RJD में बढ़ी अंदरूनी तकरार, रोहिणी आचार्य ने पार्टी नेतृत्व पर उठाए सवाल
RJD विवाद एक बार फिर चर्चा में है। RJD विवाद के बीच राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अध्यक्ष लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य ने सारण जिला के पार्टी प्रवक्ता हरेलाल यादव के निष्कासन को लेकर पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा कि किसी ईमानदार और जमीनी कार्यकर्ता को बिना ठोस कारण के निशाना बनाना उचित नहीं है। उन्होंने इसे संगठन के हित के खिलाफ बताया और पार्टी के भीतर काम कर रहे कुछ नेताओं पर भी गंभीर आरोप लगाए।
रोहिणी आचार्य के इस बयान के बाद पार्टी के अंदरूनी मतभेदों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, पार्टी की ओर से उनके ताजा बयान पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
हरेलाल यादव के निष्कासन पर क्या बोलीं रोहिणी आचार्य?
रोहिणी आचार्य ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि सारण जिला के पार्टी प्रवक्ता हरेलाल यादव को अनुशासनहीनता के आरोप में छह वर्ष के लिए निष्कासित करना दुर्भाग्यपूर्ण फैसला है।
उन्होंने लिखा कि किसी भी ईमानदार, समर्पित और जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ता या जिला पदाधिकारी को बिना उचित कारण के निशाना बनाना पार्टी के हित में नहीं है।
उनका कहना है कि ऐसे फैसलों से संगठन कमजोर होता है और कार्यकर्ताओं का मनोबल प्रभावित हो सकता है।
पार्टी के कुछ नेताओं पर लगाए गंभीर आरोप
रोहिणी आचार्य ने अपने पोस्ट में कुछ नेताओं का नाम लेते हुए उन पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि यदि पार्टी में सवाल उठाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करनी है तो सबसे पहले उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि वह अभी भी पार्टी की सदस्य हैं और संगठन के हित में अपनी बात आगे भी रखती रहेंगी।
उन्होंने यह भी लिखा कि वह गलत के सामने झुकने वाली नहीं हैं और पार्टी को कुछ लोगों के प्रभाव से मुक्त कराने की बात दोहराई।
तेजस्वी यादव का नाम लिए बिना साधा निशाना
रोहिणी आचार्य ने अपने बयान में किसी वरिष्ठ नेता का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, लेकिन उनके पोस्ट को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि संगठन के भीतर ऐसे लोग सक्रिय हैं जो पार्टी को कमजोर करने का काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, पार्टी हित में काम करने वाले लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।
हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित नेताओं की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
संगठन और कार्यकर्ताओं को लेकर भी उठाए सवाल
अपने पोस्ट में रोहिणी आचार्य ने सवाल किया कि क्या अब पार्टी में ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ काम करने वालों के लिए जगह नहीं बची है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सारण जिले में संगठन की जिम्मेदारी ऐसे लोगों के हाथों में चली गई है जो चुनाव के दौरान पार्टी के हित में सक्रिय नहीं रहे।
साथ ही उन्होंने कहा कि कई जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी निष्क्रिय बने रहे, जबकि जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।
पहले भी चर्चा में रह चुकी हैं रोहिणी आचार्य
रोहिणी आचार्य इससे पहले भी अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रही हैं।
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने सारण संसदीय सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन और पारिवारिक मतभेदों को लेकर भी उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की थी।
उन्होंने पहले राजनीति से दूरी बनाने और परिवार से संबंध समाप्त करने की घोषणा भी की थी, जिसके बाद उनके बयान लगातार चर्चा में रहे।
क्या है पूरा मामला?
मामले की शुरुआत सारण जिला के पार्टी प्रवक्ता हरेलाल यादव के छह वर्ष के निष्कासन से हुई।
पार्टी ने अनुशासनहीनता के आरोप में यह कार्रवाई की है। इसी फैसले पर रोहिणी आचार्य ने सार्वजनिक रूप से आपत्ति जताई और संगठन के भीतर फैसलों की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए।
फिलहाल पार्टी की ओर से इस पूरे विवाद पर विस्तृत आधिकारिक बयान का इंतजार है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर पार्टी का रुख और आगे की कार्रवाई स्पष्ट हो सकती है।
राजनीतिक दृष्टि से क्यों अहम है यह मामला?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी बड़े दल के वरिष्ठ परिवार से जुड़े नेता द्वारा सार्वजनिक मंच पर संगठनात्मक फैसलों पर सवाल उठाना स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन जाता है।
हालांकि, इस विवाद का संगठन या भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर क्या असर पड़ेगा, यह आने वाले समय में पार्टी के आधिकारिक रुख और आगे की घटनाओं पर निर्भर करेगा।
