Share Market Today: सेंसेक्स-निफ्टी फिसले, इन सेक्टरों ने बचाई बाजार की लाज


 

Share Market Today में भारतीय शेयर बाजार वैश्विक संकेतों के दबाव में कमजोरी के साथ बंद हुआ। Share Market Today के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में रहे, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और विदेशी निवेश प्रवाह में सुस्ती ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया, हालांकि कुछ सेक्टरों में खरीदारी ने बाजार को बड़ी गिरावट से बचाए रखा।

मंगलवार के कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 238.41 अंक यानी 0.31% की गिरावट के साथ 77,470.11 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 भी 50.80 अंक यानी 0.21% टूटकर 24,187.70 के स्तर पर बंद हुआ।

इन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा दिखा दबाव

दिनभर के कारोबार में सरकारी बैंकिंग शेयरों में बिकवाली का दबाव सबसे अधिक रहा। निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स 0.88% की गिरावट के साथ सबसे कमजोर सेक्टर रहा।

इसके अलावा आईटी, ऑयल एंड गैस, एफएमसीजी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और मीडिया सेक्टर भी कमजोरी के साथ बंद हुए। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता और निवेशकों की सतर्क रणनीति के कारण इन सेक्टरों में मुनाफावसूली देखने को मिली।

दूसरी ओर, रियल्टी, ऑटो, मेटल, हेल्थकेयर और फार्मा शेयरों में अच्छी खरीदारी दर्ज की गई। खासकर रियल्टी इंडेक्स में 1% से अधिक की तेजी ने निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया।

किन शेयरों में रही सबसे ज्यादा हलचल?

सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में बजाज फिनसर्व, इंडिगो, अल्ट्राटेक सीमेंट, एचसीएल टेक, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाइटन, कोटक महिंद्रा बैंक, मारुति सुजुकी, टाटा स्टील, बीईएल, बजाज फाइनेंस, भारती एयरटेल, सन फार्मा, एनटीपीसी और एलएंडटी बढ़त के साथ बंद हुए।

वहीं एचडीएफसी बैंक, एसबीआई, टीसीएस, रिलायंस इंडस्ट्रीज, इन्फोसिस, पावर ग्रिड, ट्रेंट, आईटीसी और इटरनल जैसे दिग्गज शेयरों में गिरावट देखने को मिली। लार्जकैप कंपनियों में कमजोरी का असर पूरे बाजार पर दिखाई दिया।

हालांकि व्यापक बाजार का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा। निफ्टी स्मॉलकैप 100 करीब 0.53% की बढ़त के साथ 19,428.05 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 0.30% की मजबूती के साथ 62,987.60 पर पहुंच गया।

बाजार में गिरावट की बड़ी वजह क्या रही?

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा समय में निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। इन दोनों कारणों का असर बड़े शेयरों पर अधिक दिखाई दे रहा है।

इसके अलावा विदेशी निवेश प्रवाह (FII Flow) में नरमी और वैश्विक बाजारों की कमजोर धारणा भी निवेशकों को सतर्क बनाए हुए है। यही वजह रही कि लार्जकैप शेयरों में दबाव देखने को मिला।

हालांकि सकारात्मक पक्ष यह रहा कि मजबूत कॉरपोरेट आय (Corporate Earnings) और कई कंपनियों के बेहतर कारोबारी अपडेट के कारण मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में खरीदारी बनी रही। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सेगमेंट में फिलहाल निवेशकों की रुचि बनी हुई है।

निवेशकों के लिए आगे क्या संकेत हैं?

विश्लेषकों का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आती है और वैश्विक तनाव कम होता है, तो भारतीय शेयर बाजार में फिर से मजबूती लौट सकती है।

हालांकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों के ऊंचे वैल्यूएशन को देखते हुए निवेशकों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। किसी भी निवेश से पहले कंपनी के फंडामेंटल, जोखिम और बाजार की स्थिति का आकलन करना जरूरी है।

फिलहाल बाजार की दिशा आगामी कॉरपोरेट नतीजों, वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कच्चे तेल की चाल पर निर्भर करेगी।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले किसी प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।

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