बिहार विधानसभा में सोलर लाइट पर घिरी सरकार, NDA विधायकों ने मंत्री को दी खुली चुनौती
बिहार सोलर लाइट का मुद्दा बुधवार को विधानसभा के मानसून सत्र में जोरदार तरीके से गूंजा। बिहार सोलर लाइट व्यवस्था को लेकर सत्ता पक्ष के ही विधायकों ने सरकार के मंत्री के जवाब पर सवाल खड़े कर दिए। भाजपा विधायक जिवेश मिश्र और जदयू विधायक अजीत कुमार ने ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में सोलर लाइटें बंद होने का दावा करते हुए पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को मौके पर चलकर वास्तविक स्थिति देखने की चुनौती दी।
विधानसभा में इस मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष दोनों की ओर से सवाल उठे। विपक्ष ने खराब सोलर लाइटों के कारण गांवों में अंधेरा होने का मुद्दा उठाया, जबकि एनडीए के कुछ विधायकों ने भी जमीनी हालात का हवाला देकर सरकार से कार्रवाई की मांग की।
विधानसभा में कैसे उठा सोलर लाइट का मुद्दा?
प्रश्नकाल के दौरान विभिन्न पंचायतों और मोहल्लों में लगी सोलर स्ट्रीट लाइटों के काम नहीं करने का मामला सदन में उठाया गया। विधायक श्याम रजक ने पूरक प्रश्न पूछते हुए कहा कि कई इलाकों में बड़ी संख्या में सोलर लाइटें बंद पड़ी हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रात के समय अंधेरा रहता है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई स्थानों पर लगाए गए सोलर लाइट सिस्टम की देखरेख ठीक से नहीं हो रही है। साथ ही उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि यदि किसी एजेंसी ने काम पूरा नहीं किया है तो उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है।
इस मुद्दे के बाद सदन में चर्चा तेज हो गई और सत्ता पक्ष के कुछ विधायकों ने भी अपने अनुभव साझा किए।
मंत्री दीपक प्रकाश ने क्या दिया जवाब?
पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने सदन में कहा कि यह कहना सही नहीं है कि 70 प्रतिशत सोलर लाइटें बंद हैं। उन्होंने बताया कि सरकार के रिकॉर्ड के अनुसार लगभग 97 प्रतिशत सोलर लाइटों का अधिष्ठापन (इंस्टॉलेशन) किया जा चुका है।
मंत्री ने कहा कि जिन स्थानों पर तकनीकी खराबी की सूचना मिलती है, वहां मरम्मत की व्यवस्था पहले से मौजूद है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी एजेंसी के पैसे लेकर भाग जाने जैसी स्थिति नहीं है।
उनके अनुसार, संबंधित एजेंसियों की 30 प्रतिशत भुगतान राशि पांच वर्षों तक सुरक्षित रखी जाती है। यदि समय पर मरम्मत नहीं होती है तो भुगतान रोका जाता है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई भी की जाती है।
मंत्री ने विधायकों से कहा कि यदि किसी विशेष क्षेत्र में समस्या है तो उसकी लिखित जानकारी उपलब्ध कराई जाए, ताकि जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
NDA विधायकों ने मंत्री के दावे पर क्यों उठाए सवाल?
मंत्री के जवाब से भाजपा विधायक जिवेश मिश्र संतुष्ट नहीं दिखे। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी आंकड़ों में सब कुछ ठीक है, तो फिर जमीनी स्तर पर बड़ी संख्या में लाइटें बंद क्यों दिखाई देती हैं।
जिवेश मिश्र ने सदन में कहा कि मंत्री उनके क्षेत्र का दौरा करें और स्वयं देखें कि कितनी सोलर लाइटें काम कर रही हैं। उन्होंने दावा किया कि कई जगहों पर लगभग आधी लाइटें बंद पड़ी हैं और शिकायत करने के बावजूद समाधान नहीं हो रहा।
इसके बाद जदयू विधायक अजीत कुमार ने भी मंत्री के जवाब पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि अपने क्षेत्र की पंचायतों का रात में निरीक्षण करने के दौरान बड़ी संख्या में सोलर लाइटें बंद मिलीं। उनका कहना था कि गरीब बस्तियों में लगी कई लाइटें भी काम नहीं कर रही हैं, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
विधानसभा अध्यक्ष ने क्या निर्देश दिया?
सदन में लगातार उठ रहे सवालों के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने पंचायती राज मंत्री को मामले की जांच कराने और वास्तविक स्थिति का पता लगाने का निर्देश दिया।
इस घटनाक्रम ने यह भी दिखाया कि जनहित से जुड़े मुद्दों पर सत्ता पक्ष के विधायक भी सरकार के सामने अपनी बात खुलकर रख रहे हैं। अब निगाहें इस बात पर हैं कि संबंधित विभाग शिकायतों की जांच कर कितना जल्द समाधान सुनिश्चित करता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर स्ट्रीट लाइट सुरक्षा और आवागमन की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। ऐसे में यदि कहीं तकनीकी खराबी है तो उसके शीघ्र समाधान की अपेक्षा स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों दोनों की ओर से की जा रही है।
