Sonam Wangchuk और CJP की राहें अलग? NEET आंदोलन में नया मोड़


 Sonam Wangchuk के 26 दिन बाद अनशन समाप्त करने के फैसले ने Sonam Wangchuk और NEET Paper Leak आंदोलन को नई दिशा दे दी है। सरकार से लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने भूख हड़ताल खत्म कर दी, लेकिन आंदोलन से जुड़े दूसरे प्रमुख समूह कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपना विरोध जारी रखने का ऐलान किया है। दोनों पक्षों का लक्ष्य परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करना बताया जा रहा है, लेकिन मौजूदा स्थिति में उनकी रणनीतियां अलग-अलग दिखाई दे रही हैं।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन के बीच यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब केंद्र सरकार पेपर लीक रोकने के लिए नया कानून और फास्ट-ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था लाने की तैयारी कर रही है। ऐसे में आंदोलन की अगली दिशा पर सभी की नजर बनी हुई है।

26 दिन बाद Sonam Wangchuk ने क्यों खत्म किया अनशन?

सामाजिक कार्यकर्ता Sonam Wangchuk ने 23 जुलाई की रात मेदांता अस्पताल में अपना अनशन समाप्त किया। उनके अनुसार, सरकार की ओर से कुछ प्रमुख मांगों पर लिखित आश्वासन मिलने के बाद यह फैसला लिया गया।

केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में अनशन समाप्त हुआ। इसके बाद Sonam Wangchuk ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए लिखा, "भूख का अंत, जवाबदेही की शुरुआत।"

उन्होंने संकेत दिया कि अब आंदोलन का अगला चरण संवाद और संस्थागत सुधारों पर केंद्रित रहेगा।

सरकार ने किन तीन मुद्दों पर दिया भरोसा?

Sonam Wangchuk के अनुसार, सरकार ने तीन प्रमुख बिंदुओं पर सकारात्मक आश्वासन दिया है।

  • 20 जुलाई के "संसद चलो" मार्च और जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले युवाओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने पर सकारात्मक विचार।
  • NEET Paper Leak से प्रभावित होकर जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने के प्रस्ताव पर विचार।
  • परीक्षा प्रणाली में सुधार और पेपर लीक रोकने के उपायों पर संसद में विस्तृत चर्चा।

हालांकि, इन लिखित आश्वासनों में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का उल्लेख नहीं किया गया।

CJP ने क्यों जारी रखा आंदोलन?

यहीं से आंदोलन की रणनीति में अंतर साफ दिखाई देता है।

CJP का कहना है कि उसकी प्रमुख मांग अब भी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। पार्टी का दावा है कि जब तक इस मांग पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी रहेगा।

पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी सार्वजनिक रूप से कहा कि उनका आंदोलन अपनी मूल मांगों के साथ जारी रहेगा।

ध्यान देने वाली बात यह भी रही कि Sonam Wangchuk के अनशन समाप्त करने से जुड़ा वीडियो खबर लिखे जाने तक CJP के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा नहीं किया गया था। हालांकि, किसी भी पक्ष ने इसे मतभेद का आधिकारिक संकेत नहीं बताया है।

क्या दोनों के बीच मतभेद है या सिर्फ रणनीति अलग?

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना उचित होगा कि दोनों पक्षों की प्राथमिकताओं में अंतर दिखाई दे रहा है, लेकिन किसी ने भी सार्वजनिक रूप से रिश्तों में दरार की पुष्टि नहीं की है।

Sonam Wangchuk ने लिखित आश्वासन मिलने के बाद आंदोलन के एक चरण को समाप्त किया, जबकि CJP का मानना है कि जवाबदेही तय करने के लिए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

इसलिए इसे फिलहाल रणनीतिक अंतर के रूप में देखा जा रहा है, न कि औपचारिक मतभेद के रूप में।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन अभी भी जारी

Sonam Wangchuk के अनशन समाप्त होने के बावजूद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन खत्म नहीं हुआ है।

CJP के आह्वान पर प्रदर्शनकारी अब भी धरने पर मौजूद हैं। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने कई स्थानों पर अतिरिक्त बल तैनात किया है।

कुछ इलाकों में एहतियात के तौर पर सुरक्षा इंतजाम बढ़ाए गए हैं। इसी बीच संसद के मानसून सत्र में भी परीक्षा पेपर लीक का मुद्दा लगातार उठ रहा है।

पेपर लीक पर सरकार का अगला कदम क्या है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की है कि सरकार परीक्षा पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून लाने की तैयारी कर रही है।

सरकार का कहना है कि प्रस्तावित कानून में फास्ट-ट्रैक कोर्ट और दोषियों के खिलाफ कठोर दंड का प्रावधान शामिल होगा। इसके अलावा परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के उपायों पर भी काम किया जा रहा है।

वहीं विपक्ष और आंदोलन से जुड़े कुछ संगठनों का कहना है कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि जवाबदेही तय करना भी जरूरी है।

आगे आंदोलन किस दिशा में जाएगा?

आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारी समूहों के बीच होने वाली बातचीत काफी अहम मानी जा रही है।

यदि लिखित आश्वासनों पर ठोस कार्रवाई होती है, तो आंदोलन की दिशा बदल सकती है। वहीं यदि प्रमुख मांगों पर सहमति नहीं बनती, तो जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और तेज होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि सभी पक्ष परीक्षा प्रणाली में सुधार और पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं, लेकिन वहां तक पहुंचने के रास्ते अलग-अलग दिखाई दे रहे हैं।

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