जयपुर जनाना अस्पताल में 3 घंटे ब्लैकआउट, टॉर्च की रोशनी में पूरी हुई सिजेरियन सर्जरी

जयपुर जनाना अस्पताल में गुरुवार सुबह बिजली गुल होने से स्वास्थ्य सेवाएं करीब तीन घंटे तक प्रभावित रहीं। जयपुर जनाना अस्पताल में एक गर्भवती महिला का सिजेरियन ऑपरेशन पूरा होने के बाद डॉक्टर टांके लगा रहे थे, तभी अचानक बिजली चली गई। ऐसी स्थिति में मेडिकल टीम ने टॉर्च और वैकल्पिक रोशनी की मदद से प्रक्रिया पूरी की। घटना ने अस्पताल की बिजली बैकअप व्यवस्था और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
करीब 10:30 बजे शुरू हुआ बिजली संकट दोपहर 1:50 बजे तक जारी रहा। इस दौरान अस्पताल के कई विभागों में सामान्य कामकाज प्रभावित रहा और मरीजों के साथ उनके परिजनों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
अस्पताल के कई विभागों पर पड़ा असर
बिजली जाते ही ग्राउंड फ्लोर स्थित लेबर रूम, ओपीडी, जांच केंद्र, वार्ड और गलियारों में अंधेरा छा गया। लिफ्ट बंद होने से मरीजों और स्टाफ को अतिरिक्त परेशानी हुई।
भीषण गर्मी के बीच भर्ती महिलाओं, नवजात शिशुओं और उनके परिजनों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। अस्पताल में रोजाना लगभग 700 मरीज ओपीडी सेवाएं लेते हैं। बिजली बाधित होने से ऑनलाइन पर्ची व्यवस्था ठप हो गई और कर्मचारियों को ऑफलाइन पर्चियां बनानी पड़ीं।
मोबाइल टॉर्च की रोशनी में डॉक्टरों ने मरीजों की जांच जारी रखी, जबकि कई जांच सेवाएं अस्थायी रूप से रोकनी पड़ीं।
ऑपरेशन थिएटर में टॉर्च की रोशनी से लगाए गए टांके
बिजली कटौती का सबसे गंभीर असर मुख्य ऑपरेशन थिएटर में देखने को मिला। एक गर्भवती महिला का सिजेरियन ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा हो चुका था और डॉक्टर केवल अंतिम टांके लगा रहे थे। तभी अचानक बिजली चली गई।
मेडिकल टीम ने बिना घबराए टॉर्च और उपलब्ध वैकल्पिक रोशनी की मदद से टांके लगाने की प्रक्रिया पूरी की। अस्पताल प्रशासन के अनुसार ऑपरेशन सुरक्षित तरीके से पूरा हुआ और मरीज पूरी तरह सुरक्षित है।
हालांकि, इसके बाद ऑपरेशन का इंतजार कर रही छह अन्य गर्भवतियों को ओटी से बाहर भेजना पड़ा और उनके ऑपरेशन बिजली बहाल होने तक स्थगित कर दिए गए।
एनआईसीयू और वेंटिलेटर सेवाएं कैसे रहीं सुरक्षित?
अस्पताल के एनआईसीयू में इस समय 72 नवजात भर्ती हैं। इनमें 20 शिशु वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं।
प्रशासन के मुताबिक 14 वेंटिलेटर जनरेटर से संचालित होते रहे, जबकि छह वेंटिलेटर बैटरी बैकअप पर चलाए गए। एहतियात के तौर पर जेके लोन अस्पताल को भी अलर्ट रखा गया, ताकि आवश्यकता पड़ने पर नवजातों को वहां स्थानांतरित किया जा सके। हालांकि, ऐसी स्थिति नहीं बनी।
ब्लड बैंक में मौजूद करीब 200 यूनिट रक्त को सुरक्षित रखने के लिए तकनीकी कर्मचारियों ने वैकल्पिक व्यवस्था कर जनरेटर से एक फ्रीजर चालू किया।
जांच, भर्ती और डिस्चार्ज सेवाएं भी प्रभावित
बिजली कटौती का असर अस्पताल की प्रशासनिक और जांच सेवाओं पर भी साफ दिखाई दिया।
ब्लड, यूरिन और बायोप्सी जैसी जांचों की बिलिंग नहीं हो सकी, जिससे कई जांचों को टालना पड़ा। मरीजों की भर्ती और डिस्चार्ज प्रक्रिया भी करीब तीन घंटे तक धीमी रही।
इस दौरान कई मरीजों और उनके परिजनों को लंबा इंतजार करना पड़ा।
गर्भवतियों को ऑपरेशन से पहले करना पड़ा इंतजार
बिजली जाने के कारण कई गर्भवतियों का सिजेरियन ऑपरेशन निर्धारित समय पर नहीं हो सका।
एक महिला को ऑपरेशन थिएटर की ड्रेस पहनाकर अंदर ले जाया गया था, लेकिन बिजली कटने के बाद उसे वापस भेजना पड़ा। वह सुबह से बिना भोजन और पानी के ऑपरेशन का इंतजार कर रही थी।
एक अन्य महिला को भी चिकित्सकीय प्रक्रिया के तहत बुधवार रात से खाना-पानी नहीं दिया गया था। बिजली बाधित होने से उसका ऑपरेशन टल गया, जिससे परिजन चिंतित हो गए।
अस्पताल की व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
घटना के बाद अस्पताल की आधारभूत सुविधाओं को लेकर सवाल तेज हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार लगभग 75 करोड़ रुपये की लागत से नई अस्पताल बिल्डिंग तैयार हुए करीब नौ महीने हो चुके हैं, लेकिन अब तक वहां शिफ्टिंग नहीं हो सकी है।
पुरानी इमारत में कई स्थानों पर प्लास्टर गिरने, एसी और डक्टिंग सिस्टम में खराबी जैसी समस्याएं पहले भी सामने आती रही हैं। गर्मी के मौसम में इन समस्याओं का असर मरीजों और नवजात शिशुओं पर अधिक पड़ता है।
अस्पताल प्रशासन ने क्या कहा?
अस्पताल की अधीक्षक डॉ. नूपुर लोहिया ने बताया कि बिजली बाधित होते ही एनआईसीयू और अन्य आवश्यक सेवाओं को तुरंत जनरेटर से जोड़ दिया गया था।
उन्होंने कहा कि जनरेटर सीमित क्षमता का है, इसलिए इमरजेंसी सेवाओं को प्राथमिकता दी गई। जिस महिला का सिजेरियन चल रहा था, उसका ऑपरेशन पहले ही पूरा हो चुका था और केवल ऊपरी टांके लगाए जा रहे थे। वैकल्पिक रोशनी उपलब्ध होने के कारण प्रक्रिया सुरक्षित ढंग से पूरी की गई और सभी मरीज सुरक्षित हैं।
प्रशासन के अनुसार बिजली आपूर्ति दो स्थानों पर केबल फॉल्ट होने के कारण बाधित हुई थी, जिसे ठीक करने के बाद सेवाएं सामान्य कर दी गईं।
Source: अस्पताल प्रशासन के आधिकारिक बयान एवं उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स