बिहार BDO पत्नी मौत केस: गिरफ्तारी के बाद मोबाइल फॉरेंसिक जांच पर टिकी नजर, जानें पूरा मामला
बिहार BDO पत्नी मौत केस ने राज्य में व्यापक चर्चा पैदा कर दी है। बिहार BDO पत्नी मौत केस में दरभंगा के जाले प्रखंड में तैनात बीडीओ मनोज कुमार को उनकी पत्नी अमृता कुमारी की मौत के मामले में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस इस मामले में हत्या, दहेज प्रताड़ना और अन्य आरोपों के विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है। वहीं, जब्त किए गए मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच और डिजिटल साक्ष्यों से मामले में अहम जानकारी मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
मामले में मृतका के परिजनों ने बीडीओ पर गंभीर आरोप लगाए हैं। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष उपलब्ध साक्ष्यों तथा फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर ही निकाला जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार, जाले प्रखंड के बीडीओ मनोज कुमार की पत्नी अमृता कुमारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी।
मृतका के भाई ने मिठनपुरा थाना में दर्ज कराई गई एफआईआर में आरोप लगाया है कि उनकी बहन को कथित रूप से जहरीला पदार्थ देकर मार दिया गया।
शिकायत में बीडीओ मनोज कुमार के अलावा उनके माता-पिता, भाई और बहन को भी नामजद किया गया है।
हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो सकेगी।
परिजनों ने लगाए दहेज प्रताड़ना के आरोप
एफआईआर के अनुसार, अमृता कुमारी के परिवार का आरोप है कि शादी के बाद से लगातार 10 लाख रुपये दहेज की मांग की जा रही थी।
परिजनों का दावा है कि मांग पूरी नहीं होने पर अमृता को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि घटना वाली रात उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
कथित प्रेम संबंध का भी आरोप
मृतका के परिवार ने आरोप लगाया है कि बीडीओ मनोज कुमार का एक महिला पुलिस अधिकारी से कथित प्रेम संबंध था।
परिजनों का कहना है कि अमृता इस कथित रिश्ते का विरोध करती थीं, जिसके कारण पति-पत्नी के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था।
हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस पहलू की भी जांच की जा रही है और अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा गया है।
महिला दारोगा से पूछताछ क्यों?
पुलिस ने इस मामले में बेगूसराय में तैनात एक महिला दारोगा को हिरासत में लेकर पूछताछ की है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह पूछताछ मामले से जुड़े तथ्यों की पुष्टि और विभिन्न पहलुओं की जांच के तहत की जा रही है।
पुलिस ने अभी तक महिला पुलिस अधिकारी के खिलाफ किसी अपराध की पुष्टि नहीं की है।
मोबाइल फॉरेंसिक जांच से क्या मिल सकती है जानकारी?
जांच के दौरान पुलिस ने बीडीओ मनोज कुमार के दो मोबाइल फोन जब्त किए हैं।
अब इन मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी। जांच एजेंसियां कॉल डिटेल, व्हाट्सएप चैट, सोशल मीडिया गतिविधियों और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की पड़ताल करेंगी।
पुलिस का मानना है कि डिजिटल साक्ष्यों से घटनाक्रम की टाइमलाइन, संपर्क और अन्य तथ्यों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
पुलिस जांच में क्या सामने आया?
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती पूछताछ में मनोज कुमार ने पति-पत्नी के बीच विवाद होने की बात स्वीकार की है।
साथ ही उन्होंने घटना के समय पटना में प्रशिक्षण कार्यक्रम में होने का दावा किया था।
हालांकि, पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान इस दावे की पुष्टि नहीं हो सकी। इसी आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।
कौन हैं मनोज कुमार?
पुलिस के अनुसार, मनोज कुमार मूल रूप से मुजफ्फरपुर जिले के बंदरा प्रखंड के पियर गांव के निवासी हैं।
जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2018 में उनका चयन रक्षा मंत्रालय में ऑडिटर के पद पर हुआ था।
इसके बाद उन्होंने बिहार प्रशासनिक सेवा की परीक्षा उत्तीर्ण की और वर्ष 2022 में प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) बने।
उनकी शादी अमृता कुमारी से हुई थी, जो सीतामढ़ी जिले के परिहार प्रखंड के बथुआरा गांव की रहने वाली थीं।
आगे क्या होगी कार्रवाई?
पुलिस का कहना है कि मामले में सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच की जा रही है।
फॉरेंसिक रिपोर्ट, डिजिटल साक्ष्य, गवाहों के बयान और पूछताछ के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
जांच पूरी होने तक किसी भी आरोपी को दोषी मानना उचित नहीं होगा। अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा।
एक नजर में पूरा मामला
- बीडीओ मनोज कुमार गिरफ्तार।
- पत्नी अमृता कुमारी की मौत की जांच जारी।
- परिजनों ने हत्या और दहेज प्रताड़ना के आरोप लगाए।
- कथित प्रेम संबंध के पहलू की भी जांच।
- महिला दारोगा से पूछताछ।
- जब्त मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच होगी।
- पुलिस ने जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष की बात कही।
नोट: इस खबर में उल्लिखित हत्या, दहेज प्रताड़ना और कथित संबंध से जुड़े सभी आरोप एफआईआर और शिकायतकर्ता के दावों पर आधारित हैं। मामले की जांच जारी है और अंतिम तथ्य पुलिस जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होंगे।
