तेज प्रताप यादव पर हत्या की कोशिश का केस! जानिए किन धाराओं में बढ़ीं कानूनी मुश्किलें

 


Tej Pratap Yadav Case: हत्या की कोशिश समेत कई गंभीर धाराओं में केस, जानिए FIR में क्या-क्या आरोप लगे

तेज प्रताप यादव की कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। तेज प्रताप यादव के खिलाफ बिहार बंद के दौरान पटना में हुई हिंसा के मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। गांधी मैदान थाना कांड संख्या 400/26 में उन्हें और अन्य आरोपितों को नामजद किया गया है। पुलिस के अनुसार प्रदर्शन के दौरान हिंसा, पथराव और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं हुईं, जिनमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए। अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है और फिलहाल वे बेऊर केंद्रीय कारागार में हैं।

हत्या की कोशिश वाली धारा 109 क्यों बनी चर्चा का विषय?

एफआईआर में सबसे अधिक चर्चा BNS की धारा 109 को लेकर हो रही है। पुलिस ने इस धारा के तहत हत्या की कोशिश का आरोप लगाया है।

कानूनी प्रावधानों के अनुसार यदि अदालत में आरोप सिद्ध हो जाते हैं तो इस धारा के तहत 10 वर्ष तक की सजा और जुर्माना हो सकता है। वहीं यदि घटना में गंभीर चोट पहुंचने के तथ्य साबित होते हैं तो सजा उम्रकैद तक भी बढ़ सकती है।

हालांकि किसी भी मामले में अंतिम निर्णय अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर ही होता है।

किन-किन धाराओं में दर्ज हुई FIR?

पुलिस ने तेज प्रताप यादव और अन्य आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की कई धाराएं लगाई हैं।

इनमें लोक सेवक पर हमला, आपराधिक साजिश, दंगा, गैरकानूनी जमावड़ा, हथियार के साथ दंगा, लोक सेवक को चोट पहुंचाना, वैध आदेश की अवहेलना, विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य फैलाने, उकसावे और अन्य संबंधित आरोप शामिल हैं।

इसके अलावा Prevention of Damage to Public Property Act, 1984 की धारा 3 और 4 भी लगाई गई हैं। इन धाराओं का उपयोग सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामलों में किया जाता है।

पुलिस ने क्या आरोप लगाए हैं?

पुलिस का कहना है कि बिहार बंद के दौरान गांधी मैदान क्षेत्र में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी एकत्र हुए थे। प्रदर्शन के दौरान हालात बिगड़ गए और पथराव की घटना हुई।

पुलिस के अनुसार इस दौरान गांधी मैदान थाना प्रभारी अखिलेश मिश्रा, टॉप (TOP) प्रभारी प्रमोद कुमार सहित कई पुलिसकर्मी घायल हुए। इसके बाद पूरे मामले की जांच के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई।

जांच एजेंसियां घटना से जुड़े वीडियो फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों की भी पड़ताल कर रही हैं।

तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी कैसे हुई?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पुलिस ने शनिवार शाम तेज प्रताप यादव को पटना के एक शॉपिंग मॉल से गिरफ्तार किया था।

गिरफ्तारी के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायालय ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। इसके बाद उन्हें बेऊर सेंट्रल जेल भेज दिया गया।

मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया अदालत के निर्देशों के अनुसार जारी रहेगी।

बिहार बंद क्यों बुलाया गया था?

बिहार बंद का आह्वान NEET पेपर लीक, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में किया गया था।

इस दौरान पटना के गांधी मैदान इलाके में बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन के लिए पहुंचे थे। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान हिंसा और पथराव हुआ, जबकि प्रदर्शन से जुड़े पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे भी सामने आए हैं।

इसी घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

आगे क्या होगा?

अब इस मामले में अदालत की कार्यवाही और पुलिस जांच दोनों महत्वपूर्ण रहेंगी। यदि जांच के दौरान नए साक्ष्य सामने आते हैं तो आरोपों में बदलाव या नई कानूनी कार्रवाई भी संभव है।

वहीं आरोपित पक्ष को अदालत में अपना पक्ष रखने और कानूनी प्रक्रिया के तहत बचाव का पूरा अधिकार है। ऐसे मामलों में अंतिम फैसला न्यायालय द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी सुनवाई के आधार पर ही दिया जाता है।

इस वजह से यह मामला आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति और कानून व्यवस्था दोनों के लिहाज से चर्चा का विषय बना रह सकता है।

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