Sanchita Bashu Success Story: भागलपुर की रील गर्ल से OTT स्टार बनने तक का सफर

 


Sanchita Bashu Success Story इन दिनों सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत में चर्चा का विषय बनी हुई है। Sanchita Bashu Success Story उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो छोटे शहरों से बड़े सपने लेकर आगे बढ़ना चाहते हैं। बिहार के भागलपुर में रील्स बनाकर पहचान बनाने वाली संचिता बसु आज लोकप्रिय OTT अभिनेत्री के रूप में अपनी अलग जगह बना चुकी हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने शुरुआती संघर्ष, परिवार के सहयोग और अभिनय करियर से जुड़े कई दिलचस्प अनुभव साझा किए।

आज संचिता बसु केवल सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर नहीं, बल्कि ऐसे युवा चेहरे के रूप में देखी जा रही हैं जिन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म से अभिनय की दुनिया तक सफल सफर तय किया है।

मां के कपड़े पहनकर बनाती थीं रील्स

संचिता बसु ने बताया कि उनके अभिनय और सोशल मीडिया सफर की शुरुआत बेहद साधारण तरीके से हुई थी।

उन्होंने कहा कि उनकी मां 90 के दशक के हिंदी गानों की बड़ी शौकीन हैं और वही उनके लिए गाने चुनती थीं। स्कूल से लौटने के बाद संचिता अपनी मां के कपड़े पहनकर वीडियो रिकॉर्ड करती थीं।

उन्होंने यह भी बताया कि शुरुआत में उनका सोशल मीडिया अकाउंट भी उनकी मां ही संभालती थीं और वही वीडियो अपलोड करती थीं। उस समय उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि यही शौक उन्हें अभिनय की दुनिया तक पहुंचा देगा।

साउथ फिल्म से मिला पहला बड़ा मौका

सोशल मीडिया पर लोकप्रिय होने के बाद संचिता बसु को साल 2022 में अपनी पहली फिल्म 'फर्स्ट डे, फर्स्ट शो' में काम करने का अवसर मिला।

यह एक रोमांटिक फिल्म थी, जिसमें उन्होंने एक सरल और भावनात्मक किरदार निभाया। इस फिल्म ने उन्हें अभिनय के क्षेत्र में नई पहचान दिलाई और आगे के अवसरों के रास्ते खोले।

इसके बाद उन्होंने लगातार अपने अभिनय कौशल पर काम किया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी अलग पहचान बनाई।

'ठुकरा के मेरा प्यार' से मिली नई पहचान

संचिता बसु को सबसे अधिक लोकप्रियता OTT सीरीज़ 'ठुकरा के मेरा प्यार' से मिली।

इस सीरीज़ में उन्होंने 'सान्विका' का किरदार निभाया, जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया। उन्होंने इंटरव्यू में कहा कि वह ऐसे किरदार चुनना चाहती हैं जिन्हें पूरा परिवार एक साथ बैठकर देख सके।

उनके मुताबिक दर्शकों से मिले सकारात्मक फीडबैक ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया और बेहतर काम करने की प्रेरणा दी।

सीरीज़ के दूसरे सीजन में उनके किरदार की कहानी नए मोड़ के साथ आगे बढ़ती है, जिसे दर्शकों का अच्छा समर्थन मिल रहा है।

परिवार बना सबसे बड़ी ताकत

संचिता बसु ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को दिया।

उन्होंने बताया कि उनकी मां उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा हैं, जबकि पिता हमेशा उनका हौसला बढ़ाते रहे। हालांकि उनके माता-पिता चाहते थे कि वह अलग करियर चुनें।

संचिता के अनुसार उनके पिता चाहते थे कि वह UPSC की तैयारी करें, जबकि उनकी मां उन्हें डॉक्टर बनते देखना चाहती थीं। लेकिन उन्होंने कहा कि जीवन में वही होता है जो किस्मत में लिखा होता है।

सरनेम को लेकर भी दूर किया बड़ा भ्रम

संचिता बसु ने अपने नाम को लेकर भी एक दिलचस्प बात साझा की।

उन्होंने बताया कि कई लोग उनके सरनेम 'बसु' को देखकर उन्हें बंगाली समझ लेते हैं, जबकि ऐसा नहीं है।

उनके अनुसार उनका सरनेम उनके माता-पिता के नामों से मिलकर बना है। उनकी मां का नाम बीना और पिता का नाम सुरेंद्र है। दोनों नामों के मेल से 'बसु' नाम बना, जिसका किसी जातीय या भाषाई पहचान से संबंध नहीं है।

बिहार से है गहरा जुड़ाव

संचिता बसु का परिवार मूल रूप से बिहार के सहरसा जिले के सिथुहा गांव से जुड़ा हुआ है।

उनका जन्म 24 मार्च 2003 को हुआ। परिवार में माता-पिता के अलावा दो बहनें और एक भाई हैं।

हालांकि उनका पालन-पोषण भागलपुर में हुआ, लेकिन उन्होंने हमेशा अपनी बिहार की जड़ों को अपनी पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है।

युवाओं के लिए प्रेरणा बनी सफलता की कहानी

संचिता बसु की यात्रा यह दिखाती है कि प्रतिभा और निरंतर मेहनत के दम पर छोटे शहरों से भी बड़े मंच तक पहुंचा जा सकता है।

रील्स से शुरुआत करने वाली एक साधारण छात्रा आज OTT प्लेटफॉर्म पर अपनी अभिनय क्षमता के लिए सराही जा रही हैं। उनकी कहानी सोशल मीडिया का सकारात्मक उपयोग, परिवार के सहयोग और लगातार सीखते रहने की प्रेरणा देती है।

मनोरंजन जगत में उनकी बढ़ती लोकप्रियता यह भी बताती है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म नए कलाकारों के लिए बड़े अवसर लेकर आए हैं। आने वाले समय में दर्शकों को उनसे कई नए प्रोजेक्ट्स की उम्मीद रहेगी।

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