NEET UG 2026 पेपर लीक केस में CBI की पहली चार्जशीट, 13 आरोपी बेनकाब
NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने पहली चार्जशीट दाखिल कर जांच को अहम मोड़ पर पहुंचा दिया है। NEET UG 2026 पेपर लीक की जांच में गिरफ्तार किए गए सभी 13 आरोपियों के नाम चार्जशीट में शामिल किए गए हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि प्रश्नपत्र लीक करने के लिए विषय विशेषज्ञों, कोचिंग संस्थानों और बिचौलियों का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय था। यह कार्रवाई देशभर में हुए छात्र विरोध प्रदर्शन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के कुछ दिनों बाद सामने आई है।
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में CBI ने कई दस्तावेज, गवाहों के बयान और तकनीकी साक्ष्यों का हवाला देते हुए आरोपियों की कथित भूमिका का विवरण दिया है। मामले की सुनवाई अब न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगी।
चार्जशीट में किन लोगों के नाम शामिल हैं?
CBI की चार्जशीट में कुल 13 आरोपियों को नामजद किया गया है। इनमें प्रोफेसर पी.वी. कुलकर्णी प्रमुख आरोपी के रूप में शामिल हैं।
जांच एजेंसी के अनुसार, कुलकर्णी वर्ष 2019 से नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के केमिस्ट्री एक्सपर्ट पैनल का हिस्सा थे। आरोप है कि उन्हें प्रश्नपत्र का पूरा एक्सेस था क्योंकि अंग्रेजी से मराठी में अनुवाद की जिम्मेदारी उनके पास थी।
इसके अलावा NTA पैनल की विषय विशेषज्ञ मनीषा हवालदार और मनीषा मांधरे के नाम भी चार्जशीट में शामिल हैं। CBI का आरोप है कि दोनों को परीक्षा के अलग-अलग विषयों से संबंधित प्रश्नों की जानकारी थी।
CBI ने क्या लगाए हैं आरोप?
CBI का दावा है कि प्रश्नपत्र लीक करने के बाद उसे एक कथित नेटवर्क के माध्यम से आगे पहुंचाया गया।
जांच एजेंसी के मुताबिक, इस नेटवर्क में कुछ कोचिंग संस्थानों के संचालक, काउंसलिंग सेंटर चलाने वाले लोग और अन्य बिचौलिए शामिल थे। आरोप है कि प्रश्नपत्र छात्रों और उनके परिवारों तक कथित रूप से 50 हजार रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक लेकर पहुंचाया गया।
जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस पूरे नेटवर्क का उद्देश्य आर्थिक लाभ कमाने के साथ-साथ कुछ कोचिंग संस्थानों के छात्रों का परिणाम बेहतर दिखाना था।
विशेष क्लास में प्रश्न लिखवाने का आरोप
CBI के अनुसार, प्रोफेसर कुलकर्णी ने कथित तौर पर कुछ छात्रों के लिए विशेष कक्षाएं आयोजित कीं।
जांच एजेंसी का आरोप है कि इन कक्षाओं में प्रश्न, विकल्प और उनके उत्तर छात्रों को बोलकर लिखवाए गए। बाद में जब छात्रों की कॉपियों की जांच की गई, तो उनमें लिखे गए कई प्रश्न वास्तविक NEET-UG प्रश्नपत्र से काफी हद तक मेल खाते पाए गए।
हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
डिजिटल सबूत और बैंक खाते भी जांच के दायरे में
CBI ने बताया कि जांच के दौरान कई बैंक खाते, बैंक लॉकर और एक डीमैट खाता फ्रीज किया गया है।
जांच एजेंसी के अनुसार, डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट, हैंडराइटिंग विशेषज्ञों की राय और अकादमिक विशेषज्ञों की रिपोर्ट भी जुटाई गई हैं। एजेंसी का दावा है कि इन साक्ष्यों से परीक्षा से पहले प्रश्नों के कथित प्रसार में आरोपियों की भूमिका के संकेत मिले हैं।
360 गवाह और 422 दस्तावेजों का हवाला
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में CBI ने 360 गवाहों, 422 दस्तावेजों और 43 भौतिक साक्ष्यों का उल्लेख किया है।
एजेंसी ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, साक्ष्य नष्ट करने और अन्य आरोप लगाए हैं।
इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तथा सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत भी कार्रवाई की गई है।
आगे क्या होगा?
चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब अदालत इस मामले में आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा करेगी। इसके बाद न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे की सुनवाई होगी।
यदि अदालत आरोप तय करती है, तो मुकदमे की नियमित सुनवाई शुरू होगी। वहीं, आरोपियों को अदालत में अपना पक्ष रखने और आरोपों का जवाब देने का अवसर भी मिलेगा।
यह मामला देश की प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता से जुड़ा होने के कारण लगातार चर्चा में बना हुआ है। आने वाले समय में अदालत की कार्यवाही और जांच से जुड़े नए घटनाक्रम पर सभी की नजर रहेगी।
