Bihar Paperless Registration: अब घर बैठे होगी रजिस्ट्री, 75+ बुजुर्गों को बड़ी राहत
Bihar Paperless Registration सेवा के साथ बिहार सरकार ने डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। Bihar Paperless Registration के तहत अब 75 वर्ष या उससे अधिक आयु के बुजुर्गों को जमीन, मकान या अन्य संपत्ति की रजिस्ट्री कराने के लिए निबंधन कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने होंगे। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस नई व्यवस्था का शुभारंभ करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य बुजुर्गों को सम्मानजनक और आसान सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराना है। नई सेवा के जरिए पात्र नागरिकों को घर बैठे ही रजिस्ट्री की सुविधा मिलेगी।
यह पहल खासतौर पर उन वरिष्ठ नागरिकों के लिए राहत लेकर आई है, जिन्हें उम्र या स्वास्थ्य संबंधी कारणों से सरकारी दफ्तर तक पहुंचने में कठिनाई होती है। सरकार का मानना है कि इससे समय की बचत होगी और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पहले से अधिक पारदर्शी तथा सुविधाजनक बनेगी।
75 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को मिलेगी घर बैठे रजिस्ट्री की सुविधा
नई व्यवस्था के अनुसार 75 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए रजिस्ट्रेशन की पूरी प्रक्रिया उनके घर पर ही पूरी की जाएगी। इससे उन्हें दस्तावेज़ सत्यापन, बायोमेट्रिक और अन्य आवश्यक औपचारिकताओं के लिए निबंधन कार्यालय नहीं जाना पड़ेगा।
सरकार ने 80 वर्ष से अधिक आयु वाले अति-बुजुर्गों के लिए अतिरिक्त सुविधा भी दी है। ऐसे मामलों में निबंधन विभाग की टीम स्वयं लाभार्थी के घर पहुंचेगी और बायोमेट्रिक सत्यापन सहित सभी जरूरी प्रक्रियाएं वहीं पूरी करेगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य बुजुर्गों को सम्मान के साथ सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराना और उनकी शारीरिक परेशानियों को कम करना है।
वैशाली के अवधेश बने पहले लाभार्थी
इस नई डिजिटल सेवा का पहला लाभ वैशाली जिले के निवासी अवधेश को मिला। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सीधे उनसे बातचीत कर सेवा के अनुभव की जानकारी ली।
सरकार के अनुसार यह पहल आने वाले समय में पूरे राज्य में वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक नई सुविधा के रूप में विकसित होगी। पहले लाभार्थी के सफल अनुभव को भविष्य में इस व्यवस्था के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
डिजिटल गवर्नेंस को मिलेगी नई मजबूती
पेपरलेस रजिस्ट्रेशन सेवा बिहार सरकार के डिजिटल प्रशासन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इस व्यवस्था के लागू होने से कागजी प्रक्रिया कम होगी, दस्तावेजों का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा और सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी।
इसके साथ ही नागरिकों को अनावश्यक यात्रा, लंबी कतारों और बार-बार कार्यालय आने-जाने की परेशानी से भी राहत मिलेगी। डिजिटल माध्यम से प्रक्रिया पूरी होने के कारण समय की बचत होगी और सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार आने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी सेवाएं ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने के साथ-साथ आम नागरिकों और प्रशासन के बीच भरोसे को भी मजबूत करती हैं।
बुजुर्गों के लिए क्यों है यह योजना खास?
वरिष्ठ नागरिक अक्सर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण सरकारी कार्यालयों तक पहुंचने में असुविधा महसूस करते हैं। कई बार परिवार के अन्य सदस्यों पर भी निर्भर रहना पड़ता है। नई व्यवस्था से ऐसी परेशानियों में काफी कमी आएगी।
घर पर ही दस्तावेज़ सत्यापन और बायोमेट्रिक जैसी प्रक्रियाएं पूरी होने से बुजुर्गों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण में सेवा मिल सकेगी। इससे सरकारी योजनाओं को अधिक नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में भी मदद मिलेगी।
सरकार का लक्ष्य भविष्य में डिजिटल तकनीक के माध्यम से अन्य सार्वजनिक सेवाओं को भी अधिक सरल और सुलभ बनाना है, ताकि लोगों को कम समय में बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
नई पेपरलेस निबंधन सेवा को बिहार में डिजिटल परिवर्तन और नागरिक सुविधाओं के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। यदि इसका प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो आने वाले समय में यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।
