कौन हैं नंदन नीलेकणि? NEET पेपर लीक पर मोदी सरकार का बड़ा दांव!


 नंदन नीलेकणि एक बार फिर देश के सबसे बड़े बदलावों में अहम भूमिका निभाने जा रहे हैं। नंदन नीलेकणि को केंद्र सरकार ने NEET समेत राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ाने के लिए गठित हाई पावर टास्क फोर्स की जिम्मेदारी सौंपी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 जुलाई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इसकी जानकारी साझा की। लगातार सामने आए पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के बीच सरकार का यह फैसला परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

क्यों बनी हाई पावर टास्क फोर्स?

पिछले कुछ वर्षों में NEET सहित कई भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक तथा अन्य गड़बड़ियों के आरोप सामने आए। इन घटनाओं के बाद परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठे और लाखों छात्रों ने पारदर्शी व्यवस्था की मांग की।

इसी पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार ने तकनीक आधारित और अधिक सुरक्षित परीक्षा प्रणाली विकसित करने के उद्देश्य से हाई पावर टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की है।

सरकार का लक्ष्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना है जिसमें पेपर लीक, डेटा से छेड़छाड़ और परीक्षा संबंधी अपराधों की संभावना न्यूनतम हो।

कौन हैं नंदन नीलेकणि?

नंदन मोहनराव नीलेकणि का जन्म 2 जून 1955 को बेंगलुरु में हुआ था। उन्होंने आईआईटी बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और अपने करियर की शुरुआत पटनी कंप्यूटर सिस्टम्स से की।

वर्ष 1981 में उन्होंने एन. आर. नारायण मूर्ति और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर इंफोसिस की स्थापना की। वर्ष 2002 से 2007 तक वे कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रहे और बाद में 2017 में चेयरमैन के रूप में दोबारा जिम्मेदारी संभाली।

साल 2009 में तत्कालीन केंद्र सरकार ने उन्हें भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) का पहला प्रमुख नियुक्त किया। उनके नेतृत्व में आधार परियोजना को आकार मिला, जिसे दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल पहचान प्रणाली माना जाता है।

डिजिटल भुगतान प्रणाली UPI के शुरुआती ढांचे के विकास में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।

सरकार ने नीलेकणि को ही क्यों चुना?

सरकार का मानना है कि परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने के लिए केवल कड़े कानून पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए मजबूत डिजिटल ढांचा और तकनीकी समाधान भी जरूरी हैं।

नंदन नीलेकणि के पास बड़े स्तर पर डिजिटल पहचान, डेटा सुरक्षा और तकनीकी प्लेटफॉर्म विकसित करने का लंबा अनुभव है। आधार और डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में उनकी भूमिका को देखते हुए उन्हें इस जिम्मेदारी के लिए उपयुक्त माना गया।

उम्मीद की जा रही है कि उनकी अगुवाई में ऐसी तकनीकी प्रणाली तैयार होगी, जिससे परीक्षा प्रक्रिया अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बन सके।

परीक्षा कानून में भी होंगे बड़े बदलाव

टास्क फोर्स के साथ-साथ सरकार सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम, 2024 में भी संशोधन की तैयारी कर रही है।

प्रस्तावित बदलावों के अनुसार परीक्षा में धांधली करने वालों पर जुर्माना बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये तक किया जा सकता है। इसके अलावा अधिकतम 8 वर्ष तक की जेल का भी प्रावधान प्रस्तावित है।

सरकार परीक्षा अपराधों की जांच के लिए विशेष पुलिस टास्क फोर्स (STF) बनाने पर भी विचार कर रही है, ताकि ऐसे मामलों की जांच समयबद्ध तरीके से पूरी हो सके।

जांच और सुनवाई के लिए तय होगी समय सीमा

प्रस्तावित सुधारों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया को भी तेज करने की योजना शामिल है।

योजना के अनुसार एफआईआर दर्ज होने के दो महीने के भीतर जांच पूरी करने का लक्ष्य रखा जाएगा। इसके बाद विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में नियमित सुनवाई कर तीन महीने के भीतर फैसला सुनाने की व्यवस्था प्रस्तावित है।

फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसलों के खिलाफ हाई कोर्ट में दायर अपीलों का निपटारा भी निर्धारित समय सीमा में करने की योजना बनाई जा रही है।

छात्रों की उम्मीदें और आगे की चुनौती

NEET समेत कई परीक्षाओं में सामने आए विवादों के बाद लाखों छात्रों और अभिभावकों का भरोसा प्रभावित हुआ है।

अब नंदन नीलेकणि के नेतृत्व वाली हाई पावर टास्क फोर्स से उम्मीद है कि वह तकनीक और प्रशासन दोनों स्तरों पर ऐसे सुझाव देगी, जिनसे परीक्षा प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बन सके।

सरकार ने संकेत दिया है कि टास्क फोर्स अपनी सिफारिशें जल्द सौंपेगी। इसके बाद उन्हीं के आधार पर परीक्षा सुधारों का अगला चरण लागू किया जाएगा। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि आधार और डिजिटल भुगतान की तरह क्या भारत की परीक्षा प्रणाली में भी व्यापक और स्थायी बदलाव देखने को मिलेंगे।

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