Bihar Paperless Registry: अगस्त से पूरी तरह डिजिटल होगी जमीन रजिस्ट्री, नहीं लगाने होंगे सरकारी दफ्तरों के चक्कर
Bihar Paperless Registry को लेकर बिहार सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। Bihar Paperless Registry व्यवस्था अगस्त 2026 से पूरे राज्य में लागू होने जा रही है। इसके बाद जमीन, फ्लैट और अन्य संपत्तियों की रजिस्ट्री के लिए लोगों को सरकारी कार्यालयों में मोटी फाइलें लेकर बार-बार चक्कर नहीं लगाने होंगे। दस्तावेजों की तैयारी, सत्यापन, ई-साइन और रजिस्ट्रेशन की पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से पूरी की जाएगी। सरकार का दावा है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी और आम लोगों का समय भी बचेगा।
मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने राज्य के सभी 145 निबंधन कार्यालयों को चरणबद्ध तरीके से पूरी तरह पेपरलेस बनाने की तैयारी लगभग पूरी कर ली है। जुलाई में कई कार्यालयों में इसकी शुरुआत हो चुकी है, जबकि अगस्त से यह व्यवस्था पूरे राज्य में लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।
अगस्त से सभी 145 निबंधन कार्यालय होंगे पेपरलेस
सरकार के अनुसार राज्य के सभी जिला और अवर निबंधन कार्यालयों में जमीन एवं संपत्ति रजिस्ट्री की प्रक्रिया डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित की जाएगी।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद दस्तावेजों की हार्ड कॉपी जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। खरीददार, विक्रेता और संबंधित अधिकारियों के डिजिटल हस्ताक्षर (ई-साइन) के माध्यम से पूरी रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
इस बदलाव का उद्देश्य नागरिकों को तेज, सुरक्षित और पारदर्शी सेवा उपलब्ध कराना है।
18 जुलाई को नौ और कार्यालय होंगे डिजिटल
बिहार निबंधन नियमावली 2026 के तहत पहले चरण में 10 निबंधन कार्यालयों को पेपरलेस बनाने का लक्ष्य रखा गया था।
हाजीपुर जिला निबंधन कार्यालय में इस व्यवस्था की शुरुआत होने के बाद 18 जुलाई को नौ और कार्यालय पेपरलेस बनाए जाएंगे। इनमें शामिल हैं—
- जहानाबाद जिला निबंधन कार्यालय
- पातेपुर (वैशाली)
- फतुहा (पटना)
- संपतचक (पटना)
- सोनपुर (सारण)
- डेहरी ऑन सोन (रोहतास)
- मंझौल (बेगूसराय)
- बाबूबरही (मधुबनी)
- सोनवर्षा (सहरसा)
इन कार्यालयों में डिजिटल रजिस्ट्री प्रक्रिया लागू होने के बाद लोगों को कागजी दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता काफी कम हो जाएगी।
कैसे होगी नई डिजिटल रजिस्ट्री प्रक्रिया?
नई व्यवस्था में पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन आधारित होगी।
सबसे पहले खरीदार और विक्रेता आवश्यक दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड करेंगे। इसके बाद दस्तावेजों की ऑनलाइन जांच और सत्यापन होगा। सभी पक्षों की सहमति मिलने के बाद ई-साइन के माध्यम से रजिस्ट्री पूरी की जाएगी।
डीड लेखन से जुड़े सेवा प्रदाताओं के लिए भी नए नियम लागू किए जा रहे हैं। विभाग सभी संबंधित हितधारकों को प्रशिक्षण भी देगा ताकि नई प्रणाली सुचारु रूप से संचालित हो सके।
आधार सत्यापन और ई-साइन से बढ़ेगी सुरक्षा
नई व्यवस्था में खरीददार और विक्रेता दोनों का सहमति-आधारित आधार सत्यापन किया जाएगा।
ओटीपी के माध्यम से भूमि हस्तांतरण की सहमति दर्ज होगी, जिसे ई-साइन प्रक्रिया कहा जाएगा। इससे दस्तावेजों की प्रामाणिकता सुनिश्चित होगी और फर्जी पहचान के जरिए होने वाले लेनदेन पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से नकली दस्तावेज, छेड़छाड़ और धोखाधड़ी जैसी घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आएगी।
जहां पेपरलेस व्यवस्था नहीं, वहां ई-निबंधन की सुविधा जारी
जिन निबंधन कार्यालयों में अभी पूरी तरह पेपरलेस व्यवस्था लागू नहीं हुई है, वहां फिलहाल ई-निबंधन की सुविधा उपलब्ध रहेगी।
लोग विभाग के पोर्टल पर जमीन, फ्लैट या विवाह पंजीकरण से जुड़े आवश्यक दस्तावेज 24 घंटे कभी भी अपलोड कर सकते हैं। इसके बाद अपनी सुविधा के अनुसार रजिस्ट्री के लिए तिथि और समय का चयन किया जा सकता है।
निर्धारित समय पर कार्यालय पहुंचकर अंतिम औपचारिकताएं पूरी कर रजिस्ट्री कराई जा सकती है।
आम लोगों को क्या होगा फायदा?
नई डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद नागरिकों को कई महत्वपूर्ण लाभ मिलने की उम्मीद है।
- सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर नहीं लगाने होंगे।
- कागजी दस्तावेजों की जरूरत काफी कम हो जाएगी।
- रजिस्ट्री प्रक्रिया पहले की तुलना में तेज होगी।
- डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे।
- फर्जीवाड़ा और दस्तावेजों में छेड़छाड़ की संभावना घटेगी।
- समय और खर्च दोनों की बचत होगी।
- पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।
सरकार का उद्देश्य रजिस्ट्री सेवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़कर नागरिकों को सरल, सुरक्षित और भरोसेमंद सेवा उपलब्ध कराना है।
