सम्राट कैबिनेट के बड़े फैसले: 22 हजार भर्ती, चीनी मिलें और नए पुलों को मंजूरी

सम्राट कैबिनेट की बुधवार को हुई अहम बैठक में राज्य के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगी। सम्राट कैबिनेट ने महिलाओं के रोजगार, किसानों की आय, आधारभूत संरचना, पेयजल और औद्योगिक विकास को ध्यान में रखते हुए कई बड़ी योजनाओं को मंजूरी दी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बैठक के बाद सोशल मीडिया के माध्यम से इन फैसलों की जानकारी साझा की। सरकार का दावा है कि इन निर्णयों का लाभ महिलाओं, किसानों, युवाओं और आम लोगों तक सीधे पहुंचेगा।
22 हजार आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका की होगी भर्ती
कैबिनेट की सबसे बड़ी घोषणा समेकित बाल विकास सेवाओं (ICDS) के तहत 22 हजार आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका पदों पर भर्ती की रही। सरकार के अनुसार, इस भर्ती से राज्य में आंगनबाड़ी सेवाओं को और मजबूत किया जाएगा। साथ ही बड़ी संख्या में महिलाओं को रोजगार का अवसर मिलेगा। लंबे समय से रिक्त पदों पर नियुक्ति होने से बच्चों और माताओं को मिलने वाली सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार आने की उम्मीद है।
बंद चीनी मिलों में फिर शुरू होगी औद्योगिक गतिविधि
कैबिनेट ने दरभंगा के रैयाम और मधुबनी के सकरी स्थित बंद पड़े चीनी मिल परिसरों में नई सहकारी चीनी मिलों की स्थापना को मंजूरी दी है। इन परिसरों में गन्ना उपोत्पाद (बाय-प्रोडक्ट) आधारित उद्योग भी विकसित किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे गन्ना किसानों को बेहतर बाजार मिलेगा और मिथिलांचल क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियां तेज होंगी। स्थानीय युवाओं के लिए भी रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है।
जमुई में दो नए आरसीसी पुलों का होगा निर्माण
पथ निर्माण विभाग ने जमुई जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-333A पर दो उच्चस्तरीय आरसीसी पुलों के निर्माण को प्रशासनिक स्वीकृति दी है। पहला पुल खैरा-सोनो मार्ग के 72वें किलोमीटर पर नरियाना घाट (क्यूल नदी) पर बनाया जाएगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत 93.82 करोड़ रुपये है। दूसरा पुल खैरा-सोनो मार्ग के 80वें किलोमीटर पर मंगोबंदर-सुकनर नदी पर बनेगा, जिस पर लगभग 55.96 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इन पुलों के निर्माण से लोगों की आवाजाही आसान होगी और व्यापार, कृषि तथा स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।
अमृत 2.0 के तहत जलापूर्ति परियोजनाओं को मंजूरी
कैबिनेट बैठक में केंद्र प्रायोजित अमृत 2.0 मिशन के तहत दो महत्वपूर्ण जलापूर्ति परियोजनाओं को भी स्वीकृति दी गई।
- लखीसराय जलापूर्ति परियोजना – 150.96 करोड़ रुपये
- किशनगंज जलापूर्ति परियोजना – 53.71 करोड़ रुपये
सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद लाखों परिवारों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध होगा। साथ ही शहरी क्षेत्रों की आधारभूत सुविधाएं भी मजबूत होंगी।
सब्जी प्रसंस्करण और विपणन योजना को मिली मंजूरी
कैबिनेट ने बिहार राज्य सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन योजना के लिए 106.39 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी दी। इस योजना के तहत वेजफेड की त्रि-स्तरीय सहकारी व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। प्रखंड स्तर पर नई आधारभूत सुविधाएं विकसित होंगी, सहकारी समितियों को कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराई जाएगी और सब्जियों के सुरक्षित परिवहन के लिए रीफर वाहनों की व्यवस्था की जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे किसानों को बेहतर बाजार मिलेगा और कृषि उत्पादों के नुकसान में कमी आएगी।
किन लोगों को मिलेगा सबसे अधिक लाभ?
कैबिनेट के फैसलों का असर कई वर्गों पर पड़ने की संभावना है।
- महिलाओं के लिए 22 हजार रोजगार के अवसर तैयार होंगे।
- गन्ना किसानों को बेहतर विपणन व्यवस्था मिल सकती है।
- सब्जी उत्पादकों को प्रसंस्करण और परिवहन की बेहतर सुविधा मिलेगी।
- जमुई में पुल बनने से क्षेत्रीय संपर्क मजबूत होगा।
- लखीसराय और किशनगंज में पेयजल परियोजनाओं से लाखों लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
- औद्योगिक गतिविधियों और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिल सकता है।
बिहार के विकास एजेंडे पर सरकार का फोकस
कैबिनेट के ताजा फैसलों से साफ संकेत मिलता है कि सरकार रोजगार, ग्रामीण विकास, कृषि, उद्योग और आधारभूत संरचना को प्राथमिकता देने की दिशा में आगे बढ़ रही है। यदि इन परियोजनाओं का समय पर क्रियान्वयन होता है तो राज्य में रोजगार सृजन, किसानों की आय बढ़ाने, बेहतर कनेक्टिविटी और शहरी सुविधाओं के विस्तार में मदद मिल सकती है। हालांकि इन योजनाओं की वास्तविक सफलता उनके प्रभावी और समयबद्ध कार्यान्वयन पर निर्भर करेगी।