित मिसाइल या परमाणु हमले की व्यवस्था शामिल नहीं है।

ईरान की ओर से भी आया कड़ा संदेश

ट्रंप के बयान के कुछ समय बाद ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अपने संबोधन में कहा कि उनके देश ने अपने नेताओं और युद्ध में मारे गए लोगों के लिए न्याय और जवाबदेही का संकल्प लिया है।

ईरान में हाल में हुए सार्वजनिक कार्यक्रमों और प्रदर्शनों में भी अमेरिका और इजरायल के खिलाफ नारों की खबरें सामने आई हैं। इन घटनाओं ने दोनों देशों के बीच पहले से जारी तनाव को और अधिक बढ़ा दिया है।

ट्रंप की सुरक्षा को लेकर बढ़ीं चिंताएं

अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इजरायली खुफिया एजेंसियों ने अमेरिकी अधिकारियों को ट्रंप की सुरक्षा से जुड़े संभावित खतरों के बारे में सतर्क किया है।

रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि हाल के विदेशी दौरों के दौरान ट्रंप की सुरक्षा व्यवस्था में अतिरिक्त सावधानियां बरती गईं। इसी क्रम में उनके विमान के चयन और सुरक्षा उपकरणों को लेकर भी चर्चा हुई। हालांकि इन दावों पर संबंधित एजेंसियों की ओर से विस्तृत आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है।

युद्धविराम पर फिर मंडराने लगा संकट

अमेरिका और ईरान के बीच हाल के दिनों में बढ़े तनाव ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई आशंकाएं पैदा कर दी हैं। दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और कड़े बयानों के कारण पहले हुए युद्धविराम पर भी दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्ष कूटनीतिक संवाद को प्राथमिकता नहीं देते, तो पश्चिम एशिया में अस्थिरता और बढ़ सकती है। फिलहाल वैश्विक समुदाय दोनों देशों की अगली रणनीति और आधिकारिक कदमों पर नजर बनाए हुए है।

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