NEET Exam में बड़ा बदलाव तय! सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांगा पूरा रोडमैप


 

NEET Exam की व्यवस्था में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। NEET Exam को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और संस्थागत बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से विस्तृत योजना मांगी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि परीक्षा केवल डिजिटल या कंप्यूटर आधारित बनाने से समस्या खत्म नहीं होगी, बल्कि डेटा सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।

शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब परीक्षा व्यवस्था को अस्थायी उपायों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। अदालत ने केंद्र सरकार को एक सप्ताह के भीतर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों जताई चिंता?

जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ NEET पेपर लीक और परीक्षा में जवाबदेही से जुड़ी विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही खामियों से बाहर निकलने के लिए स्थायी और संस्थागत व्यवस्था जरूरी है।

पीठ ने कहा कि भविष्य में ऐसी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, जिसमें परीक्षा की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और भरोसेमंद हो।

कंप्यूटर आधारित परीक्षा पर क्या सवाल उठाए गए?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि NEET को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित परीक्षा बनाया जाता है, तब भी डेटा लीक का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होगा।

अदालत ने केंद्र सरकार से पूछा कि—

  • परीक्षा का डेटा सुरक्षित रखने की क्या व्यवस्था होगी?
  • साइबर सुरक्षा की जिम्मेदारी किस संस्था के पास होगी?
  • उम्मीदवारों का सत्यापन किस प्रक्रिया से किया जाएगा?
  • डिजिटल परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने के लिए कौन-कौन से तकनीकी उपाय अपनाए जाएंगे?

कोर्ट ने साफ किया कि केवल तकनीक अपनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

राधाकृष्णन समिति की रिपोर्ट पर भी मांगा जवाब

सुनवाई के दौरान अदालत ने राधाकृष्णन समिति की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया।

इस रिपोर्ट में परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए कई सुझाव दिए गए हैं, जिनमें कंप्यूटर आधारित परीक्षा, मजबूत निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही बढ़ाने जैसे बिंदु शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा कि इन सुझावों को लागू करने की उसकी क्या योजना है और इन्हें किस समयसीमा में लागू किया जाएगा।

परीक्षा के तीनों चरणों की मांगी पूरी जानकारी

सुप्रीम कोर्ट ने केवल परीक्षा वाले दिन की व्यवस्था पर ही नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

अदालत ने सरकार से परीक्षा के तीनों चरणों का विस्तृत रोडमैप मांगा—

1. परीक्षा से पहले

  • परीक्षा केंद्रों का चयन कैसे होगा?
  • अलग-अलग राज्यों और जिलों में कौन संस्थाएं परीक्षा कराएंगी?
  • उनकी जवाबदेही कैसे तय होगी?

2. परीक्षा के दौरान

  • परीक्षा की निगरानी कैसे होगी?
  • उम्मीदवारों की पहचान और सत्यापन कैसे किया जाएगा?
  • तकनीकी गड़बड़ियों से कैसे निपटा जाएगा?

3. परीक्षा के बाद

  • उत्तर पुस्तिकाओं और डिजिटल डेटा की सुरक्षा कैसे होगी?
  • परिणाम प्रक्रिया को पारदर्शी कैसे बनाया जाएगा?
  • किसी शिकायत की स्थिति में क्या व्यवस्था होगी?

प्रश्नपत्र की सुरक्षा पर भी कोर्ट की नजर

सुनवाई के दौरान प्रश्नपत्र छापने और उन्हें परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था पर भी चर्चा हुई।

अदालत ने कहा कि इस वर्ष प्रश्नपत्रों के सुरक्षित परिवहन के लिए भारतीय वायुसेना (IAF) की मदद ली गई थी, लेकिन यह एक अस्थायी उपाय था।

कोर्ट ने संकेत दिया कि भविष्य में ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी, जो हर वर्ष बिना विशेष अस्थायी इंतजाम के सुरक्षित तरीके से काम कर सके।

सरकार ने क्या कहा?

केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि कुछ महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आने वाले हैं, इसलिए सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए थोड़ा अतिरिक्त समय चाहिए।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए व्यापक सुधारों पर काम चल रहा है।

सरकार ने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर वह राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों से आगे बढ़कर भी कदम उठा सकती है।

छात्रों के लिए इस फैसले का क्या मतलब है?

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि आने वाले समय में NEET परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

यदि सरकार व्यापक सुधार लागू करती है, तो परीक्षा प्रक्रिया अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बन सकती है। इससे पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने में मदद मिलने की उम्मीद है।

हालांकि, अंतिम निर्णय अदालत में दाखिल होने वाले सरकार के विस्तृत हलफनामे और आगामी सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।

अब आगे क्या होगा?

केंद्र सरकार को एक सप्ताह के भीतर अदालत में विस्तृत हलफनामा दाखिल करना है। इसमें डेटा सुरक्षा, साइबर सिक्योरिटी, परीक्षा संचालन, डिजिटल व्यवस्था और संस्थागत सुधारों से जुड़े सभी सवालों के जवाब देने होंगे।

अब सभी की नजर 3 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई पर रहेगी, जहां अदालत सरकार की योजना की समीक्षा करेगी और आगे की दिशा तय हो सकती है।

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